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बारिश होने से फसलों को फायदा, गर्मी से राहत, किसानों के चेहरे खिले
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ब जिले में बुधवार रात्रि व वीरवार अल सुबह करीब पांच एमएम बारिश हुई और कहीं पर बूंदाबांदी हुई। साथ ही तेज अंधड़ चलने से बिजली भी प्रभावित रही। सिरसा में पांच एमएम, कालांवाली में दो, खुईयां मलकाना, रानियां में बूंदाबांदी हुई। रुक रुककर हो रही बारिश से देसी कपास व बीटी नरमे की फसल को संजीवनी मिली है। वहीं लोगों को गर्मी से भी निजात मिली है। बारिश होने से किसानों के चेहरे खिल उठे हैं।
किसान महेंद्र सिंह, शिव शंकर, राकेश कुमार, जगदीश, राम कुमार ने बताया कि इस समय हो रही हल्की बारिश से सावनी की फसल को काफी फायदा होगा। बारिश होने से फसल पर सूखे का खतरा टल गया है। किसानों का कहना है कि पिछले कई दिनों से धूल भरी आंधी चल रही थी जिसकी वजह से फसलो को काफी नुकसान हो रहा था। अब जो बारिश हुई है इससे धूल मिटी के साथ-साथ गर्मी से भी निजात मिली है। अब किसानों को फसल का उत्पादन भी बंपर होने की उम्मीद बढ़ गई है।
राजस्थान की सीमा से सटे पैंतालिसा क्षेत्र के कागदाना, कुम्हारिया, खेड़ी, चाहरवाला, जोगीवाला, रामपूरा नवाबाद, जसानियां, राजपुरा साहनी, गुसाई आना, बकरियांवाली, गुड़िया खेड़ा, माधोसिंघाना, ढूकड़ा, सहित कई सहित कई गांवों में हल्की बारिश हुई। गौरतलब हैै कि ये गांव नहरों के अंतिम छोर पर पड़ने के कारण इन गांवों की अधिकतर जमीन बिरानी है तथा सावनी की फसल मानसून की बारिश पर आधारित होती है। किसानों ने बीटी नरमे व देशी कपास की बिजाई तो कर दी लेकिन नहरी पानी के अभाव के कारण उसमें सिंचाई नहीं हो पा रही थी। किसानों का कहना है कि बारिश फसलों के लिए तो फायदेमंद है।
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किसान महेंद्र सिंह, शिव शंकर, राकेश कुमार, जगदीश, राम कुमार ने बताया कि इस समय हो रही हल्की बारिश से सावनी की फसल को काफी फायदा होगा। बारिश होने से फसल पर सूखे का खतरा टल गया है। किसानों का कहना है कि पिछले कई दिनों से धूल भरी आंधी चल रही थी जिसकी वजह से फसलो को काफी नुकसान हो रहा था। अब जो बारिश हुई है इससे धूल मिटी के साथ-साथ गर्मी से भी निजात मिली है। अब किसानों को फसल का उत्पादन भी बंपर होने की उम्मीद बढ़ गई है।
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राजस्थान की सीमा से सटे पैंतालिसा क्षेत्र के कागदाना, कुम्हारिया, खेड़ी, चाहरवाला, जोगीवाला, रामपूरा नवाबाद, जसानियां, राजपुरा साहनी, गुसाई आना, बकरियांवाली, गुड़िया खेड़ा, माधोसिंघाना, ढूकड़ा, सहित कई सहित कई गांवों में हल्की बारिश हुई। गौरतलब हैै कि ये गांव नहरों के अंतिम छोर पर पड़ने के कारण इन गांवों की अधिकतर जमीन बिरानी है तथा सावनी की फसल मानसून की बारिश पर आधारित होती है। किसानों ने बीटी नरमे व देशी कपास की बिजाई तो कर दी लेकिन नहरी पानी के अभाव के कारण उसमें सिंचाई नहीं हो पा रही थी। किसानों का कहना है कि बारिश फसलों के लिए तो फायदेमंद है।
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