फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Sirsa News ›   Kaikeyi asked for 14 years of exile for Shri Ram, Maharaj Dasharatha sacrificed his life due to separation from his son

Sirsa News: कैकेयी ने मांगा श्रीराम के लिए 14 वर्ष का वनवास, पुत्र वियोग में महाराज दशरथ ने त्यागे प्राण

Mon, 18 Mar 2024 01:07 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा Updated Mon, 18 Mar 2024 01:07 AM IST
विज्ञापन
Kaikeyi asked for 14 years of exile for Shri Ram, Maharaj Dasharatha sacrificed his life due to separation from his son
कथा करते कथावाचक शास्त्री जयदेव दाधीच
बडागुढ़ा। गांव कर्मगढ़ के राधा-कृष्ण मंदिर में चल रही राम कथा के छठे दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने शिरकत कर कथा सुनी। कथा के दौरान कथावाचक शास्त्री जयदेव दाधीच ने श्रद्धालुओं को श्रीराम के वनवास, महाराज दशरथ के प्राण त्यागने तथा भरत मिलाप का प्रसंग सुनाया।कथावाचक ने सुनाया कि अयोध्या में श्रीराम के राज्याभिषेक की तैयारियां चल रहीं थी। इसी बीच दासी मंथरा के बहकावे में आकर रानी कैकेयी ने महाराज दशरथ को पूर्व में दिए गए वचनों का स्मरण करवाते हुए श्रीराम के लिए 14 वर्ष का वनवास व अपने पुत्र भरत के लिए राजगद्दी मांग ली।अपने वचनों में बंधे महाराज दशरथ ने कैकेयी को अन्य और कुछ मांगने के लिए कहा, लेकिन वे अपनी हठ पर अडिग रहीं।
विज्ञापन

अपने पिता के वचनों की लाज रखते हुए श्रीराम वन में जाने हेतु तैयार हो गए। श्रीराम के वनवास की खबर जैसे ही नगर में फैली तो सभी नगरवासी दुखी हो जाते हैं। वहीं देवी सीता ने भी पति श्रीराम के साथ वनवास पर जाने का निश्चय किया। वहीं जब लक्ष्मण को यह सूचना मिलती है तो वे क्रोधित हुए, लेकिन श्रीराम के समझाने पर वे शांत हो गए।
विज्ञापन

लक्ष्मण अपने भैया राम से बहुत स्नेह करते थे इसलिए उन्होंने भी उनके साथ वनवास पर जाने का निश्चय किया। श्रीराम, लक्ष्मण व सीता तीनों अपने माता-पिता का आशीर्वाद लेकर वन हेतु प्रस्थान करते हैं। कथावाचक जयदेव दाधीच ने सुनाया कि श्रीराम के वनवास जाने की पीड़ा को महाराज दशरथ सहन नहीं कर पाए और पुत्र वियोग में तड़प कर प्राण त्याग दिए।
विज्ञापन
विज्ञापन

श्रीराम व भरत का हुआ मिलाप
इसके बाद जब भरत और शत्रुघ्न ननिहाल से अयोध्या से लौटे तो उन्हें पूरी बात का पता चला। फिर भरत अपनी माता कैकेयी पर क्रोधित हुए और कहा कि वे अपने भाई श्रीराम की जगह राजगद्दी पर नहीं बैठेंगे। फिर भरत सेना के साथ श्रीराम को ढूंढने वन के लिए निकल जाते हैं। जहां उनका मिलाप श्रीराम से हुआ। भरत ने श्रीराम को वापस अयोध्या चलने के लिए कहा, लेकिन श्रीराम ने अपने पिता के वचन की बात कहते हुए उन्हें वापस लौटा दिया। जाते-जाते भरत ये कहकर श्रीराम की चरण पादुकाएं ले गए कि जब तक वे वनवास से नहीं आ जाते तब तक वे इन चरण पादुकाओं को राजसिंहासन पर विराजमान रखेंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed