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कैसे सुधरेगी रैंकिंग : सफाईकर्मी न कूड़ा उठान की समुचित व्यवस्था
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डाकघर के समक्ष से हटाए गए डंपिंग प्वाइंट हटाने के बाद फैला कूड़ा। संवाद
- फोटो : Sirsa
सिरसा। स्वच्छ सर्वेक्षण के लिए कभी भी सर्वे हो सकता है। लेकिन रैंकिंग सुधारने के लिए नगर परिषद प्रशासन योजनाओं के अलावा कुछ नहीं कर पाया। करीब 4 लाख की आबादी वाले शहर के लिए प्रतिदिन सफाई की व्यवस्था ही नहीं है। ऐसे में रोज 30 से ज्यादा शिकायतें आती हैं। उसके बाद विशेष अभियान चलाकर सफाई करवाई जाती है। कूड़ा डंपिंग प्वाइंट खत्म करने की प्रक्रिया शुरू कर दी लेकिन वैकल्पिक व्यवस्था नगर परिषद नहीं कर पाया। खुले में कचरा अभी भी नजर आता है। सफाई करवाने के लिए शहरवासियों को सीएम विंडो का सहारा लेना पड़ रहा है। सार्वजनिक स्थानों पर रखवाए गए डस्टबिन भी कूड़े से अटे रहते हैं।
शहरी क्षेत्र में सफाई का जिम्मा नगर परिषद के पास है। अब हुडा सेक्टर भी नगर परिषद के पास आ गया है इसलिए वहां की जिम्मेदारी भी नगर परिषद ही संभाल रहा है। शहर की करीब 4 लाख की आबादी के लिए 500 से ज्यादा कर्मचारियों की जरूरत है। लेकिन इस समय नगर परिषद के पास केवल 200 के करीब ही नियमित कर्मचारी हैं। इनमें से भी 60 से ज्यादा कर्मचारी ऐसे हैं जिनकी वीआईपी ड्यूटी रहती है। यानी कई कर्मचारी अधिकारियों की कोठियों पर रहते हैं तो कई बार कोई प्रशासनिक कार्यक्रम होने के कारण वीआईपी ड्यूटी करते हैं। ऐसे में शहर में प्रतिदिन करीब 100 कर्मचारी ही सफाई कर पाते हैं। एक साथ-एक दिन पूरे शहर की सफाई संभव नहीं है। इसलिए रोटेशन अनुसार कर्मचारी सफाई करते हैं। शहर के बाजारों में हालांकि प्रतिदिन सफाई होती है लेकिन बाहरी इलाकों और कॉलोनियों में कर्मचारी रोज सफाई नहीं कर पाते। जब शिकायतें आती हैं तो हफ्ते में एक दिन जाकर सफाई करवा दी जाती है। बताया जा रहा है कि नगर परिषद के पास प्रतिदिन 30 से ज्यादा शिकायतें सफाई संबंधी दर्ज होती हैं।
कूड़ा डंपिंग प्वाइंट खत्म करना शुरू, लेकिन वैकल्पिक व्यवस्था नहीं
डीसी ने शहर का निरीक्षण करके आदेश दिए थे कि कूड़ा डंपिंग प्वाइंट खत्म करें। यहां कूड़े को डालने की बजाय सीधा बकरियांवाली प्लांट तक पहुंचाया जाए। हालांकि नगर परिषद ने शहर के आर्य समाज रोड स्थित कूड़ा डंपिंग प्वाइंट और वाल्मीकि चौक स्थित प्वाइंट को खत्म करवा दिया। लेकिन अभी भी यहां लोग खुले में कूड़ा फेंक रहे हैं। इस कारण परेशानी कम होने की बजाय बढ़ गई है। खुले पड़े कूड़े में पशु मुंह मारते हैं। ऐसे में पूरा दिन बदबू का माहौल रहता है।
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स्वच्छता पर लाखों रुपया बर्बाद, असर फिर भी नहीं
