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Sirsa News: गोशालाओं पर 11 महीनों में मात्र 71 करोड़ खर्च
Sun, 01 Mar 2026 11:57 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Sun, 01 Mar 2026 11:57 PM IST
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सूखी तूड़ी खाते गोवंश।
प्रदेश सरकार ने 696 गोशालाओं के लिए बनाया था 595 करोड़ का अनुदान
फोटो - रानियां01,02,03
रानियां। हरियाणा सरकार की ओर से प्रदेश की सभी 696 गोशालाओं में पल रहे करीब 4 लाख गोवंशों के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 595 करोड़ों की अनुदान राशि का बजट तैयार किया गया। बीते लगभग 11 महीने में सरकार की ओर से अब तक गोशालाओं में 70 से 71 करोड़ रुपये ही खर्च किए गए हैं। इससे गोशालाओं में गोवंश को हरे-चारे, खल, दाना चूरी, सूखी तूड़ी, दवाइयां, बिजली-पानी, वाहन व उपकरणों के खर्च और शेड सहित अन्य सुरक्षा और रखरखाव संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
मौजूदा समय में गोशाला समितियों को उधार या गांवों से चंदा एकत्रित कर गोशालाओं का संचालन करना पड़ रहा है। सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रदेश की सभी 696 गोशालाओं के बछड़ी-बछड़े, गाय व नंदी के लिए 595 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया था। 10 महीने से ज्यादा का समय बीत जाने के बाद भी प्रदेश सरकार की ओर से मात्र 70 से 71 करोड़ रुपये की अनुदान राशि गोवंश पर खर्च की गई है। गोशालाओं में संरक्षित गोवंश के लिए अप्रैल, मई और जून महीने के चारे की अनुदान राशि के चेक बने पड़े हैं। ये अब तक गोशालाओं को नहीं भेजे गए। तय समय अवधि या नियमानुसार 31 मार्च को मौजूदा वित्तीय वर्ष का सरकार द्वारा बनाया गया बजट शून्य हो जाएगा।
सरकार की ओर से बनाई गई भूमि पट्टे की पॉलिसी प्रदेश की किसी भी गोशाला को नहीं दी गई। प्रति गोशाला 5-5 लाख रुपये शेड निर्माण के लिए दिए जाने थे, जो प्रदेश की 696 गोशालाओं में से मात्र 21 को ही दिए गए हैं। बाकी गोशालाएं अनुदान राशि का इंतजार कर रही हैं।
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सभी गोशालाओं में ई-रिक्शा देने की घोषणा की गई थी, जो अब लंबित है। प्रदेश की गोशाला समितियों के प्रधान व विभिन्न गोशाला महासंघ के पदाधिकारियों ने मांग की है कि सरकार वित्तीय वर्ष 2025-26 का निर्धारित बजट जल्द सभी गोशालाओं को भेजे, ताकि गोशाला पर बढ़ रहे कर्ज से निजात पाई जा सके और गोवंश के लिए हरे-चारे की व्यवस्था की जा सके।
इस प्रकार बनाया गया है बजट
पूरे प्रदेश में करीब 696 रजिस्टर्ड गोशालाएं संचालित हैं। इनमें करीब 4 लाख गोवंश की परवरिश की जा रही है। वर्ष 2025-26 के लिए सभी गोशालाओं के बछड़ी-बछड़े के लिए 10 रुपये, गाय के लिए 20 रुपये और नंदी के लिए 25 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से खाने-पीने रखरखाव और संचालन के लिए करीब 595 करोड़ रुपये का बजट तैयार किया गया था।
उधार के पैसों से चल रहीं गोशालाएं
बजट जारी न होने के कारण प्रदेश की सभी गोशाला समितियों को अब हरे-चारे, खल, दाना चूरी, सूखी तूड़ी, दवाइयां, बिजली-पानी, वाहन व उपकरणों के खर्च और शेड सहित अन्य सुरक्षा और रख-रखाव संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। 10 महीने से गोशाला समितियां उधार के पैसों या गांव से चंदा एकत्रित कर गोवंश की परवरिश कर रही हैं। अगर अगले एक महीने तक पूरा पैसा जारी नहीं किया गया तो सभी गोशालाएं कर्जदार हो जाएंगी।
शेड और ई-रिक्शा का है इंतजार
2 महीने बाद गर्मी का मौसम शुरू हो जाएगा। इससे गोवंश को छांव के लिए शेड की जरूरत होगी। सरकार की ओर से प्रति गोशाला 5-5 लाख रुपये के बड़े शेड बनाने तथा ई-रिक्शा देने की घोषणा की गई है। वह घोषणा अब तक पूरी नहीं हुई।
वर्जन
प्रदेश सरकार की ओर से वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए प्रदेश की 696 गोशालाओं के लिए करीब 595 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया था। इनमें से अब तक मात्र 70 से 71 करोड़ रुपये ही सरकार की ओर से खर्च किए गए हैं। 1 महीने बाद यह वर्ष समाप्त हो जाएगा। इसके साथ ही पूरा बजट शून्य हो जाएगा। इससे गोशाला समितियों को बड़ी समस्या का सामना करना पड़ेगा।
