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मां की भांति दूध पिलाने वाली गाय को बेसहारा छोड़ना सही नहीं : राजेंद्रानंद महाराज
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कथा में प्रवचन करते स्वामी राजेन्द्रानंद व उपस्थित श्रद्धालु।
बडागुढ़ा। गांव छतरियां की श्री कृष्ण प्रणामी गोशाला में आयोजित साप्ताहिक श्री धेनुमानस गो कथा का वीरवार को समापन हो गया। इस दौरान कथावाचक राजेंद्रानंद महाराज ने कहा कि देखा जाता है लोग दुग्ध पान कर गऊ को बेसहारा छोड़ देते हैं। जिस गऊ ने एक मां की भांति पूरे परिवार को दूध पिलाया क्या उसे यूं बेसहारा छोड़ना सही है।
कथा के अंतिम दिन हवन यज्ञ व भंडारे का आयोजन हुआ। इस दौरान महादेव विरक्त कुटिया बोलांवाली से महात्मा परमात्मानंद, कृष्णानंद व कथावाचक शास्त्री जयदेव दाधिच ने विशेष रूप से शिरकत की। महात्मा परमात्मानंद व कृष्णानंद ने अपनी ओर से गोशाला में गोवंश के लिए नकद राशि भी भेंट की। कथावाचक स्वामी राजेंद्रानंद ने भी गोवंश के लिए सराहनीय दान दिया।
स्वामी राजेंद्रानंद ने कहा कि इस साप्ताहिक कथा में उन्हें जो भी सुनने को मिला उस पर अमल करते हुए अपने जीवन में धारण करें। उन्होंने कहा कि अगर किसी के पास गोसेवा के लिए ज्यादा समय नहीं है तो कम से कम गोशाला में जाकर गोवंश को स्पर्श कर व रोटी खिलाकर ही आ जाएं, इससे घर में सुख-शांति का आगमन होगा।
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उन्होंने कहा कि अपने जीवन में सद्कर्म करें और राम नाम की भक्ति से जुड़े रहें। इस संसार में सब-कुछ यहीं रह जाना है। मात्र राम का नाम ही है जो मनुष्य की मृत्यु के बाद भी साथ जाएगा। महात्मा परमात्मानंद ने भी प्रवचन करते हुए कहा कि दुनियावी कार्यों के साथ-साथ राम नाम के लिए समय निकालना अति जरूरी है। राम नाम के जाप से जन्म-जन्मांतर के पाप-कर्म कटते हैं।
इस अवसर पर गोशाला महासंघ के जिलाध्यक्ष योगेश बिश्नोई, ओमप्रकाश ज्याणी, गोशाला प्रधान ताराचंद, धर्मपाल ढाका, पूर्व सरपंच संतलाल जंडवाला बिश्नोइयां, सुखदेव सेन, डॉ. बलराम, रामस्वरूप देहड़ू, रामसिंह व रामप्रताप सहारण आदि मौजूद रहे।
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कथा के अंतिम दिन हवन यज्ञ व भंडारे का आयोजन हुआ। इस दौरान महादेव विरक्त कुटिया बोलांवाली से महात्मा परमात्मानंद, कृष्णानंद व कथावाचक शास्त्री जयदेव दाधिच ने विशेष रूप से शिरकत की। महात्मा परमात्मानंद व कृष्णानंद ने अपनी ओर से गोशाला में गोवंश के लिए नकद राशि भी भेंट की। कथावाचक स्वामी राजेंद्रानंद ने भी गोवंश के लिए सराहनीय दान दिया।
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स्वामी राजेंद्रानंद ने कहा कि इस साप्ताहिक कथा में उन्हें जो भी सुनने को मिला उस पर अमल करते हुए अपने जीवन में धारण करें। उन्होंने कहा कि अगर किसी के पास गोसेवा के लिए ज्यादा समय नहीं है तो कम से कम गोशाला में जाकर गोवंश को स्पर्श कर व रोटी खिलाकर ही आ जाएं, इससे घर में सुख-शांति का आगमन होगा।
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उन्होंने कहा कि अपने जीवन में सद्कर्म करें और राम नाम की भक्ति से जुड़े रहें। इस संसार में सब-कुछ यहीं रह जाना है। मात्र राम का नाम ही है जो मनुष्य की मृत्यु के बाद भी साथ जाएगा। महात्मा परमात्मानंद ने भी प्रवचन करते हुए कहा कि दुनियावी कार्यों के साथ-साथ राम नाम के लिए समय निकालना अति जरूरी है। राम नाम के जाप से जन्म-जन्मांतर के पाप-कर्म कटते हैं।
इस अवसर पर गोशाला महासंघ के जिलाध्यक्ष योगेश बिश्नोई, ओमप्रकाश ज्याणी, गोशाला प्रधान ताराचंद, धर्मपाल ढाका, पूर्व सरपंच संतलाल जंडवाला बिश्नोइयां, सुखदेव सेन, डॉ. बलराम, रामस्वरूप देहड़ू, रामसिंह व रामप्रताप सहारण आदि मौजूद रहे।