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Sirsa News: भूमिगत पानी पर निर्भर आधा शहर, सालों से नहरी पानी की आस
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सिरसा मुख्य जलघर की फोटो।
सिरसा। सालों से नहरी पानी की पूर्ण सप्लाई को लेकर शहर के लोग इंतजार कर रहे हैं। आधे से ज्यादा शहर में मौजूदा समय में 103 ट्यूबवेल मिक्स पानी की सप्लाई होती हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार किसी भी ट्यूबवेल का पानी नुकसानदायक स्तर पर फिलहाल नहीं हैं। वहीं, शहरवासियों की माने तो टीडीएस 1500 तक कुछ एरिया में मिलता है।
हालांकि जन स्वास्थ्य विभाग की गाइड लाइन के अनुसार 2000 टीडीएस के नीचे तक के पानी का प्रयोग पीने के लिए किया जा सकता है। इतना ही नहीं, पूर्व में कुछ एरिया के ट्यूबवेल में यह मात्रा 2000 व उससे उपर चली गई थी, जिन्हें तुरंत प्रभाव से बंद कर दिया गया। भूमिगत दोहन के कारण बढ़ने वाली परेशानियों के समाधान की दिशा में विभाग काम करता है और दावा करता है कि आने वाले दो साल में पूरी तरह से भूमिगत जल के प्रयोग को बंद कर दिया जाएगा। इसको लेकर 68 करोड़ रुपये का विशेष प्रोजेक्ट तैयार किया गया है।
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इनके बारे में जानना जरूरी
फ्लोराइड - इस तत्व का पानी में 1.5 पीपीएम से अधिक होना नुकसानदायक होता है। इससे दांत खराब होने, हड्डियों कमजोर होना जैसी परेशानियां पैदा होती है। एक साल से आठ साल के बच्चों के दांतों की शुरुआती बनावट को भी यह प्रभावित करता है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार इसका स्तर 1 पीपीएम से कम है।
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टीडीएस - पानी में टीडीएस की मात्रा ज्यादा होने से किड़नी, पत्थरी सहित कई अन्य बीमारियों होती है। सही मायने में इसकी मात्रा 300 से 500 के बीच होनी चाहिए। वेबसाइट पर जारी वर्ष 2024 व 2025 की रिपोर्ट में इसकी मात्रा 600 से नीचे ही दर्शाई गई है। विभाग की गाइडलाइन के अनुसार इसका प्रयोग 2000 से नीचे तक किया जा सकता है। सिरसा के कई एरिया में टीडीएस की मात्रा 600 से ज्यादा है।
आर्सेनिक - यह तत्व बेहद घातक होता है। यह त्वचा संबंधी रोगों को पैदा करने के साथ साथ कैंसर को बुलावा देता है। 0.01मिलीग्राम तक पानी में होना चाहिए। हालांकि शहर की रिपोर्ट के अनुसार यह 0.007 मिलीग्राम तक मिलता है।
वेबसाइट पर आधारित - सरकारी आंकड़ों पर आधारित रिपोर्ट
रानियां-- टीडीएस - 800 से 970 के बीच ।
ऐलनाबाद-- वार्ड 2 में टीडीएस - 1330 ।
डबवाली - 150 टीडीएस।
कालांवाली - 200 टीडीएस।
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इस प्रकार होगा काम
अधिकारियों के अनुसार शहर में बूस्टरों की संख्यां को बढ़ाया जा रहा है। 13 नये बूस्टर बनाए जाएंगे। इससे पानी की सप्लाई को ओर बेहतर बनाया जाएगा। 68 करोड़ की लागत से यह काम फरवरी माह में शुरू हो जाएगा। बड़े स्तर पर यह प्रोजेक्ट चलेगा ओर पुरानी डैमेज लाइनों को भी बदला जाएगा।
