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Sirsa News: शिक्षा विभाग नहीं कर रहा निजी स्कूलों पर कार्रवाई, अभिभावक महंगी पुस्तकें खरीदने को मजबूर
Sat, 06 Apr 2024 11:49 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Sat, 06 Apr 2024 11:49 PM IST
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सिरसा। जिले में निजी स्कूलों की ओर से मनमानी करते हुए निजी प्रकाशकों की पुस्तकें लगाई जा रही हैं। जिस पर शिक्षा विभाग की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। विभाग अधिकारियों का कहना है कि उनके पास अभी तक कोई शिकायत नहीं आई है। जब तक कोई शिकायत नहीं आती तब तक कोई कार्रवाई नहीं कर सकते।
प्राइवेट स्कूलों में दाखिला प्रक्रिया शुरू होने के बाद से ही अभिभावकों की जेब ढीली होनी शुरू हो गई है। अभिभावक प्राइवेट स्कूलों से महंगे दाम में किताबें और स्टेशनरी खरीदने पर मजबूर हैं। नर्सरी से लेकर आठवीं कक्षा तक करीब 3 से 7 हजार रुपये किताबों और स्टेशनरी के सेट बिक रहे हैं। जिस पर शिक्षा विभाग की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। वहीं दूसरी ओर अभिभावक एसोसिएशन का कहना है कि विभाग शिकायत होने पर भी कार्रवाई नहीं करता। एसोसिएशन के प्रधान सौरभ मेहता ने बताया कि हर साल निजी स्कूलों का ये ही हाल होता है। दोगुने से तीन गुने भाव में किताबों को बेचते हैं। हर बार विभाग को शिकायत की जाती है, लेकिन कोई समाधान नहीं होता। पिछले साल भी बहुत से स्कूलों की प्रमाण के साथ शिकायत की थी लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। ऐसे में अब सीएम विंडो पर शिकायत की है।
गैर मान्यता प्राप्त को लेकर भी कोई कार्रवाई नहीं
शिक्षा विभाग की ओर से कहा गया है कि गैर मान्यता प्राप्त स्कूलों को 1 अप्रैल से बंद कर दिया जाएगा। वहीं जिले के सभी खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालयों में गैर मान्यता प्राप्त स्कूलों की लिस्ट चस्पा की गई है, लेकिन कई जगहों पर अभिभावकों को लिस्ट मिली ही नहीं है। जिसके कारण उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अभिभावक प्रदीप कुमार, ऊषा रानी, सुमन व कमलेश ने बताया कि उन्हें अपने बच्चे का दाखिला निजी स्कूल में करवाना है। लेकिन कौन सा स्कूल गैर मान्यता प्राप्त है उन्हें पता ही नहीं है। क्योंकि स्कूलों की सूची जारी ही नहीं की गई है।
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हर साल सिलेबस बदलने के कारण होती हैं महंगी पुस्तकें
ज्यादातर प्राइवेट स्कूल हर वर्ष सिलेबस को बदल देते हैं। जिससे अभिभावकों को हर वर्ष नया सत्र शुरू होने पर नई किताबें लेनी पड़ती हैं। इन किताबों का सेट महंगा है। स्कूल और दुकानदारों ने कक्षा अनुसार किताबों के सेट का रेट तय किया है। कई स्कूलों में स्टेशनरी लेने के लिए भी अभिभावकों को बाध्य किया जा रहा है। कई स्कूल ऐसे हैं जो किताबों में थोड़ा संशोधन होने पर ही सिलेबस बदल देते हैं। दूसरी तरफ अभिभावक अपने बच्चों की पढ़ाई खराब होने के डर से भी विभाग को शिकायत भी नहीं करते। विभाग के अनुसार उनके पास अभी तक कोई शिकायत नहीं पहुंची है। सामाग्री, जूते, मौजें, वर्दी खरीदने के लिए बाध्य नहीं करेगा, लेकिन अभी तक जिला शिक्षा अधिकारियों ने प्राइवेट स्कूलों में जाकर निरीक्षण नहीं किया।
