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Sirsa News: इसरो की प्रदर्शनी रही आकर्षण का केंद्र, सैटेलाइट व रॉकेट के मॉडल लगाए
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सिरसा।चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय में इसरो की ओर से लगाई गई प्रदर्शनी । संवाद
सिरसा। चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय में विज्ञान और नवाचार को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से पहला दो दिवसीय साइंस कॉन्क्लेव- उड़ान 2025 शुक्रवार को शुरू हुआ। इस कॉन्क्लेव में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों, जिला प्रशासन, विद्यालयों, कॉलेजों और सामाजिक संगठनों की ओर से विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पर आधारित अनेक प्रदर्शनियां लगाई गईं।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों, शिक्षकों, शोधार्थियों और वैज्ञानिकों की भारी भागीदारी देखने को मिली। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण इसरो (भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन) की चार सदस्यीय टीम रही, जिसने अपने अनुभवों को विद्यार्थियों के साथ साझा किया। इसरो की टीम ने विशेष रूप से प्रदर्शनी में सैटेलाइट, रॉकेट और लॉन्चिंग सिस्टम के मॉडल प्रदर्शित किए।
इन मॉडलों ने छात्रों में अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति गहरी रुचि उत्पन्न की। इसरो वैज्ञानिकों ने विद्यार्थियों को बताया कि कैसे भारत अंतरिक्ष क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनता जा रहा है और आने वाले वर्षों में चंद्रयान और गगनयान जैसी परियोजनाएं नई ऊंचाइयां छुएंगी। कॉन्क्लेव में विज्ञान, पर्यावरण, तकनीक, नवीकरणीय ऊर्जा, जैव विविधता और स्वास्थ्य विज्ञान से जुड़ी 50 से अधिक प्रदर्शनियां लगाई गईं।
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विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों द्वारा नवाचार आधारित प्रोजेक्ट्स प्रस्तुत किए गए। विद्यार्थियों ने रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, कृषि तकनीक, जल संरक्षण और सौर ऊर्जा पर अपने मॉडल प्रस्तुत किए।
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इसरो ने साउंडिंग रॉकेट प्रदर्शित किया
प्रथम प्रदर्शनी इसरो की तरफ से लगाई गई जिसमें इसरो से पधारे योगेश कुमार, पंकज कुमार व नीतू कुमारी शामिल रहे। इस दौरान उन्होंने विद्यार्थियों को स्पेस, रॉकेट सेटेलाइट के बारे में विस्तार से बताया। इसरो ने प्रदर्शनी में सेटेलाइट बीटल मॉडल प्रदर्शित किया। इसमें बताया कि सेटेलाइट किस प्रकार से मूवमेंट करता है। साउंडिंग रॉकेट प्रदर्शित किया गया। वैज्ञानिकों ने विद्यार्थियों को बताया कि सैटेलाइट बीटल मॉडल किस प्रकार से पृथ्वी की कक्षा में घूमता है और किस तकनीक से डेटा एकत्र करता है। उन्होंने साउंडिंग रॉकेट की संरचना और उसके प्रक्षेपण की प्रक्रिया को सरल भाषा में समझाया। पंकज कुमार ने विद्यार्थियों को बताया कि इसरो का उद्देश्य केवल अंतरिक्ष अनुसंधान तक सीमित नहीं है, बल्कि उसका मुख्य लक्ष्य विज्ञान को जन-जन तक पहुंचाना और युवाओं को वैज्ञानिक सोच के लिए प्रेरित करना है। अब तक इसरो की ओर से 15 से ज्यादा प्रदर्शनी लगाई जा चुकी हैं।
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विद्यार्थियों ने बनाया स्मार्ट डस्टबिन
राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल गुड़ियाखेड़ा की तरफ से विद्यार्थियों ने मॉडल प्रस्तुत किए। विद्यार्थियों ने चार मॉडल प्रस्तुत किए, जिसमें 8 विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। इस दौरान विद्यार्थियों ने स्मार्ट डस्टबिन का मॉडल प्रस्तुत किया। इस स्मार्ट डस्टबिन की खासियत यह है कि इसमें अल्ट्रासोनिक सेंसर लगाया गया है, जो किसी व्यक्ति या वस्तु के करीब आते ही ढक्कन को अपने आप खोल देता है। जैसे ही कचरा अंदर डाला जाता है, ढक्कन अपने आप बंद हो जाता है। इसके अलावा, डस्टबिन में एक सेंसर अलर्ट सिस्टम भी लगाया गया है जो कचरा भर जाने पर सिग्नल देता है ताकि समय पर सफाई की जा सके। विद्यार्थियों की टीम ने बताया कि इस मॉडल को बनाने का उद्देश्य सार्वजनिक स्थानों और विश्वविद्यालय परिसर में स्वच्छता को बढ़ावा देना है। यह डस्टबिन बैटरी और सौर ऊर्जा दोनों से चल सकता है, जिससे यह पर्यावरण के अनुकूल भी है। टीम ने बताया कि यह प्रोजेक्ट स्वच्छ भारत अभियान से प्रेरित है और उनका उद्देश्य तकनीक को सामाजिक उपयोग के साथ जोड़ना है।