स्वच्छता के नाम पर हर साल नगर परिषद लाखों रुपये बर्बाद करती है। जहां एक ओर शहर में सार्वजनिक स्थानों पर डस्टबिन लगाए गए वहीं दूसरी ओर कूड़ा एकत्रीकरण के लिए भी व्यापक स्तर पर योजना बनाई गई। लेकिन न तो डस्टबिन प्रतिदिन खाली हो पा रहे हैं और न ही सभी वार्डों में प्रतिदिन नियमित रूप से सफाई हो पाती है। कर्मचारियों की कमी है जिस कारण शिकायत आने पर ही विशेष अभियान चलाकर सफाई करवाई जाती है। आमजन को जागरूक करने के लिए नप ने अलग से विंग की स्थापना की है लेकिन ये भी केवल बैठकों तक सीमित है। न तो फील्ड में इसका असर नजर आ रहा है और न ही स्वच्छ सर्वेक्षण के परिणाम में।
जागरूकता अभियान कागजों में : सर्वेक्षण में गिरती है रैंकिंग
नगर परिषद ने आमजन को जागरुक करने के लिए अलग से विंग का गठन किया हुआ इै। इस विंग का मुख्य काम है कि आमजन को स्वच्छता के प्रति जागरूक करना और जनता की ओर से आने वाली फीडबैक से नप अधिकारियों को अवगत कराना। हालांकि इस विंग ने सक्षम युवाओं के माध्यम से सर्वे शुरू किया है लेकिन धरातल पर कुछ असर दिखाई नहीं दे रहा। आमजन को स्वच्छता एप मोबाइल में डाउनलोड करवाने के लिए भी अभी तक जागरूक नहीं कर पाए हैं। बताया जा रहा है कि अभी तक केवल 2 हजार लोगों को ही स्वच्छता एप डाउनलोड करवा पाए हैं। विंग की ओर से आमजन को ये भी जागरूक करने का काम किया जा रहा है कि वे घरों, दुकानों में सूखा-गीला कचरा अलग-अलग ही रखें और डाले। लेकिन नप गाड़ी ही इन आदेशों की धज्जियां उड़ाती है और कूड़ा मिक्स करके उठाती है। इसी कारण हर साल सर्वेक्षण के दौरान अंक कटते हैं और रैंकिंग गिरती है।
शहर की सुंदरता पर ये स्थायी और अस्थायी डंपिंग प्वाइंट है धब्बा, यहां बिखरा रहता है कूड़ा
-मुख्य बस स्टैंड के पास।
-बरनाला रोड, हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी के पास।
-आर्य समाज रोड पर, डाकघर के पास।
-डबवाली रोड पर पुुरानी हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी।
-नागरिक अस्पताल के सामने।
-अनाज मंडी।
-बेगू रोड, राजकीय कन्या विद्यालय के पास।
-गोशाला रोड पर।
- वाल्मीकि चौक के पास।
-रेलवे स्टेशन फाटक के पास
-जनता भवन रोड।
-अनाज मंडी रोड, राजकीय विद्यालय के पास।
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शहरी क्षेत्र में सफाई का जिम्मा नगर परिषद के पास है। अब हुडा सेक्टर भी नगर परिषद के पास आ गया है इसलिए वहां की जिम्मेदारी भी नगर परिषद ही संभाल रहा है। शहर की करीब 4 लाख की आबादी के लिए 500 से ज्यादा कर्मचारियों की जरूरत है। लेकिन इस समय नगर परिषद के पास केवल 200 के करीब ही नियमित कर्मचारी हैं। इनमें से भी 60 से ज्यादा कर्मचारी ऐसे हैं जिनकी वीआईपी ड्यूटी रहती है। यानी कई कर्मचारी अधिकारियों की कोठियों पर रहते हैं तो कई बार कोई प्रशासनिक कार्यक्रम होने के कारण वीआईपी ड्यूटी करते हैं। ऐसे में शहर में प्रतिदिन करीब 100 कर्मचारी ही सफाई कर पाते हैं। एक साथ-एक दिन पूरे शहर की सफाई संभव नहीं है। इसलिए रोटेशन अनुसार कर्मचारी सफाई करते हैं। शहर के बाजारों में हालांकि प्रतिदिन सफाई होती है लेकिन बाहरी इलाकों और कॉलोनियों में कर्मचारी रोज सफाई नहीं कर पाते। जब शिकायतें आती हैं तो हफ्ते में एक दिन जाकर सफाई करवा दी जाती है। बताया जा रहा है कि नगर परिषद के पास प्रतिदिन 30 से ज्यादा शिकायतें सफाई संबंधी दर्ज होती हैं।
