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4 साल में 20 किसानों ने 200 एकड़ में फलदार पौधे लगा अतिरिक्त कमाई का बनाया जरिया
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अमरूद के बाग में तैयार पौधों को दिखाते हुए किसान।
- फोटो : Sirsa
चोपटा। नहरी पानी की कमी, बारिश समय पर ना होना, फसलों में विभिन्न प्रकार की बीमारियां व अन्य प्राकृतिक आपदाओं के आने से किसानों को परंपरागत खेती से घाटा होने लगा। परंपरागत खेती से आमदनी कम होने से आर्थिक स्थिति डांवाडोल हो जाती है। लेकिन गांव शाहपूरिया (सिरसा) के किसानों ने हौसला हारने की बजाए विभिन्न प्रकार के फलों के बाग लगा कर कमाई का जरिया खोजा।
20 किसानों ने अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाए रखने के लिए करीब 200 एकड़ में अनार, अमरूद, बेरी, अंजीर सहित कई प्रकार के फलों के बाग लगा रखे हैं। इससे परंपरागत कृषि के साथ अतिरिक्त आमदन शुरू हो गई। लीक से हटकर कुछ करने के जज्बे ने गांव शाहपुरिया के किसानों को हरियाणा के साथ-साथ निकटवर्ती राजस्थान के आसपास के गांवों में अलग पहचान भी दिलवाई।
पैंतालिसा क्षेत्र के गांव शाहपूरिया के किसानों में राजवीर ने 10 एकड़ में अनार का बाग लगाया। कृष्ण कुमार सिंवर ने 25 एकड़ में किन्नू और माल्टा का बाग लगाया। इसी के साथ हनुमान राजपूत ने 5 एकड़ में अंजीर का बाग लगाया। रामकुमार कुलड़िया ने भी 2 एकड़ में अंजीर का बाग लगाया, इंद्रपाल यादव ने 2 एकड़ में अनार का बाग लगाया, हरि सिंह कुलड़िया ने 6 एकड़ में अनार किन्नू माल्टा का बाग लगा कर कमाई शुरू की। अनूप कुमार ने 4 एकड़ में बेरी का बाग और 4 एकड़ में अनार का बाग लगा कर परंपरागत खेती के साथ बागवानी की तरफ रुख किया। रामकुमार सिंवर ने 4 एकड़ में अमरूद का बाग लगाया, किसान देवीलाल ने 4 एकड़ में किन्नू माल्टा का बाग लगाया है।
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ड्रिप सिस्टम से कम पानी में तैयार हो रहे है पौधे
किसानों बताया कि रेतीली जमीन और नहरी पानी की कमी के कारण परंपरागत खेती से बचत कम होने लगी। सरकार द्वारा चलाई गई बागवानी स्कीमों के तहत उन्होंने अपने खेतों में डिग्गिया इत्यादि बनाकर ड्रिप सिस्टम से सिंचाई शुरू कर दी। जिससे पानी की बचत होने लगी तथा पौधों को सीधे उनकी जड़ों में खाद और पानी मिलने लगा। बागवानी के साथ-साथ परंपरागत खेती भी होने लगी।
मंडी दूर से परेशान है किसान
मंडी दूर होने के कारण यातायात खर्च ज्यादा हो जाता है। कृष्ण कुमार सिंवर व अन्य किसानों ने बताया कि उसके गांव से सिरसा मंडी दूर पड़ती है। जिससे फलों को वहां ले जाकर बेचने में यातायात खर्च ज्यादा आता है। तथा बचत कम होती है। उसका कहना है कि अगर फलों की मंडी या फ्रूट प्रोसेसिंग प्लांट नाथूसरी चोपटा में विकसित हो जाए तो यातायात खर्च कम होने से बचत ज्यादा हो जाएगी। इसके साथ ही सरकार द्वारा शुरू की गई बीमा स्कीमों को सही तरीके से लागू किया जाए।
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20 किसानों ने अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाए रखने के लिए करीब 200 एकड़ में अनार, अमरूद, बेरी, अंजीर सहित कई प्रकार के फलों के बाग लगा रखे हैं। इससे परंपरागत कृषि के साथ अतिरिक्त आमदन शुरू हो गई। लीक से हटकर कुछ करने के जज्बे ने गांव शाहपुरिया के किसानों को हरियाणा के साथ-साथ निकटवर्ती राजस्थान के आसपास के गांवों में अलग पहचान भी दिलवाई।
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पैंतालिसा क्षेत्र के गांव शाहपूरिया के किसानों में राजवीर ने 10 एकड़ में अनार का बाग लगाया। कृष्ण कुमार सिंवर ने 25 एकड़ में किन्नू और माल्टा का बाग लगाया। इसी के साथ हनुमान राजपूत ने 5 एकड़ में अंजीर का बाग लगाया। रामकुमार कुलड़िया ने भी 2 एकड़ में अंजीर का बाग लगाया, इंद्रपाल यादव ने 2 एकड़ में अनार का बाग लगाया, हरि सिंह कुलड़िया ने 6 एकड़ में अनार किन्नू माल्टा का बाग लगा कर कमाई शुरू की। अनूप कुमार ने 4 एकड़ में बेरी का बाग और 4 एकड़ में अनार का बाग लगा कर परंपरागत खेती के साथ बागवानी की तरफ रुख किया। रामकुमार सिंवर ने 4 एकड़ में अमरूद का बाग लगाया, किसान देवीलाल ने 4 एकड़ में किन्नू माल्टा का बाग लगाया है।
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ड्रिप सिस्टम से कम पानी में तैयार हो रहे है पौधे
किसानों बताया कि रेतीली जमीन और नहरी पानी की कमी के कारण परंपरागत खेती से बचत कम होने लगी। सरकार द्वारा चलाई गई बागवानी स्कीमों के तहत उन्होंने अपने खेतों में डिग्गिया इत्यादि बनाकर ड्रिप सिस्टम से सिंचाई शुरू कर दी। जिससे पानी की बचत होने लगी तथा पौधों को सीधे उनकी जड़ों में खाद और पानी मिलने लगा। बागवानी के साथ-साथ परंपरागत खेती भी होने लगी।
मंडी दूर से परेशान है किसान
मंडी दूर होने के कारण यातायात खर्च ज्यादा हो जाता है। कृष्ण कुमार सिंवर व अन्य किसानों ने बताया कि उसके गांव से सिरसा मंडी दूर पड़ती है। जिससे फलों को वहां ले जाकर बेचने में यातायात खर्च ज्यादा आता है। तथा बचत कम होती है। उसका कहना है कि अगर फलों की मंडी या फ्रूट प्रोसेसिंग प्लांट नाथूसरी चोपटा में विकसित हो जाए तो यातायात खर्च कम होने से बचत ज्यादा हो जाएगी। इसके साथ ही सरकार द्वारा शुरू की गई बीमा स्कीमों को सही तरीके से लागू किया जाए।