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सवा तीन महीने बाद भी काला पीलिया टेस्ट के फ्री कूपन का अनुबंध नहीं चढ़ा सिरे
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सिविल अस्पताल सिरसा।
- फोटो : Sirsa
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सिविल अस्पताल प्रशासन करीब सवा तीन महीने बीतने के बाद भी काला पीलिया के मरीजों के निजी लैब में फ्री टेस्ट करवाने संबंधी कूपन के अनुबंध को सिरे नहीं चढ़ा सका है। अनुबंध नहीं होने के कारण काला पीलिया के मरीजों के पास निजी लैब में पैसे देकर ही टेस्ट करवाने का विकल्प बचा है। कई मरीजों ने तो अनुबंध होने के इंतजार में अभी तक टेस्ट नहीं करवाया है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही मरीजों के लिए भारी पड़ रही है। जिले में काला पीलिया के 2 हजार 438 मरीज हैं।
गौरतलब है कि काला पीलिया का सिविल अस्पताल में मुफ्त इलाज किया जाता है। मरीजों की पहले अस्पताल में बनी लैब में जांच होती है। अगर कोई मरीज काला पीलिया पॉजिटिव मिलता है, तो उसका वायर लॉड (आरसीवी-आरएम) टेस्ट किया जाता है। इस टेस्ट के जरिए यह पता लगाया जाता है कि उसमें काला पीलिया की मात्रा कितनी है। सिविल अस्पताल में वायर लॉड टेस्ट को लेकर कूपन दिया जाता है। कूपन लेकर मरीज बाहर निजी लैब में वायर लॉड टेस्ट फ्री में करवा सकते हैं।
8 अक्तूबर 2019 को खत्म हुआ था अनुबंध
जानकारी के अनुसार 8 अक्तूबर 2019 को टेस्ट के लिए मिलने वाले कूपन का रेट अनुबंध खत्म हो गया था। मगर उसके बाद से स्वास्थ्य विभाग द्वारा अनुबंधन फाइनल नहीं किया गया है। इस कारण मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मरीजों को यह जांच निजी तौर पर करवानी पड़ रही हैं। मरीजों की मानें तो यह टेस्ट निजी लैबों में काफी महंगे होते हैं। इस कारण उन्हें अभी भी अनुबंध दोबारा होने का इंतजार है। मरीजों के अनुसार निजी लैब में वायर लॉड टेस्ट की कीमत करीब सात से आठ हजार रुपये है।
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नशे का इंजेक्शन ज्यादा फैलता है काला पीलिया
डॉ. मनीष ने बताया कि काला पीलिया के अधिकतर मरीज रानियां क्षेत्र से हैं। यह रोग नशा करने वालों को जल्दी चपेट में लेता है क्योंकि नशा करने वाले लोग एक दूसरे की इस्तेमाल की गई सिरिंज से इंजेक्शन लगाते हैं। नशा मुक्ति केंद्र के डॉ. पंकज शर्मा का कहना है कि ऐसा करने वालों के बचने का मौका भी बेहद कम होता है।
काला पीलिया के फ्री टेस्ट के रेट अनुबंध को लेकर हमारे पास कोई सूचना नहीं है। यही कारण है कि मरीजों को फ्री टेस्ट के कूपन नहीं मिल रहे हैं। जैसे ही अनुबंध होगा, मरीजों को कूपन दे दिए जाएंगे।
- डॉ. अनिशा कांसल, नोडल अधिकारी, आईडीएसपी
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गौरतलब है कि काला पीलिया का सिविल अस्पताल में मुफ्त इलाज किया जाता है। मरीजों की पहले अस्पताल में बनी लैब में जांच होती है। अगर कोई मरीज काला पीलिया पॉजिटिव मिलता है, तो उसका वायर लॉड (आरसीवी-आरएम) टेस्ट किया जाता है। इस टेस्ट के जरिए यह पता लगाया जाता है कि उसमें काला पीलिया की मात्रा कितनी है। सिविल अस्पताल में वायर लॉड टेस्ट को लेकर कूपन दिया जाता है। कूपन लेकर मरीज बाहर निजी लैब में वायर लॉड टेस्ट फ्री में करवा सकते हैं।
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8 अक्तूबर 2019 को खत्म हुआ था अनुबंध
जानकारी के अनुसार 8 अक्तूबर 2019 को टेस्ट के लिए मिलने वाले कूपन का रेट अनुबंध खत्म हो गया था। मगर उसके बाद से स्वास्थ्य विभाग द्वारा अनुबंधन फाइनल नहीं किया गया है। इस कारण मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मरीजों को यह जांच निजी तौर पर करवानी पड़ रही हैं। मरीजों की मानें तो यह टेस्ट निजी लैबों में काफी महंगे होते हैं। इस कारण उन्हें अभी भी अनुबंध दोबारा होने का इंतजार है। मरीजों के अनुसार निजी लैब में वायर लॉड टेस्ट की कीमत करीब सात से आठ हजार रुपये है।
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नशे का इंजेक्शन ज्यादा फैलता है काला पीलिया
डॉ. मनीष ने बताया कि काला पीलिया के अधिकतर मरीज रानियां क्षेत्र से हैं। यह रोग नशा करने वालों को जल्दी चपेट में लेता है क्योंकि नशा करने वाले लोग एक दूसरे की इस्तेमाल की गई सिरिंज से इंजेक्शन लगाते हैं। नशा मुक्ति केंद्र के डॉ. पंकज शर्मा का कहना है कि ऐसा करने वालों के बचने का मौका भी बेहद कम होता है।
काला पीलिया के फ्री टेस्ट के रेट अनुबंध को लेकर हमारे पास कोई सूचना नहीं है। यही कारण है कि मरीजों को फ्री टेस्ट के कूपन नहीं मिल रहे हैं। जैसे ही अनुबंध होगा, मरीजों को कूपन दे दिए जाएंगे।
- डॉ. अनिशा कांसल, नोडल अधिकारी, आईडीएसपी