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Sirsa News: डबवाली में खाद वितरण को लेकर किसानों और दुकानदारों में हुई बहस, लगाया धरना
Thu, 17 Oct 2024 11:32 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Thu, 17 Oct 2024 11:32 PM IST
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कालांवाली में रात के समय डीएपी के लिए खरीद केंद्र के बाहर खड़े किसान। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। डीएपी के लिए डबवाली, कालंवाली व अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में पैक्सों के बाहर किसानों की लंबी लाइनें देखने को मिल रही है। इस दौरान जहां डीएपी पूरी नहीं मिलने से किसान परेशान है, वहीं, तीन बैग डीएपी के साथ में एनपीके खरीदने के नियम ने दिक्कतें बढ़ा दी हैं।
वीरवार को खाद वितरण को लेकर किसानों और दुकानदारों में आपस में बहस हो गई। पुलिस और अधिकारियों के आपसी हस्तक्षेप के बाद मामले को शांत करवाया गया और किसानों को डीएपी दी गई।
डबवाली की दुकान नंबर 139 पर डीएपी के करीब 700 बैग आए थे। बुधवार रात को किसानों को डीएपी आने की सूचना मिली थी। इसके बाद बड़ी संख्या में किसान डीएपी के लिए पहुंच गए। दुकान खुलने तक किसानों की भीड़ वहां पर लग गई। ऐसे में व्यवस्था बनाने में अधिकारी व दुकानदार परेशान हो गए। व्यवस्था नहीं बनने पर किसानों और दुकानदार के बीच आपस में बहस हो गई। किसान धरना देकर बैठ गए।
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किसानों के धरना देकर बैठने की सूचना मिलने पर एसएचओ शहर शैलेंद्र कुमार और एसडीओ एग्रीकल्चर अमित शर्मा मौके पर पहुंचे। उन्होंने किसानों के प्रतिनिधि मंडल से बातचीत की और आपसी सहमति बनवाई। इसके उपरांत नियमित रूप से खाद वितरण का कार्य किया गया।
ऐलनाबाद में स्थिति सामान्य : डीएपी को लेकर ऐलनाबाद में स्थिति सामान्य है। यहां खरीद केंद्रों पर डीएपी मिल ही नहीं रही। हालांकि फसलों की कटाई का कार्य शुरू है।
डीएपी के साथ एनपीके देने पर विवाद
डबवाली की तरह ही कालांवाली में विकल्प के तौर पर किसानों को एनपीके देने का मामला सामने आया। जबकि किसान डीएपी पर अड़े रहे। देर शाम तक किसान बिक्री केंद्र के बाहर लाइन बनाए हुए नजर आए। किसान हरमिंद्र सिंह ने बताया कि डीएपी के साथ एनपीके दी जा रही है। इसकी किसान को जरूरत नहीं है। मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएसपी मौके पर पहुंचे और मामले को शांत करवाया।
डीएपी खाद को लेकर कोई दिक्कत नहीं है। एनपीके विकल्प के तौर पर दिया जा रहा है। किसानों को जागरूक किया जा रहा है कि सरसों फसल की बिजाई के लिए एनपीके बेहतर विकल्प है। किसानों के साथ कोई जबरदस्ती नहीं हो रही है। मौजूदा समय में सरसों के लिए दी जा रही एनपीके के बैग की कीमत 1250 रुपये है। जो डीएपी से 100 रुपये सस्ती है।
- अमित कुमार, एसडीओ, कृषि विभाग
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सिरसा। डीएपी के लिए डबवाली, कालंवाली व अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में पैक्सों के बाहर किसानों की लंबी लाइनें देखने को मिल रही है। इस दौरान जहां डीएपी पूरी नहीं मिलने से किसान परेशान है, वहीं, तीन बैग डीएपी के साथ में एनपीके खरीदने के नियम ने दिक्कतें बढ़ा दी हैं।
वीरवार को खाद वितरण को लेकर किसानों और दुकानदारों में आपस में बहस हो गई। पुलिस और अधिकारियों के आपसी हस्तक्षेप के बाद मामले को शांत करवाया गया और किसानों को डीएपी दी गई।
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डबवाली की दुकान नंबर 139 पर डीएपी के करीब 700 बैग आए थे। बुधवार रात को किसानों को डीएपी आने की सूचना मिली थी। इसके बाद बड़ी संख्या में किसान डीएपी के लिए पहुंच गए। दुकान खुलने तक किसानों की भीड़ वहां पर लग गई। ऐसे में व्यवस्था बनाने में अधिकारी व दुकानदार परेशान हो गए। व्यवस्था नहीं बनने पर किसानों और दुकानदार के बीच आपस में बहस हो गई। किसान धरना देकर बैठ गए।
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किसानों के धरना देकर बैठने की सूचना मिलने पर एसएचओ शहर शैलेंद्र कुमार और एसडीओ एग्रीकल्चर अमित शर्मा मौके पर पहुंचे। उन्होंने किसानों के प्रतिनिधि मंडल से बातचीत की और आपसी सहमति बनवाई। इसके उपरांत नियमित रूप से खाद वितरण का कार्य किया गया।
ऐलनाबाद में स्थिति सामान्य : डीएपी को लेकर ऐलनाबाद में स्थिति सामान्य है। यहां खरीद केंद्रों पर डीएपी मिल ही नहीं रही। हालांकि फसलों की कटाई का कार्य शुरू है।
डीएपी के साथ एनपीके देने पर विवाद
डबवाली की तरह ही कालांवाली में विकल्प के तौर पर किसानों को एनपीके देने का मामला सामने आया। जबकि किसान डीएपी पर अड़े रहे। देर शाम तक किसान बिक्री केंद्र के बाहर लाइन बनाए हुए नजर आए। किसान हरमिंद्र सिंह ने बताया कि डीएपी के साथ एनपीके दी जा रही है। इसकी किसान को जरूरत नहीं है। मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएसपी मौके पर पहुंचे और मामले को शांत करवाया।
डीएपी खाद को लेकर कोई दिक्कत नहीं है। एनपीके विकल्प के तौर पर दिया जा रहा है। किसानों को जागरूक किया जा रहा है कि सरसों फसल की बिजाई के लिए एनपीके बेहतर विकल्प है। किसानों के साथ कोई जबरदस्ती नहीं हो रही है। मौजूदा समय में सरसों के लिए दी जा रही एनपीके के बैग की कीमत 1250 रुपये है। जो डीएपी से 100 रुपये सस्ती है।
- अमित कुमार, एसडीओ, कृषि विभाग