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अलीकां पैक्स घोटाला : मुख्य आरोपी ने कहा मुझे अकेले को बनाया बली का बकरा, सहभागी तो कई थे
Updated Sun, 04 Mar 2018 01:04 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
ओढां।
अलीकां पैक्स में करोड़ों रुपये के घोटाले में मुख्य आरोपी सुभाष चंद ने उप-रजिस्ट्रार सहकारी समितियां हिसार को अपील भेजकर सभी आरोपियों पर समान रूप से कार्रवाई करने की गुहार लगाई है। आरोपी ने कहा है कि उसे अकेले को ही बली का बकरा बनाया गया है, जबकि इस मामले में जांच अधिकारी ने पांच विकास अधिकारी और पांच शाखा प्रबंधकों तथा दो क्लर्क सहित 13 लोगों को इस घोटाले में सह-आरोपी बनाया था परंतु इस मामले में पांच विकास अधिकारियों को गुपचुप तरीके से आरोप मुक्त कर दिया गया।
गौरतलब हो कि इस घोटाले में जांच अधिकारी आशीष बिश्नोई ने अपनी जांच रिपोर्ट में पैक्स प्रबंधक सुभाष चंद को मुख्य आरोपी बनाते हुए तत्कालीन पांच विकास अधिकारियों रमेश जमालिया, रायसिंह, सुरेंद्र भादू, आत्मा राम और श्रीराम एवं छह शाखा प्रबंधकों बीरबल परिहार, देवेंद्र पारिक, राजेंद्र कड़वासरा, सतपाल सिंगला, मोहन लाल और क्लर्क सुभाष भांभू तथा धर्मवीर साहू को सह-आरोपी बनाया। इस मामले में विकास अधिकारी आत्माराम और श्रीराम की मौत हो चुकी है जबकि शाखा प्रबंधक सतपाल सिंगला, मोहन लाल तथा राजेंद्र कड़वासरा सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
यहां ये भी उल्लेखनीय है कि सहायक रजिस्ट्रार डबवाली ने जांच अधिकारी की रिपोर्ट को सही मानते हुए शिकायत को सीएम विंडो पर अपलोड कर दिया था, लेकिन उसके बाद सहायक रजिस्ट्रार ने आरोपी विकास अधिकारियों के साथ सांठ-गांठ कर उन्हें क्लीन चिट्ट दे डाली। एक तरफ तो घोटाले के सहभागी पांच विकास अधिकारी क्लीन चिट ले गए तो वहीं दूसरी तरफ हाल ही में सेवानिवृत्त हुए विकास अधिकारी रमेश जमालिया को कार्यवाहक जीएम सुरेंद्र भादू द्वारा नोड्यूज देते समय ये लिखा गया है कि रमेश जमालिया अलीकां पैक्स मामले में आरोपी हैं। इसलिए उसे नोड्यूज नहीं दिया जा सकता, जबकि खुद महाप्रबंधक भी इस मामले के आरोपी बनाए गए थे।
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समय रहते जांच होती तो न होता इतना बवंडर
उधर इस मामले में मुख्य आरोपी सुभाष चंद की पत्नी निर्मला देवी का कहना है कि इस मामले में उसके पति अके ले को फंसाया जा रहा है जबकि इतना बड़ा घोटाला अकेले स्तर पर नहीं हो सकता। उसने कहा कि ये गबन वर्ष 2011-12 में शुरू हो गया था। अगर समय रहते अधिकारी जांच करते तो इतना बड़ा बवंडर न होता। निर्मला ने पक्ष रखते हुए कहा कि उसके पति की अवस्था का फायदा शाखा प्रबंधकों व विकास अधिकारियों ने उठाते हुए पैसे ले जाते रहे हैं। इसलिए किसी ने भी रिकॉर्ड में झांकने की कोशिश नहीं की। इसलिए इस मामले में सभी पर समान रूप से कार्रवाई की जाए। उधर सहायक रजिस्ट्रार एसएन वर्मा का कहना है कि वे इस समय अस्वस्थ हैं। कार्यालय में आते ही उप-रजिस्ट्रार को पत्र भेजकर आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाने की अनुमति ली जाएगी।
जांच लगभग अंतिम चरण में है
इस मामले में हमने बोर्ड के फैसले का रिमाइंडर उप-रजिस्ट्रार हिसार को भेजा हुआ है। सहायक रजिस्ट्रार डबवाली ने आरोपियों को नोटिस दे रखे हैं। हमारे पास अभी तक इस मामले में कोई जवाब नहीं आया है। हो सकता है कि उप-रजिस्ट्रार व सहायक रजिस्ट्रार के बीच इस विषय में कोई पत्राचार हो रहा हो। अलीकां गबन में हमारे कार्यालय की तरफ से भी एक टीम जांच कर रही है। ये जांच लगभग अंतिम चरण में है।
