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कारोबारी को लगाई लाखों की चपत
ब्यूरो/अमर उजाला सिरसा
Updated Sat, 09 Jan 2016 01:54 AM IST
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दोस्त की बातों पर विश्वास कर एक कारोबारी लाखों की धोखाधड़ी का शिकार हो गया। पीड़ित ने पुलिस अधीक्षक सतेंद्र
कुमार गुप्ता से मुलाकात करके आपबीती सुनाई। इसके बाद पुलिस ने पीड़ित का बयान दर्ज कर जींद निवासी एक व्यक्ति के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है। उक्त व्यक्ति खुद को एंटी करप्शन ब्यूरो का अधिकारी बताता है। पुलिस ने आरोपी की गिरफ्तारी का प्रयास शुरू कर दिया है।
ई ब्लॉक निवासी कारोबारी अजय मोहन के पास मई 2015 को उसका दोस्त सरदूलगढ़ निवासी अवतार सिंह अपने एक साथी जींद निवासी अनिल कुमार के साथ आया। दोनों बोलेरो से आए थे। अवतार सिंह ने अजय मोहन से कहा कि अनिल अपनी बलेरो बेचना चाहता है।
अजय मोहन ने बताया कि गाड़ी 2012 मॉडल की थी। गाड़ी का सौदा चार लाख रुपये में हो गया। अजय मोहन ने अनिल कुमार से पूछा कि गाड़ी पर लोन तो नहीं लिया हुआ ना। दोस्त अवतार सिंह ने उसे कहा कि कोई लोन नहीं लिया हुआ, मेरी जिम्मेदारी है, टेंशन मत लो। दोस्त की बातों पर विश्वास कर उसने अनिल कुमार को रुपये दे दिए। आरसी नाम करवाकर देने की बात हुई थी।
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कई दिन बीत जाने पर आरसी नाम नहीं मिलने पर अजय मोहन ने अनिल कुमार को बात की। उसने कहा कि वह एंटी करप्श्न ब्यूरो का अधिकारी है, परवाह मत करो। इसके बाद वह लगातार उसे टरकाता रहा। अजय मोहन ने गाड़ी के संबंध में जानकारी जुटाई तो पता चला कि वह जींद के सिंगीकेट बैंक से पांच लाख रुपये लोन लिया हुआ था। इसके बाद उसने अनिल से अपने रुपये मांगे तो उसने मना कर दिया। जांच अधिकारी देशराज का कहना है कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
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कुमार गुप्ता से मुलाकात करके आपबीती सुनाई। इसके बाद पुलिस ने पीड़ित का बयान दर्ज कर जींद निवासी एक व्यक्ति के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है। उक्त व्यक्ति खुद को एंटी करप्शन ब्यूरो का अधिकारी बताता है। पुलिस ने आरोपी की गिरफ्तारी का प्रयास शुरू कर दिया है।
ई ब्लॉक निवासी कारोबारी अजय मोहन के पास मई 2015 को उसका दोस्त सरदूलगढ़ निवासी अवतार सिंह अपने एक साथी जींद निवासी अनिल कुमार के साथ आया। दोनों बोलेरो से आए थे। अवतार सिंह ने अजय मोहन से कहा कि अनिल अपनी बलेरो बेचना चाहता है।
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अजय मोहन ने बताया कि गाड़ी 2012 मॉडल की थी। गाड़ी का सौदा चार लाख रुपये में हो गया। अजय मोहन ने अनिल कुमार से पूछा कि गाड़ी पर लोन तो नहीं लिया हुआ ना। दोस्त अवतार सिंह ने उसे कहा कि कोई लोन नहीं लिया हुआ, मेरी जिम्मेदारी है, टेंशन मत लो। दोस्त की बातों पर विश्वास कर उसने अनिल कुमार को रुपये दे दिए। आरसी नाम करवाकर देने की बात हुई थी।
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कई दिन बीत जाने पर आरसी नाम नहीं मिलने पर अजय मोहन ने अनिल कुमार को बात की। उसने कहा कि वह एंटी करप्श्न ब्यूरो का अधिकारी है, परवाह मत करो। इसके बाद वह लगातार उसे टरकाता रहा। अजय मोहन ने गाड़ी के संबंध में जानकारी जुटाई तो पता चला कि वह जींद के सिंगीकेट बैंक से पांच लाख रुपये लोन लिया हुआ था। इसके बाद उसने अनिल से अपने रुपये मांगे तो उसने मना कर दिया। जांच अधिकारी देशराज का कहना है कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है।