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शिफ्ट किए जाने के विरोध में दिया धरना
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छात्रों के पक्ष से मांगों रखते हुए दिग्विजय सिंह चौटाला।
- फोटो : Sirsa
पन्नीवाला मोटा स्थित चौधरी देवीलाल इंजीनियरिंग कॉलेज से छात्रों को अलग-अलग जिलों में शिफ्ट करने के विरोध में मंगलवार को छात्रों ने कॉलेज के सामने धरना-प्रदर्शन किया। छात्रों ने बताया कि इंजीनियरिंग कॉलेज में एडमिशन कम होने के कारण अब इस कॉलेज को बंद करके दूसरे कॉलेजों में शिफ्ट किया जा रहा है।
धरने की सूचना पाकर इनसो के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिग्विजय सिंह चौटाला ने मौके पर पहुंचकर धरने को समर्थन दिया। प्रदर्शन के दौरान इनसो नेता ने छात्रों के साथ मिलकर कॉलेज परिसर में नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को कॉलेज प्रशासन के समक्ष रखा।
दिग्विजय सिंह ने कहा कि इनसो किसी भी सूरत में जिला के एकमात्र इंजीनियरिंग कॉलेज को बंद नहीं होने देगी। इसके लिए चाहे उन्हें कितना भी बड़ा आंदोलन क्यों न करना पड़े। दिग्विजय सिंह ने बताया कि इस कॉलेज का वर्ष 2003 में डॉ. अजय सिंह चौटाला के प्रयासों से चौटाला सरकार में निर्माण करवाया गया था। लेकिन मौजूदा भाजपा सरकार और कांग्रेस सरकार ने इसे बंद करवाने की कोशिशें की हैं। जिसका जेजेपी और इनसो कड़ा विरोध करती है। उन्होंने बताया कि पूर्व में इस कॉलेज का निर्माण यूनिवर्सिटी बनाने के लक्ष्य से किया गया था। उन्होंने कहा कि पहले सरकार ने इंजीनियर बनने वाले छात्रों को माली, चपरासी बनाया अब इस तरह से इंजीनियर कॉलेजों को ही टारगेट करके इंजीनियर बनने का सपना देख रहे युवाओं के साथ सरकार खिलवाड़ कर रही है। जिसे इनसो कतई बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने सरकार से मांग की है कि वे छात्र हितों को ध्यान में रख कर धरने पर बैठे छात्रों की मांगों को मानते हुए इस कॉलेज की सुध ले अन्यथा इनसो को मजबूरन बड़ा आंदोलन करना पड़ेगा।
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ये हुए है आदेश
बता दें कि इंजीनियरिंग कॉलेज में इलेक्ट्रिक व मेकेनिकल के दोनों ट्रेडों में 60-60 सीट हैं। सरकार ने दाखिले से पूर्व ये नियम लागू किए थे कि अगर छात्रों की संख्या 25 प्रतिशत से कम होती है तो उन्हें अन्य कॉलेजों में शिफ्ट कर दिया जाएगा। ये संख्या 25 प्रतिशत से कम होने के चलते कुछ छात्रों को नीलोखेड़ी व कुछ को झज्जर भेज दिया गया। जिसके रोष स्वरूप छात्रों ने धरना प्रदर्शन कर रोष जताया।
ये भाजपा सरकार इस कॉलेज को बंद करने की फिराक में है। अगर एक भी छात्र दूसरी जगह शिफ्ट हुआ तो हम सरकार के खिलाफ बड़ा आंदोलन करेंगे। जिसकी पूरी जिम्मेवारी सरकार व प्रशासन की होगी।
- दिग्विजय सिंह, राष्ट्रीय अध्यक्ष, इनसो।
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धरने की सूचना पाकर इनसो के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिग्विजय सिंह चौटाला ने मौके पर पहुंचकर धरने को समर्थन दिया। प्रदर्शन के दौरान इनसो नेता ने छात्रों के साथ मिलकर कॉलेज परिसर में नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को कॉलेज प्रशासन के समक्ष रखा।
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दिग्विजय सिंह ने कहा कि इनसो किसी भी सूरत में जिला के एकमात्र इंजीनियरिंग कॉलेज को बंद नहीं होने देगी। इसके लिए चाहे उन्हें कितना भी बड़ा आंदोलन क्यों न करना पड़े। दिग्विजय सिंह ने बताया कि इस कॉलेज का वर्ष 2003 में डॉ. अजय सिंह चौटाला के प्रयासों से चौटाला सरकार में निर्माण करवाया गया था। लेकिन मौजूदा भाजपा सरकार और कांग्रेस सरकार ने इसे बंद करवाने की कोशिशें की हैं। जिसका जेजेपी और इनसो कड़ा विरोध करती है। उन्होंने बताया कि पूर्व में इस कॉलेज का निर्माण यूनिवर्सिटी बनाने के लक्ष्य से किया गया था। उन्होंने कहा कि पहले सरकार ने इंजीनियर बनने वाले छात्रों को माली, चपरासी बनाया अब इस तरह से इंजीनियर कॉलेजों को ही टारगेट करके इंजीनियर बनने का सपना देख रहे युवाओं के साथ सरकार खिलवाड़ कर रही है। जिसे इनसो कतई बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने सरकार से मांग की है कि वे छात्र हितों को ध्यान में रख कर धरने पर बैठे छात्रों की मांगों को मानते हुए इस कॉलेज की सुध ले अन्यथा इनसो को मजबूरन बड़ा आंदोलन करना पड़ेगा।
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ये हुए है आदेश
बता दें कि इंजीनियरिंग कॉलेज में इलेक्ट्रिक व मेकेनिकल के दोनों ट्रेडों में 60-60 सीट हैं। सरकार ने दाखिले से पूर्व ये नियम लागू किए थे कि अगर छात्रों की संख्या 25 प्रतिशत से कम होती है तो उन्हें अन्य कॉलेजों में शिफ्ट कर दिया जाएगा। ये संख्या 25 प्रतिशत से कम होने के चलते कुछ छात्रों को नीलोखेड़ी व कुछ को झज्जर भेज दिया गया। जिसके रोष स्वरूप छात्रों ने धरना प्रदर्शन कर रोष जताया।
ये भाजपा सरकार इस कॉलेज को बंद करने की फिराक में है। अगर एक भी छात्र दूसरी जगह शिफ्ट हुआ तो हम सरकार के खिलाफ बड़ा आंदोलन करेंगे। जिसकी पूरी जिम्मेवारी सरकार व प्रशासन की होगी।
- दिग्विजय सिंह, राष्ट्रीय अध्यक्ष, इनसो।