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चौटाला डबल मर्डर कांड : सिरसा जेल में छोटू भाट ने रची थी साजिश

Wed, 25 Jan 2017 11:39 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सिरसा
ब्यूरो/अमर उजाला, सिरसा Updated Wed, 25 Jan 2017 11:39 PM IST
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Double murder cand Chautala, three arrest, case solved, Sirsa
चाौटाला डबल मडर्र कांड - फोटो : bureau

चौटाला डबल मर्डर कांड की गुत्थी को सुलझाते हुए पुलिस ने कांड के 15वें दिन बड़ा खुलासा करते हुए यह साफ कर दिया कि ये हमला इनेलो नेता प्रदीप गोदारा को टारगेट करके नहीं किया गया था। एसपी का कहना है कि हत्याकांड की साजिश सिरसा जेल में ही रची गई, कई संगीन मामलों में अपराधी छोटू भाट मास्टर माइंड है।

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बुधवार को एसपी सतेंद्र गुप्ता ने पत्रकारवार्ता में बताया कि हत्याकांड को अंजाम देने वाले शूटरों के लिए रेकी करने वाले गांव चौटाला के तीन युवकों को गिरफ्तार किया गया है। 11 जनवरी की रात करीब आठ बजकर 40 मिनट पर गांव चौटाला स्थित इनेलो नेता प्रदीप गोदारा की पीके फ्रूट कंपनी के ऑफिस में घुसकर कुछ बदमाशों ने ताबड़तोड़ फायरिंग की।
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हमले में गांव चौटाला निवासी जमींदार सतबीर पूनिया और अमित सहारण की मौत हो गई थी। पुलिस ने हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने के लिए एएसपी हिमांशु गर्ग के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया। टीम में सीआईए, स्पेशल स्टाफ, साइबर सेल, सदर डबवाली, चौटाला चौकी पुलिस, सीआईए डबवाली की टीमें शामिल थीं। जांच शुरू करते हुए ने कई गैंगस्टरों को पंजाब और राजस्थान के जिलों से प्रोडक्शन वारंट पर सिरसा लाया गया।
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इसलिए दिया डबल मर्डर कांड को अंजाम
जांच टीमों ने उनसे गहरी पूछताछ की और उनसे पुलिस को काफ अहम जानकारियों मिलीं। इसके बाद जांच टीमों को पता चला कि सिरसा जेल में हत्याकांड की साजिश छोटू भाट ने रची। इसका कारण यह था कि छोटू भाट पर डबवाली कोर्ट में जिन शूटरों ने गोलियां चलाईं, उनको चौटाला डबल मर्डर कांड में मरने वाले अमित सहारण ने कई दिनों तक शरण दी थी।

इसी कारण छोटू भाट अमित सहारण से बदला लेना चाहता था। पुलिस ने दावा किया कि जेल में कैद रहे छोटू भाट ने अपने शराब कारोबारी साथी गांव चौटाला निवासी गंगाजल उर्फ महेंद्र, कालू उर्फ मुखराम और मिंडा उर्फ सुखविंद्र को संदेश भिजवाकर साजिश को अमलीजामा पहनाने की जिम्मेदारी सौंपी।

ये तीनों अमित सहारण की रेकी करने में जुट गए। अमित सहारण की प्रदीप गोदारा के साथ अच्छी दोस्ती थी, इसलिए वे उसकी पीके फ्रूट कंपनी के ऑफिस में हर रोज आता था। रेकी का काम पूरा करने के बाद पांच शूटरों को सुपारी दी गई, जिन्होंने 11 जनवरी की रात को प्रदीप गोदारा के ऑफिस में फायरिंग की। इसमें अमित सहारण और उसके साथ बैठे सतबीर पूनिया की मौत हो गई।

पुलिस का ध्यान भटकाने को खुद कराई अपने घर पर फायरिंग
17 जनवरी को छोटू भाट जमानत मिलने पर सिरसा जेल से रिहा हुआ था। पुलिस ने उसको डबल हत्याकांड की जांच में शामिल होने के लिए नोटिस भेजा, लेकिन छोटू भाट जांच अधिकारियों के समक्ष पेश नहीं हुआ। इसके बाद 23 जनवरी की रात को छोटू भाट के घर पर फायरिंग हुई।

