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भक्ति, सेवा और दान के लिए मिली है मानव देह : पंडित प्रदीप मिश्रा
Sat, 02 Mar 2024 11:32 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Sat, 02 Mar 2024 11:32 PM IST
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सिरसा। तारा बाबा कुटिया में सात दिवसीय शिव महापुराण कथा का शनिवार को समापन हुआ। इस दौरान सीहोरवाले कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि मानव देह भक्ति, सेवा और दान करने के लिए मिली है। इन सभी से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्त को शिव की कृपा मिलती है। गोभक्त भी संत का ही रूप होता है। मंदिर से कथा पंडाल तक व्यक्ति में सेवा भाव जरूर होना चाहिए। गुरुद्वारे में जाकर भी सेवा की सीख मिलती है। रब की सेवा नहीं कर सकते तो जनसेवा करना, यह सेवा कभी खाली नहीं जाती।
विधायक गोपाल कांडा ने कहा कि शिव कथा से सनातन धर्म, संस्कृति और संस्कारों की शिक्षा मिली है। इस व्यासपीठ से बरसे रस में श्रद्धालु रंगे हुए दिखे। सिरसा गोभक्तों की भूमि है। इसीलिए देश में सबसे अधिक गोशालाएं सिरसा में हैं। व्यापारियों की सेवा भावना नमन करने योग्य है।
पंडित प्रदीप मिश्रा महाराज ने कहा कि इस शिवरात्रि पर तीन विशेष योग बन रहे हैं। इस मौके को मत चूकना। शिवरात्रि से पहले के नौ दिनों को नवरात्र कहा जाता है। इस अवधि में आपने कथा सुनी। शिवरात्रि से पहले सोमवार को अष्टमी है। शुक्रवार को प्रदोष भी है और शिवरात्रि भी है। ये बहुत बड़ा सौभाग्य है। भक्त को इस अवधि में भक्ति करने का पूरा लाभ मिलेगा। शिवभक्त संत बाबा तारा की कुटिया में पहली बार शिवपुराण कथा हुई। इससे शिव और बाबा तारा का आशीर्वाद एकसाथ मिला।
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पंडित ने कहा कि पिछले जन्म में किए गए कर्म का फल भोगने के लिए ही जीव का जन्म होता है। दुख सबके जीवन में आते हैं। भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण ने भी संकट झेले थे। परेशानी में हर भक्त भगवान शिव के कुंदकेश्वर रूप का जाप करे। शिवालय पर एक लोटा जल और एक बेलपत्र चढ़ाए। जल का आचमन और बेलपत्र का सेवन करने से संकट दूर हो जाएंगे।
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विधायक गोपाल कांडा ने कहा कि शिव कथा से सनातन धर्म, संस्कृति और संस्कारों की शिक्षा मिली है। इस व्यासपीठ से बरसे रस में श्रद्धालु रंगे हुए दिखे। सिरसा गोभक्तों की भूमि है। इसीलिए देश में सबसे अधिक गोशालाएं सिरसा में हैं। व्यापारियों की सेवा भावना नमन करने योग्य है।
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पंडित प्रदीप मिश्रा महाराज ने कहा कि इस शिवरात्रि पर तीन विशेष योग बन रहे हैं। इस मौके को मत चूकना। शिवरात्रि से पहले के नौ दिनों को नवरात्र कहा जाता है। इस अवधि में आपने कथा सुनी। शिवरात्रि से पहले सोमवार को अष्टमी है। शुक्रवार को प्रदोष भी है और शिवरात्रि भी है। ये बहुत बड़ा सौभाग्य है। भक्त को इस अवधि में भक्ति करने का पूरा लाभ मिलेगा। शिवभक्त संत बाबा तारा की कुटिया में पहली बार शिवपुराण कथा हुई। इससे शिव और बाबा तारा का आशीर्वाद एकसाथ मिला।
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पंडित ने कहा कि पिछले जन्म में किए गए कर्म का फल भोगने के लिए ही जीव का जन्म होता है। दुख सबके जीवन में आते हैं। भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण ने भी संकट झेले थे। परेशानी में हर भक्त भगवान शिव के कुंदकेश्वर रूप का जाप करे। शिवालय पर एक लोटा जल और एक बेलपत्र चढ़ाए। जल का आचमन और बेलपत्र का सेवन करने से संकट दूर हो जाएंगे।