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कार्यक्रम में विद्यार्थियों, शिक्षकों, शोधार्थियों और वैज्ञानिकों की भारी भागीदारी देखने को मिली। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण इसरो (भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन) की चार सदस्यीय टीम रही, जिसने अपने अनुभवों को विद्यार्थियों के साथ साझा किया। इसरो की टीम ने विशेष रूप से प्रदर्शनी में सैटेलाइट, रॉकेट और लॉन्चिंग सिस्टम के मॉडल प्रदर्शित किए।
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इन मॉडलों ने छात्रों में अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति गहरी रुचि उत्पन्न की। इसरो वैज्ञानिकों ने विद्यार्थियों को बताया कि कैसे भारत अंतरिक्ष क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनता जा रहा है और आने वाले वर्षों में चंद्रयान और गगनयान जैसी परियोजनाएं नई ऊंचाइयां छुएंगी। कॉन्क्लेव में विज्ञान, पर्यावरण, तकनीक, नवीकरणीय ऊर्जा, जैव विविधता और स्वास्थ्य विज्ञान से जुड़ी 50 से अधिक प्रदर्शनियां लगाई गईं।
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विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों द्वारा नवाचार आधारित प्रोजेक्ट्स प्रस्तुत किए गए। विद्यार्थियों ने रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, कृषि तकनीक, जल संरक्षण और सौर ऊर्जा पर अपने मॉडल प्रस्तुत किए।
इसरो ने साउंडिंग रॉकेट प्रदर्शित किया
प्रथम प्रदर्शनी इसरो की तरफ से लगाई गई जिसमें इसरो से पधारे योगेश कुमार, पंकज कुमार व नीतू कुमारी शामिल रहे। इस दौरान उन्होंने विद्यार्थियों को स्पेस, रॉकेट सेटेलाइट के बारे में विस्तार से बताया। इसरो ने प्रदर्शनी में सेटेलाइट बीटल मॉडल प्रदर्शित किया। इसमें बताया कि सेटेलाइट किस प्रकार से मूवमेंट करता है। साउंडिंग रॉकेट प्रदर्शित किया गया। वैज्ञानिकों ने विद्यार्थियों को बताया कि सैटेलाइट बीटल मॉडल किस प्रकार से पृथ्वी की कक्षा में घूमता है और किस तकनीक से डेटा एकत्र करता है। उन्होंने साउंडिंग रॉकेट की संरचना और उसके प्रक्षेपण की प्रक्रिया को सरल भाषा में समझाया। पंकज कुमार ने विद्यार्थियों को बताया कि इसरो का उद्देश्य केवल अंतरिक्ष अनुसंधान तक सीमित नहीं है, बल्कि उसका मुख्य लक्ष्य विज्ञान को जन-जन तक पहुंचाना और युवाओं को वैज्ञानिक सोच के लिए प्रेरित करना है। अब तक इसरो की ओर से 15 से ज्यादा प्रदर्शनी लगाई जा चुकी हैं।
विद्यार्थियों ने बनाया स्मार्ट डस्टबिन
राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल गुड़ियाखेड़ा की तरफ से विद्यार्थियों ने मॉडल प्रस्तुत किए। विद्यार्थियों ने चार मॉडल प्रस्तुत किए, जिसमें 8 विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। इस दौरान विद्यार्थियों ने स्मार्ट डस्टबिन का मॉडल प्रस्तुत किया। इस स्मार्ट डस्टबिन की खासियत यह है कि इसमें अल्ट्रासोनिक सेंसर लगाया गया है, जो किसी व्यक्ति या वस्तु के करीब आते ही ढक्कन को अपने आप खोल देता है। जैसे ही कचरा अंदर डाला जाता है, ढक्कन अपने आप बंद हो जाता है। इसके अलावा, डस्टबिन में एक सेंसर अलर्ट सिस्टम भी लगाया गया है जो कचरा भर जाने पर सिग्नल देता है ताकि समय पर सफाई की जा सके। विद्यार्थियों की टीम ने बताया कि इस मॉडल को बनाने का उद्देश्य सार्वजनिक स्थानों और विश्वविद्यालय परिसर में स्वच्छता को बढ़ावा देना है। यह डस्टबिन बैटरी और सौर ऊर्जा दोनों से चल सकता है, जिससे यह पर्यावरण के अनुकूल भी है। टीम ने बताया कि यह प्रोजेक्ट स्वच्छ भारत अभियान से प्रेरित है और उनका उद्देश्य तकनीक को सामाजिक उपयोग के साथ जोड़ना है।