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पीएनबी का एटीएम उखाड़ ले गए चोर
सिरसा /ब्यूरो
Updated Sun, 27 Dec 2015 12:15 AM IST
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चार नकाबपोश युवक कॉलोनी रोड रेलवे फाटक के नजदीक स्थित पंजाब नेशनल बैंक का एटीएम उखाड़ ले गए। एटीएम में 14 लाख 33 हजार 100 रुपये थे। वारदात सुबह चार बजे हुई। पुलिस ने केस दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है।
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पंजाब नेशनल बैंक में ड्यूटी दे रहे एएसआई सुरजीत सिंह ने बताया कि शनिवार सुबह करीब चार बजकर 8 मिनट पर उन्हें बैंक के बाहर धमाका सुनाई दिया।
उसने अंदर से देखा कि कुछ युवक एटीएम मशीन को इनोवा गाड़ी में लाद रहे थे। उसने तत्काल अपने साथी मान सिंह, रामेश्वर और रमेश कुमार को सूचना दी। इस संबंध में पुलिस को सूचित करके वरिष्ठ शाखा प्रबंधक परमजीत कोचर को जानकारी दी।
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जब तक पुलिस पहुंचती तब तक आरोपी फरार हो चुके थे। पुलिस ने तुरंत रेड अलर्ट घोषित करके नाकेबंदी करवा दी। पुलिस ने अंदाजे के अनुसार गाड़ी का पीछा भी किया।
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बैंक की सुरक्षा गारद में तैनात एएसआई सुरजीत सिंह ने बताया कि जैसे ही उसे इनोवा गाड़ी दिखाई दी तो उसने सायरन बजाया। चूंकि बैंक के मुख्य गेट पर तीन ताले लगे हुए थे।
उन्हें खोलने में समय व्यर्थ न हो, साथी कर्मचारियों ने पुलिस को सूचित किया। शाखा प्रबंधक परमजीत कोचर ने बताया कि एटीएम में 14 लाख 33 हजार 100 रुपये थे।
एटीएम संबंधी पूरा कामकाज एक निजी कंपनी देखती है। 24 दिसंबर 2015 को कंपनी के कर्मचारी विशाल ने 14 लाख रुपये मशीन में डाले थे। इससे पहले 10 लाख रुपये की राशि मशीन में थी। जिसमें से नौ लाख 66 हजार 900 रुपये की राशि निकल गई थी।
चार मिनट में उखाड़ी एटीएम
नकाबपोश युवकों ने वारदात को योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया। बैंक के आस-पास करीब 30 मिनट बिताए।
करीब चार क्विंटल वजनी एटीएम को उखाड़कर ले जाने में महज चार मिनट का समय लगाया और इनोवा गाड़ी में लादकर चलते बने। वारदात के समय सायरन नहीं बजा।
इससे पहले सीसीटीवी कैमरों की वायर को काटने के लिए भी उन्होंने बड़ी सावधानी बरती। आरोपियों ने हाथों पर बिजली कर्मचारियों द्वारा पहने जाने वाले दास्ताने चढ़ाए हुए थे। सीसीटीवी फुटेज से पता चलता है कि आरोपियों ने अपना कार्य बांटा हुआ था।
सुबह आठ बजे खुलता था एटीएम
एटीएम संभाल रही कंपनी के एरिया मैनेजर विक्रम बागड़िया ने बताया कि कंपनी एटीएम में गार्ड रखती थी। प्रदेश की अन्य जगहों पर गार्ड के साथ हुई वारदातों के चलते पॉलिसी बदली गई।
रात आठ बजे से सुबह आठ बजे तक एटीएम बंद रहता है।
सीसीटीवी में कैद हुई वारदात
तीन बजकर 38 मिनट : बैंक के सामने सिल्वर कलर की एक इनोवा गाड़ी आकर रुकती है। जिसमें दो युवा उतरते हैं। सड़क के दोनों ओर देखकर बैंक के पास पहुंचते हैं।
तीन बजकर 40 मिनट : एक युवक बैंक के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे की वायर काट कर उसे बंद कर देता है।
तीन बजकर 47 मिनट : एक युवक बंद एटीएम के ताले तोड़ता है। दूसरा युवक बैंक के बाहर लगे दूसरे कैमरे की वायर काटकर उसे बंद कर देता है।
4.00 बजे : साइड में खड़ी गाड़ी एटीएम रूम के आगे आ जाती है। दो नकाबपोश युवक भीतर घुस जाते हैं। एक युवक कैमरे पर स्प्रे करके उसे बंद करने का प्रयास करता है। इसी दौरान किसी के आने का संकेत पाकर वापस गाड़ी में बैठकर चले जाते हैं।
चार बजकर 04 मिनट : तीन मिनट का इंतजार करने के बाद वापस गाड़ी एटीएम के आगे रुक जाती है। चार युवक गाड़ी से उतरते हैं।
गाड़ी की पिछली डिग्गी खोलकर एक युवक लोहे की संगली लेकर भीतर आता है दूसरा युवक कैमरे को नीचे की ओर झुका देता है।
तीसरे युवक के हाथ में तेजधार हथियार है। चौथा युवक आवाजाही पर नजर रख रहा है।
चार बजकर 08 मिनट : एटीएम टूटने का धमाका सुनकर बैंक के भीतर गारद चौकन्नी हो जाती है। कर्मचारी सुरजीत सिंह बैंक के बाहर झांकता है तो आरोपी एटीएम को इनोवा गाड़ी में ले जा रहे होते हैं।
फतेहाबाद में कामयाबी नहीं मिली, डबवाली में कर दी वारदात
डबवाली वारदात पुलिस अधिकारियों की आंखें खोलने के लिए काफी है कि पंचायत चुनावों को लेकर पुलिस कर्मचारी कितने अलर्ट हैं? नाकेबंदी किस ढंग से हुई है?
