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Sirsa News: धान की फसल पककर तैयार, कटाई करना चुनौती
Tue, 23 Sep 2025 10:45 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Tue, 23 Sep 2025 10:45 PM IST
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गांव बड़ोपल में पककर तैयार हुई फसल में जलभराव का दृश्य। संवाद
फतेहाबाद। जिले में इन दिनों खरीफ की फसल पककर तैयार हो गई है लेकिन खेतों में दो से ढाई फीट तक जलभराव होने के कारण किसान अपनी फसलों की कटाई नहीं कर पा रहे हैं। पिछले एक महीने से खेतों में भरा बारिश का पानी नहीं निकल पाया है इससे किसान चिंतित हैं। धान, बाजरा, मूंग की कटाई व नरमा की फसल की चुगाई करना मुश्किल हो रहा है।
जिले में फिलहाल 20 से अधिक गांवों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है। इसमें गांव बड़ोपल, चिंदड़, दहमन, कुम्हारिया, खारा खेड़ी, सारंगपुर, ढांड, भट्टू कलां, ठुईयां और खाबड़ा कलां शामिल हैं। इन गांवों के किसानों का कहना है कि जलभराव के कारण उनकी फसलें बर्बाद हो चुकी है। वहीं कम जलभराव वाले कुछ क्षेत्र में फसल तो पककर तैयार हाे गई है लेकिन इसकी कटाई करना चुनौती बन गया है। सिंचाई विभाग के भ्रष्टाचार और लापरवाही के कारण जलनिकासी का उचित प्रबंध नहीं हो सका है। सिंचाई विभाग आरटीआई का जवाब नहीं दे रहा है और न ही जल निकासी के लिए कोई स्थायी कदम उठाए जा रहे हैं। जल्द ही पानी नहीं निकला तो रबी की फसलों की बिजाई भी नहीं हो पाएगी। इससे किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ेगी।
जल निकासी के लिए यह बना रखी है व्यवस्था
जलभराव वाले क्षेत्रों में व्यवस्था सुधारने के लिए जिला प्रशासन निरंतर जुटा है। 100 से अधिक पंप सेट और मोटर लगा रखी हैं। 50 से अधिक कर्मचारी और मजदूर जल निकासी में जुटे हैं।
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यह बोले किसान
जलभराव के कारण धान की कटाई का काम नहीं हो पा रहा है। किसान को दुख इसी बात का है कि वे पककर तैयार फसल की कटाई नहीं कर पा रहे हैं। सरकार को जलनिकासी के काम में तेजी लानी चाहिए।
सुरेश कुमार, गांव बड़ोपल।
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नरमा की फसल जलभराव के कारण नष्ट हो चुकी है। बारिश से पहले जो टिंडे गए थे उनमें खिलाव आया है लेकिन खेत में तीन-तीन फीट तक जमा पानी में नरमे की फसल की चुगाई करना मुश्किल हो गया है।
आर्यन बिश्नोई, गांव बड़ोपल।
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क्षेत्र में जलनिकासी का स्थाई प्रंबंध हो सकता है, लेकिन सिंचाई विभाग के उदासीन अधिकारियों के कारण सुधार नहीं हो पा रहा है। इसके लिए मैंने दो बार आरटीआई भी लगाई है लेकिन कोई जवाब नहीं मिला है।
सुंदर कुमार, गांव बड़ोपल।
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धान की फसल की ऊंचाई साढ़े तीन फीट तक होने के कारण पौध पूरी तरह से पानी में नहीं डूबी। इससे ऊपर के हिस्से में दाना बना है जो कि अब पककर तैयार हो चुका है। लेकिन जमा पानी के बीच कटाई नहीं हो सकती है।
सुशील कड़वासरा, गांव बड़ोपल।
::::::
जलभराव की स्थिति से निपटने के लिए पाइपलाइन डालकर नजदीक लगती नहरों में पानी निकाला जा रहा है। पिछले एक सप्ताह में पंपों की संख्या बढ़ाई गई है। सेम की समस्या होने के कारण पानी कम नहीं हो पा रहा है। सिंचाई विभाग के कर्मचारी जलनिकासी में लगातार लगे हुए हैं।
विनोद धतरवाल, कार्यकारी अभियंता, सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग, आदमपुर।
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जिले में फिलहाल 20 से अधिक गांवों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है। इसमें गांव बड़ोपल, चिंदड़, दहमन, कुम्हारिया, खारा खेड़ी, सारंगपुर, ढांड, भट्टू कलां, ठुईयां और खाबड़ा कलां शामिल हैं। इन गांवों के किसानों का कहना है कि जलभराव के कारण उनकी फसलें बर्बाद हो चुकी है। वहीं कम जलभराव वाले कुछ क्षेत्र में फसल तो पककर तैयार हाे गई है लेकिन इसकी कटाई करना चुनौती बन गया है। सिंचाई विभाग के भ्रष्टाचार और लापरवाही के कारण जलनिकासी का उचित प्रबंध नहीं हो सका है। सिंचाई विभाग आरटीआई का जवाब नहीं दे रहा है और न ही जल निकासी के लिए कोई स्थायी कदम उठाए जा रहे हैं। जल्द ही पानी नहीं निकला तो रबी की फसलों की बिजाई भी नहीं हो पाएगी। इससे किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ेगी।
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जल निकासी के लिए यह बना रखी है व्यवस्था
जलभराव वाले क्षेत्रों में व्यवस्था सुधारने के लिए जिला प्रशासन निरंतर जुटा है। 100 से अधिक पंप सेट और मोटर लगा रखी हैं। 50 से अधिक कर्मचारी और मजदूर जल निकासी में जुटे हैं।
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यह बोले किसान
जलभराव के कारण धान की कटाई का काम नहीं हो पा रहा है। किसान को दुख इसी बात का है कि वे पककर तैयार फसल की कटाई नहीं कर पा रहे हैं। सरकार को जलनिकासी के काम में तेजी लानी चाहिए।
सुरेश कुमार, गांव बड़ोपल।
नरमा की फसल जलभराव के कारण नष्ट हो चुकी है। बारिश से पहले जो टिंडे गए थे उनमें खिलाव आया है लेकिन खेत में तीन-तीन फीट तक जमा पानी में नरमे की फसल की चुगाई करना मुश्किल हो गया है।
आर्यन बिश्नोई, गांव बड़ोपल।
क्षेत्र में जलनिकासी का स्थाई प्रंबंध हो सकता है, लेकिन सिंचाई विभाग के उदासीन अधिकारियों के कारण सुधार नहीं हो पा रहा है। इसके लिए मैंने दो बार आरटीआई भी लगाई है लेकिन कोई जवाब नहीं मिला है।
सुंदर कुमार, गांव बड़ोपल।
धान की फसल की ऊंचाई साढ़े तीन फीट तक होने के कारण पौध पूरी तरह से पानी में नहीं डूबी। इससे ऊपर के हिस्से में दाना बना है जो कि अब पककर तैयार हो चुका है। लेकिन जमा पानी के बीच कटाई नहीं हो सकती है।
सुशील कड़वासरा, गांव बड़ोपल।
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जलभराव की स्थिति से निपटने के लिए पाइपलाइन डालकर नजदीक लगती नहरों में पानी निकाला जा रहा है। पिछले एक सप्ताह में पंपों की संख्या बढ़ाई गई है। सेम की समस्या होने के कारण पानी कम नहीं हो पा रहा है। सिंचाई विभाग के कर्मचारी जलनिकासी में लगातार लगे हुए हैं।
विनोद धतरवाल, कार्यकारी अभियंता, सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग, आदमपुर।