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10 एकड़ में बरानी जमीन में किन्नू का बाग लगा खोजा अतिरिक्त कमाई का जरिया

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 23 Jan 2022 11:42 PM IST
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Kinnu's orchard was planted in 10 acres of rainforest land, a means of additional earning
बरासरी का किसान सुभाष चंद्र बैनीवाल। - फोटो : Sirsa
चोपटा (सिरसा)। नहरी पानी की कमी, सेम के कारण जमीन का खारा पानी, बारिश समय पर ना होना, फसलों में विभिन्न प्रकार की बीमारियों व अन्य प्राकृतिक आपदाओं के आने से किसानों को परंपरागत खेती से घाटा होने लगा है। इस घाटे को पूरा करने के लिए किसान खेती के साथ-साथ नई तरकीब सोच कर आमदनी बढ़ाने की कोशिश करता है। पढ़ाई करने के बाद युवा किसान नौकरी के लिए दर-दर भटकने की बजाए परंपरागत खेती के साथ-साथ आधुनिक तकनीक की खेती से भी कमाई कर रहे हैं। इसी कड़ी में गांव बरासरी के 12वीं पास किसान सुभाष चंद्र बैनीवाल ने 10 साल पहले 10 एकड़ बिरानी जमीन में किन्नू का बाग लगा कर परंपरागत खेती के साथ अतिरिक्त आमदनी का जरिया शुरू किया। जिससे करीब 10 लाख रुपये प्रतिवर्ष अतिरिक्त कमाई होने लगी।
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गांव बरासरी के 12वीं तक पढ़े किसान युवा किसान सुभाष चंद्र बैनीवाल ने घर की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाए रखने के लिए खेती के साथ-साथ कोई अन्य कमाई का जरिया खोजना शुरू किया। सुभाष ने बताया कि पढ़ाई के बाद नौकरी के लिए दर-दर भटकने की बजाए परंपरागत खेती के साथ अतिरिक्त आमदनी खोजने का जरिया शुरू करने के लिए उन्होंने कई प्रकार की जानकारियां हासिल की। गांव में बागवानी विभाग द्वारा लगाए गए शिविर से जानकारी लेकर उसने पंजाब से नर्सरी से किन्नू के पौधे लाकर 10 साल पहले 10 एकड़ में किन्नू का बाग लगाया। सरकार से मिली सहायता से खेत में पानी की डिग्गी भी बना ली है। उस डिग्गी में पानी एकत्रित करके रखते है। जब भी सिंचाई की जरूरत होती है तभी किन्नू के पौधों में फसलों में सिंचाई कर लेते है। वहीं सिंचाई ड्रिप सिस्टम द्वारा की जाती है। जिसमें पानी में खाद दवाई सीधे पौधों को मिल जाती है। उन्होंने बताया कि उनके बाग को देखकर गांव व आसपास के कई किसानों ने भी किन्नू अमरूद इत्यादि के बाद लगाकर कमाई शुरू कर दी है। उसने बताया कि इस बाग में खर्चा कम होता है और मेहनत भी कम करनी पड़ती है ज्यादा देखभाल की जरूरत होती है और पैदावार अच्छी हो जाती है। सुभाष चंद्र का कहना है कि किसान परंपरागत खेती के साथ जमीन की उपजाऊ शक्ति के अनुसार किन्नू, अमरूद, थाई एप्पल बेर, अंगूर इत्यादि का बाग लगा कर कमाई करके पूरी तरह से आत्मनिर्भर बन सकते हैं। संवाद
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मंडी दूर होने के कारण यातायात खर्च ज्यादा हो जाता है। किसान सुभाष चंद्र बैनीवाल ने बताया कि उनके गांव के आसपास फलों की मंडी या फ्रूट प्रोसेसिंग प्लांट न होने के कारण उन्हें काफी परेशानी उठानी पड़ती है। फलों को बेचने के लिए दूर-दूर लेकर जाना पड़ता है। जिससे यातायात खर्चा ज्यादा हो जाता है। इनकी मांग है कि नाथूसरी चोपटा में फलों की मंडी या फ्रूट प्रोसेसिंग प्लांट विकसित हो जाए तो यातायात खर्च कम होने से बचत ज्यादा हो जाएगी। इसके साथ ही सरकार को फलों की खेती करने के लिए अनुदान या लोन का सरलीकरण किया जाना चाहिए।
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