- रमेश बेनीवाल, ब्लॉक प्रधान गोशाला महासंघ सिरसा, हरियाणा।
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फोटो - रानियां01,02,03
रानियां। हरियाणा सरकार की ओर से प्रदेश की सभी 696 गोशालाओं में पल रहे करीब 4 लाख गोवंशों के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 595 करोड़ों की अनुदान राशि का बजट तैयार किया गया। बीते लगभग 11 महीने में सरकार की ओर से अब तक गोशालाओं में 70 से 71 करोड़ रुपये ही खर्च किए गए हैं। इससे गोशालाओं में गोवंश को हरे-चारे, खल, दाना चूरी, सूखी तूड़ी, दवाइयां, बिजली-पानी, वाहन व उपकरणों के खर्च और शेड सहित अन्य सुरक्षा और रखरखाव संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
मौजूदा समय में गोशाला समितियों को उधार या गांवों से चंदा एकत्रित कर गोशालाओं का संचालन करना पड़ रहा है। सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रदेश की सभी 696 गोशालाओं के बछड़ी-बछड़े, गाय व नंदी के लिए 595 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया था। 10 महीने से ज्यादा का समय बीत जाने के बाद भी प्रदेश सरकार की ओर से मात्र 70 से 71 करोड़ रुपये की अनुदान राशि गोवंश पर खर्च की गई है। गोशालाओं में संरक्षित गोवंश के लिए अप्रैल, मई और जून महीने के चारे की अनुदान राशि के चेक बने पड़े हैं। ये अब तक गोशालाओं को नहीं भेजे गए। तय समय अवधि या नियमानुसार 31 मार्च को मौजूदा वित्तीय वर्ष का सरकार द्वारा बनाया गया बजट शून्य हो जाएगा।
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सरकार की ओर से बनाई गई भूमि पट्टे की पॉलिसी प्रदेश की किसी भी गोशाला को नहीं दी गई। प्रति गोशाला 5-5 लाख रुपये शेड निर्माण के लिए दिए जाने थे, जो प्रदेश की 696 गोशालाओं में से मात्र 21 को ही दिए गए हैं। बाकी गोशालाएं अनुदान राशि का इंतजार कर रही हैं।
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सभी गोशालाओं में ई-रिक्शा देने की घोषणा की गई थी, जो अब लंबित है। प्रदेश की गोशाला समितियों के प्रधान व विभिन्न गोशाला महासंघ के पदाधिकारियों ने मांग की है कि सरकार वित्तीय वर्ष 2025-26 का निर्धारित बजट जल्द सभी गोशालाओं को भेजे, ताकि गोशाला पर बढ़ रहे कर्ज से निजात पाई जा सके और गोवंश के लिए हरे-चारे की व्यवस्था की जा सके।
इस प्रकार बनाया गया है बजट
पूरे प्रदेश में करीब 696 रजिस्टर्ड गोशालाएं संचालित हैं। इनमें करीब 4 लाख गोवंश की परवरिश की जा रही है। वर्ष 2025-26 के लिए सभी गोशालाओं के बछड़ी-बछड़े के लिए 10 रुपये, गाय के लिए 20 रुपये और नंदी के लिए 25 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से खाने-पीने रखरखाव और संचालन के लिए करीब 595 करोड़ रुपये का बजट तैयार किया गया था।
उधार के पैसों से चल रहीं गोशालाएं
बजट जारी न होने के कारण प्रदेश की सभी गोशाला समितियों को अब हरे-चारे, खल, दाना चूरी, सूखी तूड़ी, दवाइयां, बिजली-पानी, वाहन व उपकरणों के खर्च और शेड सहित अन्य सुरक्षा और रख-रखाव संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। 10 महीने से गोशाला समितियां उधार के पैसों या गांव से चंदा एकत्रित कर गोवंश की परवरिश कर रही हैं। अगर अगले एक महीने तक पूरा पैसा जारी नहीं किया गया तो सभी गोशालाएं कर्जदार हो जाएंगी।
शेड और ई-रिक्शा का है इंतजार
2 महीने बाद गर्मी का मौसम शुरू हो जाएगा। इससे गोवंश को छांव के लिए शेड की जरूरत होगी। सरकार की ओर से प्रति गोशाला 5-5 लाख रुपये के बड़े शेड बनाने तथा ई-रिक्शा देने की घोषणा की गई है। वह घोषणा अब तक पूरी नहीं हुई।
वर्जन
प्रदेश सरकार की ओर से वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए प्रदेश की 696 गोशालाओं के लिए करीब 595 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया था। इनमें से अब तक मात्र 70 से 71 करोड़ रुपये ही सरकार की ओर से खर्च किए गए हैं। 1 महीने बाद यह वर्ष समाप्त हो जाएगा। इसके साथ ही पूरा बजट शून्य हो जाएगा। इससे गोशाला समितियों को बड़ी समस्या का सामना करना पड़ेगा।
- रमेश बेनीवाल, ब्लॉक प्रधान गोशाला महासंघ सिरसा, हरियाणा।