विभाग के पास निजी स्कूलों में पुस्तकों को लेकर कोई शिकायत नहीं आई। शिकायत आने पर मामले की जांच की जाएगी।
-- - ज्ञान सिंह, जिला शिक्षा अधिकारी सिरसा।
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प्राइवेट स्कूलों में दाखिला प्रक्रिया शुरू होने के बाद से ही अभिभावकों की जेब ढीली होनी शुरू हो गई है। अभिभावक प्राइवेट स्कूलों से महंगे दाम में किताबें और स्टेशनरी खरीदने पर मजबूर हैं। नर्सरी से लेकर आठवीं कक्षा तक करीब 3 से 7 हजार रुपये किताबों और स्टेशनरी के सेट बिक रहे हैं। जिस पर शिक्षा विभाग की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। वहीं दूसरी ओर अभिभावक एसोसिएशन का कहना है कि विभाग शिकायत होने पर भी कार्रवाई नहीं करता। एसोसिएशन के प्रधान सौरभ मेहता ने बताया कि हर साल निजी स्कूलों का ये ही हाल होता है। दोगुने से तीन गुने भाव में किताबों को बेचते हैं। हर बार विभाग को शिकायत की जाती है, लेकिन कोई समाधान नहीं होता। पिछले साल भी बहुत से स्कूलों की प्रमाण के साथ शिकायत की थी लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। ऐसे में अब सीएम विंडो पर शिकायत की है।
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गैर मान्यता प्राप्त को लेकर भी कोई कार्रवाई नहीं
शिक्षा विभाग की ओर से कहा गया है कि गैर मान्यता प्राप्त स्कूलों को 1 अप्रैल से बंद कर दिया जाएगा। वहीं जिले के सभी खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालयों में गैर मान्यता प्राप्त स्कूलों की लिस्ट चस्पा की गई है, लेकिन कई जगहों पर अभिभावकों को लिस्ट मिली ही नहीं है। जिसके कारण उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अभिभावक प्रदीप कुमार, ऊषा रानी, सुमन व कमलेश ने बताया कि उन्हें अपने बच्चे का दाखिला निजी स्कूल में करवाना है। लेकिन कौन सा स्कूल गैर मान्यता प्राप्त है उन्हें पता ही नहीं है। क्योंकि स्कूलों की सूची जारी ही नहीं की गई है।
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हर साल सिलेबस बदलने के कारण होती हैं महंगी पुस्तकें
ज्यादातर प्राइवेट स्कूल हर वर्ष सिलेबस को बदल देते हैं। जिससे अभिभावकों को हर वर्ष नया सत्र शुरू होने पर नई किताबें लेनी पड़ती हैं। इन किताबों का सेट महंगा है। स्कूल और दुकानदारों ने कक्षा अनुसार किताबों के सेट का रेट तय किया है। कई स्कूलों में स्टेशनरी लेने के लिए भी अभिभावकों को बाध्य किया जा रहा है। कई स्कूल ऐसे हैं जो किताबों में थोड़ा संशोधन होने पर ही सिलेबस बदल देते हैं। दूसरी तरफ अभिभावक अपने बच्चों की पढ़ाई खराब होने के डर से भी विभाग को शिकायत भी नहीं करते। विभाग के अनुसार उनके पास अभी तक कोई शिकायत नहीं पहुंची है। सामाग्री, जूते, मौजें, वर्दी खरीदने के लिए बाध्य नहीं करेगा, लेकिन अभी तक जिला शिक्षा अधिकारियों ने प्राइवेट स्कूलों में जाकर निरीक्षण नहीं किया।
विभाग के पास निजी स्कूलों में पुस्तकों को लेकर कोई शिकायत नहीं आई। शिकायत आने पर मामले की जांच की जाएगी।