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कूड़ा डंपिंग प्वाइंट खत्म करना शुरू, लेकिन वैकल्पिक व्यवस्था नहीं
डीसी ने शहर का निरीक्षण करके आदेश दिए थे कि कूड़ा डंपिंग प्वाइंट खत्म करें। यहां कूड़े को डालने की बजाय सीधा बकरियांवाली प्लांट तक पहुंचाया जाए। हालांकि नगर परिषद ने शहर के आर्य समाज रोड स्थित कूड़ा डंपिंग प्वाइंट और वाल्मीकि चौक स्थित प्वाइंट को खत्म करवा दिया। लेकिन अभी भी यहां लोग खुले में कूड़ा फेंक रहे हैं। इस कारण परेशानी कम होने की बजाय बढ़ गई है। खुले पड़े कूड़े में पशु मुंह मारते हैं। ऐसे में पूरा दिन बदबू का माहौल रहता है।
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स्वच्छता पर लाखों रुपया बर्बाद, असर फिर भी नहीं
स्वच्छता के नाम पर हर साल नगर परिषद लाखों रुपये बर्बाद करती है। जहां एक ओर शहर में सार्वजनिक स्थानों पर डस्टबिन लगाए गए वहीं दूसरी ओर कूड़ा एकत्रीकरण के लिए भी व्यापक स्तर पर योजना बनाई गई। लेकिन न तो डस्टबिन प्रतिदिन खाली हो पा रहे हैं और न ही सभी वार्डों में प्रतिदिन नियमित रूप से सफाई हो पाती है। कर्मचारियों की कमी है जिस कारण शिकायत आने पर ही विशेष अभियान चलाकर सफाई करवाई जाती है। आमजन को जागरूक करने के लिए नप ने अलग से विंग की स्थापना की है लेकिन ये भी केवल बैठकों तक सीमित है। न तो फील्ड में इसका असर नजर आ रहा है और न ही स्वच्छ सर्वेक्षण के परिणाम में।
जागरूकता अभियान कागजों में : सर्वेक्षण में गिरती है रैंकिंग
नगर परिषद ने आमजन को जागरुक करने के लिए अलग से विंग का गठन किया हुआ इै। इस विंग का मुख्य काम है कि आमजन को स्वच्छता के प्रति जागरूक करना और जनता की ओर से आने वाली फीडबैक से नप अधिकारियों को अवगत कराना। हालांकि इस विंग ने सक्षम युवाओं के माध्यम से सर्वे शुरू किया है लेकिन धरातल पर कुछ असर दिखाई नहीं दे रहा। आमजन को स्वच्छता एप मोबाइल में डाउनलोड करवाने के लिए भी अभी तक जागरूक नहीं कर पाए हैं। बताया जा रहा है कि अभी तक केवल 2 हजार लोगों को ही स्वच्छता एप डाउनलोड करवा पाए हैं। विंग की ओर से आमजन को ये भी जागरूक करने का काम किया जा रहा है कि वे घरों, दुकानों में सूखा-गीला कचरा अलग-अलग ही रखें और डाले। लेकिन नप गाड़ी ही इन आदेशों की धज्जियां उड़ाती है और कूड़ा मिक्स करके उठाती है। इसी कारण हर साल सर्वेक्षण के दौरान अंक कटते हैं और रैंकिंग गिरती है।
शहर की सुंदरता पर ये स्थायी और अस्थायी डंपिंग प्वाइंट है धब्बा, यहां बिखरा रहता है कूड़ा
-मुख्य बस स्टैंड के पास।
-बरनाला रोड, हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी के पास।
-आर्य समाज रोड पर, डाकघर के पास।
-डबवाली रोड पर पुुरानी हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी।
-नागरिक अस्पताल के सामने।
-अनाज मंडी।
-बेगू रोड, राजकीय कन्या विद्यालय के पास।
-गोशाला रोड पर।
- वाल्मीकि चौक के पास।
-रेलवे स्टेशन फाटक के पास
-जनता भवन रोड।
-अनाज मंडी रोड, राजकीय विद्यालय के पास।