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हमनै तो 2-3 महीनां की परेसाणी सै, फैर तै सुख हौ ज्यागा

Sat, 26 Nov 2016 11:47 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला सिरसा
ब्यूरो/अमर उजाला सिरसा Updated Sat, 26 Nov 2016 11:47 PM IST
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Hmna of 2-3 Mahinan Presani military, happiness Haw Far judgment Jyaga Sirsa
बैंक - फोटो : अमर उजाला
चोपटा। सरकार की ओर से 1000 और 500 के नोटबंदी के एक पखवाड़ा बीत जाने के बाद भी ग्रामीण क्षेत्रों में पैसों की तो कमी चल रही है परंतु ग्रामीण गांव में भाईचारा हर हाल में कायम रखना चाहते हैं। ग्रामीण एक दूसरे का आपस में सहयोग करने की कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं।  ग्रामीण इस मुश्किल घड़ी को दूसरी आजादी की लड़ाई मान रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि देश को आजाद कराने के लिए पूर्वजों ने सैकड़ों वर्षों तक संघर्ष किया था हमनै तो 2-3 महिना ही परेसाणी झेलनी सै, फैर तै सुख हौ ज्यागा।
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राजस्थान की सीमा से सटे पैंतालिसा क्षेत्र में इस समय रबी की फसल की बिजाई का समय चल रहा है, खाद, बीज व आवश्यक वस्तुओं को लेकर किसान एक दूसरे की बिजाई प्रभावित नहीं होने दे रहे हैं। एक किसान के खेत में सिंचाई होने पर किसान खाद बीज की कमी होने पर उस किसान जमीन सूखने नहीं देते  पहले ही कह देते हैं जमीन सूखणें ना देई, खाद व कणक का बीज, दवाई मैरे कन्नै पड़ी है मैंनै तो चार पांच दिन चाहिए कोनी इतै कोई और जुगाड़ कैरांगै। या पिस्सा गीं तंगी सदा कोनी रह माणस को बैरा ना कद काम पड़ज्या। ग्रामीण खेती बाड़ी के साथ साथ कभी दो हजार के नए नोट को लेकर चर्चा व कभी पुराने नोटों को बैंक में जमा कराने व नए निकलवाने को लेकर आई परेशानी को लेकर गांवों में चबूतरों व चौक पर चर्चा करते नजर आते हैं। सर्दी के बावजूद ग्रामीण सुबह बैंक खुलने से पहले ही बैंक की शाखाओं के आगे लाइन में खड़े हो जाते हैं। लाइन लंबी होने के चलते दो से तीन घंटे इंतजार करना पड़ रहा है। एटीएम में भी पैसे अक्सर खत्म रहते हैं। परंतु ग्रामीण प्रधानमंत्री के इस कदम की सराहना भी कर रहे हैं।
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    गांव कुम्हारिया में चर्चा करते हुए ग्रामीण जगदीश का कहना है इस यो टैम बिजाई गा चाल रहा है जद थोड़ी मुश्किल है फेर भी कोई बात कोनी आपस म्हैं काम चलां लेवांगा। पर देश म्हां काला धन व भ्रष्टाचार खत्म होज्या तो ठीक है। ग्रामीण कृष्ण कुमार का कहना है कि मोदी सरकार नै यो कदम तो ठीक उठाया है इसको सफल बनाने क लिए हम जी जान से सरकार के साथ हैं। या आजादी की दूसरी लड़ाई है, राकेश कुमार व सत्यवान का कहना है कि क्षेत्र में बैकों की शाखाएं कम होने के कारण ज्यादा परेशानी हो रही है, सरकार को गांव गांव में पैसे निकलवाने व जमा करवाने की सुविधा कर देनी चाहिए। इनका कहना है कि बैंक की शाखा गांव से काफी दूरी पर है बुजुगों से चलकर आया नहीं जाता तो उन्हे साथ आना पड़ता है, खेतों मे गेहूं की  बिजाई का समय चल रहा है फि र भी यहां पर सारा दिन बेठै रहना पड़ता है।
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    राजेंद्र कुमार का कहना है कि  हम सरकार के इस फैसले की सराहना करते हैं व देश के लिए कुछ भी कर गुजरने को तैयार हैं इनका कहना है कि देश से भ्रष्टाचार व काला धन निकल जाना चाहिए चाहे एक महिना और लाइन म्हैं लागणा पड़े।  देश की भलाई खातर जो कदम सरकार नै उठाया है वो ब्होत बढिया है। ईब  मुश्किल तो बड़े लोग्यां कै है म्हारे तो कोई मुश्किल कौन्या।  गांम आल्यां खातर सरकार नै खाद बीज व जरूरी घरेलू सामान मिलण गी व्यवस्था होज्या तो परेशानी नही रहैगी। महावीर का कहना है कि गांमा के म्हां ईब भी पूरी तरह से भाई चारा कायम है घरां म्है जरूरी चीज आपस म्हैं आदला बदली कर ल्या हां मोल लानै की कोई जरूरी कोनी होवै। इसका कहना है कि किं पाणे गी खातर कुछ तो खोणा पड़ता है।
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