बिना नंबर प्लेट की सिल्वर कलर की इनोवा गाड़ी में बैठकर आरोपी शहर डबवाली को पार करके फतेहाबाद तक पहुंचते हैं। फतेहाबाद में असफल रहने के बाद पुन: डबवाली में आकर वारदात को अंजाम देकर आराम से निकल जाते हैं।
अब तक की पुलिस जांच में सामने आया है कि एक सिल्वर रंग की गाड़ी शहर डबवाली से कुछ किलोमीटर दूर स्थित खुब्बन रोड पर गांव मोड़ी के एक पेट्रोल पंप के सामने खड़ी थी।
पेट्रोल पंप के कारिंदों ने पुलिस को बताया कि युवकों की संख्या चार थी। युवक आपस में बातचीत कर रहे थे। समय करीब 10.30 बजे था।
पुलिस जांच में सामने आया है कि देर रात को सिल्वर कलर की ही बगैर नंबर प्लेट की इनोवा गाड़ी ने फतेहाबाद शहर में एक्सिस बैंक के एटीएम को तोड़ने का प्रयास किया।
मौके पर पहुंची पुलिस को देखकर आरोपी खिसक गए। सीसीटीवी फुटेज में सामने आया है कि सुबह तीन बजकर 27 मिनट पर उपरोक्त गाड़ी शहर में प्रवेश करती है।
सिरसा रोड से चौटाला रोड पर आने के बाद यह कॉलोनी रोड में एंट्री न करके सीधा चौटाला रोड की ओर निकल जाती है। अनाज मंडी रोड पर आकर गलियों से होती हुई करीब 10-11 मिनट के अंतराल में ठीक तीन बजकर 38 मिनट पर पीएनबी बैंक के सामने आकर रुकती है।
कुछ ही मिनटों में वारदात को अंजाम देने के बाद शहर से निकल जाती है।
सवाल उठता है कि बगैर नंबर प्लेट की कार इस तरह डबवाली से करीब 100 किलोमीटर दूर फतेहाबाद तक जाती है, फिर वापस डबवाली आती है।
मार्ग में कोई चेकिंग नहीं होती। पुलिस आशंका जता रही है कि वारदात को अंजाम देने के बाद कार वापस पंजाब गई है। पंजाब से कनेक्शन भिड़ा रही पुलिस का मानना है कि आरोपी पंजाब से संबंध रखते हैं।
पुलिस खंगाल रही सीसीटीवी कैमरे
शहर के बीचों बीच वारदात को अंजाम देने के बाद इनोवा गाड़ी किस ओर गई? इसका पता लगाने के लिए पुलिस सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है।
इसके अतिरिक्त पुलिस ने अपने स्तर पर शहर में लगाए सीसीटीवी कैमरों को भी खंगालना शुरू कर दिया है। युवकों के नकाबपोश होना सिरदर्द बना हुआ है।
सीसीटीवी फुटेज के अतिरिक्त पंजाब में आरोपियों का सुराग लगाया जा रहा है। सीआईए तथा अन्य टीमों की भी मदद ली जा रही है।
-सुखदेव सिंह, प्रभारी, शहर थाना, डबवाली
सिरसा पुलिस ने ध्यान हटाया तो लुटेरों ने फिर दिया वारदात को अंजाम
एटीएम लुटेरों को सिरसा काफी रास आया है। लुटेरे आठ एटीएम उखाड़कर ले जा चुके हैं और 19 महीने बाद भी पुलिस उन तक पहुंचने में नाकाम साबित हुई है।
ईनाम की घोषणा के बाद भी कोई जानकारी सामने नहीं आई है। मार्च के बाद से वारदात न होने के कारण पुलिस का ध्यान हटा ही था कि शुक्रवार रात कड़ाके की ठंड का फायदा उठाते हुए डबवाली में लुटेरों ने पीएनबी के एटीएम को निशाना बना डाला और एटीएम उखाड़कर ले गए।
एटीएम में साढ़े 14 लाख रुपये थे। यह जिले में एटीएम लूट की आठवीं वारदात है। इससे पहले जून 2014 से लेकर मार्च 2015 तक विभिन्न बैंकों के सात एटीएम उखाड़कर 50 लाख रुपये से अधिक लूटे जा चुके हैं।