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हमारे पास टीडीएस या दूषित पानी की सप्लाई को लेकर कोई शिकायत नहीं आई है। नियमित रूप से लैब में पानी की जांच होती है और जहां पर टीडीएस ज्यादा मिलता है। वहां पर ट्यूबवेल को बंद कर दिया जाता है। अमरूत के तहत प्रोजेक्ट तैयार किया जा चुका है और आगामी दो साल में भूमिगत जल का प्रयोग पूरी तरह से बंद हो जाएगा।
-तरुण गर्ग, एक्सईएन, जन स्वास्थ्य विभाग
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हालांकि जन स्वास्थ्य विभाग की गाइड लाइन के अनुसार 2000 टीडीएस के नीचे तक के पानी का प्रयोग पीने के लिए किया जा सकता है। इतना ही नहीं, पूर्व में कुछ एरिया के ट्यूबवेल में यह मात्रा 2000 व उससे उपर चली गई थी, जिन्हें तुरंत प्रभाव से बंद कर दिया गया। भूमिगत दोहन के कारण बढ़ने वाली परेशानियों के समाधान की दिशा में विभाग काम करता है और दावा करता है कि आने वाले दो साल में पूरी तरह से भूमिगत जल के प्रयोग को बंद कर दिया जाएगा। इसको लेकर 68 करोड़ रुपये का विशेष प्रोजेक्ट तैयार किया गया है।
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इनके बारे में जानना जरूरी
फ्लोराइड - इस तत्व का पानी में 1.5 पीपीएम से अधिक होना नुकसानदायक होता है। इससे दांत खराब होने, हड्डियों कमजोर होना जैसी परेशानियां पैदा होती है। एक साल से आठ साल के बच्चों के दांतों की शुरुआती बनावट को भी यह प्रभावित करता है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार इसका स्तर 1 पीपीएम से कम है।
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टीडीएस - पानी में टीडीएस की मात्रा ज्यादा होने से किड़नी, पत्थरी सहित कई अन्य बीमारियों होती है। सही मायने में इसकी मात्रा 300 से 500 के बीच होनी चाहिए। वेबसाइट पर जारी वर्ष 2024 व 2025 की रिपोर्ट में इसकी मात्रा 600 से नीचे ही दर्शाई गई है। विभाग की गाइडलाइन के अनुसार इसका प्रयोग 2000 से नीचे तक किया जा सकता है। सिरसा के कई एरिया में टीडीएस की मात्रा 600 से ज्यादा है।
आर्सेनिक - यह तत्व बेहद घातक होता है। यह त्वचा संबंधी रोगों को पैदा करने के साथ साथ कैंसर को बुलावा देता है। 0.01मिलीग्राम तक पानी में होना चाहिए। हालांकि शहर की रिपोर्ट के अनुसार यह 0.007 मिलीग्राम तक मिलता है।
वेबसाइट पर आधारित - सरकारी आंकड़ों पर आधारित रिपोर्ट
रानियां
ऐलनाबाद
डबवाली - 150 टीडीएस।
कालांवाली - 200 टीडीएस।
इस प्रकार होगा काम
अधिकारियों के अनुसार शहर में बूस्टरों की संख्यां को बढ़ाया जा रहा है। 13 नये बूस्टर बनाए जाएंगे। इससे पानी की सप्लाई को ओर बेहतर बनाया जाएगा। 68 करोड़ की लागत से यह काम फरवरी माह में शुरू हो जाएगा। बड़े स्तर पर यह प्रोजेक्ट चलेगा ओर पुरानी डैमेज लाइनों को भी बदला जाएगा।
हमारे पास टीडीएस या दूषित पानी की सप्लाई को लेकर कोई शिकायत नहीं आई है। नियमित रूप से लैब में पानी की जांच होती है और जहां पर टीडीएस ज्यादा मिलता है। वहां पर ट्यूबवेल को बंद कर दिया जाता है। अमरूत के तहत प्रोजेक्ट तैयार किया जा चुका है और आगामी दो साल में भूमिगत जल का प्रयोग पूरी तरह से बंद हो जाएगा।
-तरुण गर्ग, एक्सईएन, जन स्वास्थ्य विभाग