पुलिस की जांच में साफ हुआ ये काम बदमाशों का नहीं हो सकता। पुलिस को यकीन हो गया कि छोटू भाट ने पुलिस का ध्यान भटकाने के लिए अपने घर पर फायरिंग करवाई। संदेह के घेरे मेें चल रहे गंगाजल उर्फ महेंद्र, कालू उर्फ मुखराम और मिंडा उर्फ सुखविंद्र को पुलिस ने गिरफ्त में लेकर पूछताछ की तो डबल मर्डर हत्याकांड की सारी सच्चाई सामने आ गई। 24 जनवरी को पुलिस ने डबवाली कोर्ट से छोटू भाट का गिरफ्तारी वारंट जारी करवाया।

कई अन्य लोग भी हैं साजिश में शामिल
हत्याकांड की साजिश बेशक छोटू भाट ने रची, लेकिन इसे सिरे चढ़ाने में काफी लोगों की भूमिका सामने आ रही है। गांव चौटाला के तीन युवकों को तो पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है और कई अन्यों की तलाश में छापेमारी जारी है। हत्याकांड को अंजाम देने वाले पांच शूटरों की पहचान कर पुलिस ने हिरासत में लिया है। अभी गहन पूछताछ चल रही है।

जेल में साजिश का तर्क ठीक नहीं : जेल अधीक्षक
जेल अधीक्षक अमित भादू का कहना है कि डबवाली कोर्ट में छोटू भाट पर हमला हुआ तो उसके 20 दिनों तक वह सिविल अस्पताल, अग्रोहा मेडिकल, मेदांता में भर्ती रहा। पुलिस की गार्द के बीच उससे सैकड़ों युवा मिलने आते रहे। जब भी वो सिरसा से बाहर पेशी पर जाता तो पुलिस उसके समर्थकों की निजी गाड़ियों में बैठकर उसे कोर्ट में लेकर जाती। पुलिस सही तरीके से जांच करे। अपने ऊपर हमले के बाद इतने दिनों तक अपने लोगों के बीच रहने वाले को जेल के अंदर आने के बाद साजिश का तर्क ठीक नहीं।

अभी तक इन सवालों का जवाब नहीं दे पा रही पुलिस
पुलिस डबल हत्याकांड सुलझाने को लेकर पुलिस अधिकारी काफी खुश हैं, लेकिन कई ऐसे सवाल हैं, जिनका जवाब वो नहीं दे पा रहे। पहला सवाल ये कि अमित सहारण का पूरे गांव में कई जगह बैठना-उठना था, ऐसे में प्रदीप गोदारा के ऑफिस को ही हमले के लिए क्यों चुना गया।

मारे गए अमित सहारण और सतबीर पूनिया के साथ चार मिनट पहले तक नेता प्रतिपक्ष अभय चौटाला का बेटा अर्जुन चौटाला बैठा था। ऐसे में इतना बड़ा जोखिम छोटू भाट नहीं उठा सकता, क्योंकि छोटू भाट इनेलो का कट्टर समर्थक है। हमले में अमित के साथ सतबीर पूनिया की मौत हो गई, अगर अमित को मारना था तो सतबीर पर क्यों ताबड़तोड़ फायरिंग की गई। पुलिस ने जिन तीन लोगों को गिरफ्तार किया हैं, उन्हें कहां से गिरफ्त में लिया, ये भी पुलिस नहीं बता पा रही। सबसे बड़ी बात तो जेल में रची साजिश के दावे पर है। हमले के 20 दिनों तक छोटू भाट पुलिस गार्द में अपने समर्थकों के बीच अस्पताल में रहा तो साजिश जेल में रचे जाने की बात किसी के गले नहीं उतर रही।


जल्द होगी छोटू भाट से लेकर अन्य बदमाशों की गिरफ्तारी
एएसपी हिमांशु गर्ग के नेतृत्व वाली एसआईटी ने चौटाला डबल हत्याकांड को सुलझाने में काफी मेहनत की और बेहतर परिणाम दिया है। साजिश जेल में छोटू भाट ने रची थी। रेकी करने वाले तीन युवक पुलिस की गिरफ्त में हैं। छोटू भाट सहित हत्याकांड को अंजाम देने वाले बदमाशों की गिरफ्तारी जल्द हो जाएगी। ये हमला अमित सहारण को टारगेट पर लेकर किया गया था, अन्य किसी से इसका संबंध नहीं था। सीआईए इंचार्ज राजेंद्र गोदारा, स्पेशल स्टाफ राजाराम, सदर डबवाली इंचार्ज विनोद कुमार केस सुलझाने में बधाई के पात्र हैं।
सतेंद्र गुप्ता, एसपी सिरसा

 

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