सिरसा के नवनियुक्त पुलिस अधीक्षक सतेंद्र कुमार गुप्ता ने तीन दिन पहले ही पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक करके जिले में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने का आदेश दिया था।
पंजाब नेशनल बैंक से ही हुई शुरुआत
वारदातों का सिलसिला 28 जून 2014 की सुबह से शुरू हुआ था। पुलिस सुरक्षा प्रबंधों को ठेंगा दिखाकर इस दिन लुटेरे लालबत्ती चौक के पास पीएनबी एटीएम को उखाड़कर ले गए थे।
एटीएम में 15 लाख रुपये की नगदी थी। तत्कालीन पुलिस अधीक्षक मितेश जैन ने लुटेरों तक पहुंचने के लिए आठ टीमों का गठन किया, लेकिन पुलिस लुटेरों का कोई सुराग नहीं लगा पाई।
17 दिनों बाद ही सीबीआई को बनाया निशाना
पीएनबी वारदात के 17 दिनों बाद लुटेरों ने डिंग रोड स्थित एसबीआई एटीएम को निशाना बनाया और एटीएम उखाड़कर ले गए।
इस एटीएम में 11 लाख रुपये की राशि थी। एसबीआई का यह एटीएम डिंग पुलिस थाने से मात्र 200 मीटर दूर है। लुटेरे मात्र छह मिनट में एसबीआई एटीएम को उखाड़कर गाड़ी में डालकर ले गए।
लुटेरों ने एटीएम कक्ष के ऊपर सो रहे एक मजदूर को गन प्वाइंट पर भी
बंधक बनाया। उसी मजदूर ने थाने में जाकर पुलिस को लूट की सूचना दी। मात्र 17 दिन के अंदर दूसरी वारदात से पुलिस व्यवस्था से
पूरी तरह से सवाल खड़ा हो गया और एसपी ने इसे चुनौती मानते हुए इसे केस नंबर एक का दर्जा देकर 12 टीमों का गठन किया पर अभी भी पुलिस के हाथ खाली हैं।
22 अगस्त को डबवाली मार्ग से एटीएम उखाड़ा
22 अगस्त 2014 को डबवाली के सिरसा रोड पर लुटेरों ने पीएनबी एटीएम को उखाड़ा। इस एटीएम में 13 लाख 79 हजार 300 रुपये की नगदी थी।
इसके बाद सितंबर में स्टेट बैंक ऑफ पटियाला में एटीएम उखाड़कर ले जाने का प्रयास किया। 18 नंबवर को इलाहाबाद बैंक के एटीएम उखाड़ने की घटना पांचवीं वारदात थी।
29 मार्च 2015 को लुटेरों ने शिव चौक स्थित एचडीएफसी बैंक के एटीएम को निशाना बनाया। लुटेरे चंद मिनटों में एटीएम उखाड़कर गाड़ी में लादकर फरार हो गए।
14 लाख रुपये की नगदी एटीएम में थी। इसके बाद अक्तूबर 2015 में डबवाली शहर के बीचो-बीच स्थित पंजाब एंड सिंध बैंक को लुटेरों ने निशाना बना डाला।
पुलिस हर वारदात की भांति अज्ञात लुटेरों के खिलाफ मामला दर्ज किया, लेकिन उनका पता लगाने में आज तक सफलता हासिल नहीं कर पाई।
बेअसर साबित हुआ एक लाख का ईनाम
सिरसा के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक मितेश जैन ने लुटेरों को पकड़ने के लिए एक लाख रुपये का ईनाम घोषित किया हुआ था, लेकिन इसका तनिक भी फायदा पुलिस को नहीं मिला।
पुलिस लुटेरों का कुछ भी पता नहीं लगा पाई। सैकड़ों बार पुलिस की टीमें राजस्थान व पंजाब में जाकर छापेमारी कर चुकी हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि लुटेरे इतने शातिर हैं कि कोई भी सबूत पीछे छोड़कर नहीं जाते।
एक छोटा सा ठोस सबूत ही लुटेरों तक पहुंचने के लिए काफी है, लेकिन ठोस सबूत अब तक नहीं मिला। तत्कालीन एसपी ने लुटेरों तक पहुंचे के लिए स्पेशल टीमें गठित की थी।
इसके बाद पुलिस अधीक्षक अश्विन शैणवी ने भी लुटेरों तक पहुंचने के लिए ईनाम का सहारा लिया परंतु यह प्रयास भी विफल साबित होकर रह गया।