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75 साल पहले प्रयास, अब निभा रहे परंपरा

Thu, 29 Jan 2015 12:07 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सिरसा
ब्यूरो/अमर उजाला, सिरसा Updated Thu, 29 Jan 2015 12:07 AM IST
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Effort 75 years ago, now playing tradition

शहर में रैगर समाज के शहर में करीब एक हजार घर हैं।

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इन घरों में जब भी सुख-दु:ख होता है, उससे पूर्व बाबा रामदेव के मंदिर का हिस्सा निकाला जाता है। ऐसा पिछले 75 सालों से चल रहा है।

जिसे अब डबवाली का रैगर समाज इसे रस्म मानकर निभाता है। न्यू बस स्टैंड रोड स्थित बाबा रामदेव के मंदिर की स्थापना विक्रमी संवत 1988 में हुई थी।

उस दौरान बाबा रामदेव के भक्त गीगा राम मंदिर वाली जगह आए। उन्होंने दो ईंट खड़ी करके ध्यान लगाया और वहां पर बाबा रामदेव मंदिर बनाने के लिए लोगों को प्रेरित किया।

लोगों को उनकी बात पर यकीन नहीं हुआ। लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया, लोगों का विश्वास मजबूत होता गया। विक्रमी संवत 1989 में दो ईंटें कमरे में तबदील हो गई।
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जिसके ऊपर गुंबद बनाया गया और कलश स्थापित किए गया। इसके बाद मंदिर में सुबह-शाम को दो समय आरती होने लगी। इसके बाद मंदिर के विकास का जिम्मा रैगर समाज ने अपने हाथों में लिया।
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इसके लिए चौधरी रामलाल, त्रिलोक चंद सकरवाल, प्रभाती राम धोलपुरिया, कान्हा राम तथा मंगला राम ने बाबा रामदेव सेवक संस्था का निर्माण किया।

मंदिर के ठीक सामने रहने वाले नपा डबवाली के पूर्व अध्यक्ष 85 वर्षीय चौधरी रामलाल बताते हैं कि इसी दौरान रैगर समाज से संबंध रखने वाले मुकंदा राम ने मंदिर के साथ लगती एक बिसवा जमीन मंदिर को दान कर दी।

उस समय रैगर समाज के करीब 400 घर थे। प्रत्येक घर खुशी-गमी के मौके पर मंदिर को दान दिया जाने लगा। इसी दान के सहारे उन्होंने जमीन पर दुकानें काट दी।

दुकानों के निर्माण के बाद आने वाली आमद से मंदिर के पुजारी तथा वहां रुकने वाले संत-फकीर के भोजन की व्यवस्था होने लगी।

पैसे की आय बनीं रहे इसके लिए साल में दो बार मेला भरने लगा। इससे लोगों का मंदिर की ओर रुझान बढ़ा।

लेकिन सत्तर साल पहले रैगर समाज में शुरू हुई परंपरा आज भी कायम है। घर में छोटा सा कार्यक्रम होने पर भी मंदिर को दान देना नहीं भूलते।

बन गई परंपरा
प्रेम कनवाड़िया, कृष्ण खटनावलिया ने बताया कि वे पीढ़ी दर पीढ़ी इस परंपरा का निर्वाह करते आ रहे हैं। उनके बुजुर्गों से उन्हें इस रस्म की जानकारी मिली है।


समाज के जिस भी घर में कोई कार्यक्रम होता है, उसी समय मंदिर के विकास के लिए परिवार खुद ब खुद दान देने की रस्म निभाता है।

उन्होंने बताया कि यह समाज के लोगों का सहयोग तथा बाबा रामदेव की कृपा है, जो एक कमरे का मंदिर विशाल मंदिर में परिवर्तित हो गया है और साथ में धर्मशाला बन गई है।

आज भरेगा मेला
प्राचीन बाबा रामदेव मंदिर में आज मेला भरेगा। हर साल की पंजाब, हरियाणा, दिल्ली तथा निकटवर्ती अन्य प्रदेशों के लोग माथा टेकेंगे।

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