-सुरेंद्र भादू, कार्यवाहक महाप्रबंधक (सीबी सिरसा)।
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ओढां।
अलीकां पैक्स में करोड़ों रुपये के घोटाले में मुख्य आरोपी सुभाष चंद ने उप-रजिस्ट्रार सहकारी समितियां हिसार को अपील भेजकर सभी आरोपियों पर समान रूप से कार्रवाई करने की गुहार लगाई है। आरोपी ने कहा है कि उसे अकेले को ही बली का बकरा बनाया गया है, जबकि इस मामले में जांच अधिकारी ने पांच विकास अधिकारी और पांच शाखा प्रबंधकों तथा दो क्लर्क सहित 13 लोगों को इस घोटाले में सह-आरोपी बनाया था परंतु इस मामले में पांच विकास अधिकारियों को गुपचुप तरीके से आरोप मुक्त कर दिया गया।
गौरतलब हो कि इस घोटाले में जांच अधिकारी आशीष बिश्नोई ने अपनी जांच रिपोर्ट में पैक्स प्रबंधक सुभाष चंद को मुख्य आरोपी बनाते हुए तत्कालीन पांच विकास अधिकारियों रमेश जमालिया, रायसिंह, सुरेंद्र भादू, आत्मा राम और श्रीराम एवं छह शाखा प्रबंधकों बीरबल परिहार, देवेंद्र पारिक, राजेंद्र कड़वासरा, सतपाल सिंगला, मोहन लाल और क्लर्क सुभाष भांभू तथा धर्मवीर साहू को सह-आरोपी बनाया। इस मामले में विकास अधिकारी आत्माराम और श्रीराम की मौत हो चुकी है जबकि शाखा प्रबंधक सतपाल सिंगला, मोहन लाल तथा राजेंद्र कड़वासरा सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
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यहां ये भी उल्लेखनीय है कि सहायक रजिस्ट्रार डबवाली ने जांच अधिकारी की रिपोर्ट को सही मानते हुए शिकायत को सीएम विंडो पर अपलोड कर दिया था, लेकिन उसके बाद सहायक रजिस्ट्रार ने आरोपी विकास अधिकारियों के साथ सांठ-गांठ कर उन्हें क्लीन चिट्ट दे डाली। एक तरफ तो घोटाले के सहभागी पांच विकास अधिकारी क्लीन चिट ले गए तो वहीं दूसरी तरफ हाल ही में सेवानिवृत्त हुए विकास अधिकारी रमेश जमालिया को कार्यवाहक जीएम सुरेंद्र भादू द्वारा नोड्यूज देते समय ये लिखा गया है कि रमेश जमालिया अलीकां पैक्स मामले में आरोपी हैं। इसलिए उसे नोड्यूज नहीं दिया जा सकता, जबकि खुद महाप्रबंधक भी इस मामले के आरोपी बनाए गए थे।
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समय रहते जांच होती तो न होता इतना बवंडर
उधर इस मामले में मुख्य आरोपी सुभाष चंद की पत्नी निर्मला देवी का कहना है कि इस मामले में उसके पति अके ले को फंसाया जा रहा है जबकि इतना बड़ा घोटाला अकेले स्तर पर नहीं हो सकता। उसने कहा कि ये गबन वर्ष 2011-12 में शुरू हो गया था। अगर समय रहते अधिकारी जांच करते तो इतना बड़ा बवंडर न होता। निर्मला ने पक्ष रखते हुए कहा कि उसके पति की अवस्था का फायदा शाखा प्रबंधकों व विकास अधिकारियों ने उठाते हुए पैसे ले जाते रहे हैं। इसलिए किसी ने भी रिकॉर्ड में झांकने की कोशिश नहीं की। इसलिए इस मामले में सभी पर समान रूप से कार्रवाई की जाए। उधर सहायक रजिस्ट्रार एसएन वर्मा का कहना है कि वे इस समय अस्वस्थ हैं। कार्यालय में आते ही उप-रजिस्ट्रार को पत्र भेजकर आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाने की अनुमति ली जाएगी।
जांच लगभग अंतिम चरण में है
इस मामले में हमने बोर्ड के फैसले का रिमाइंडर उप-रजिस्ट्रार हिसार को भेजा हुआ है। सहायक रजिस्ट्रार डबवाली ने आरोपियों को नोटिस दे रखे हैं। हमारे पास अभी तक इस मामले में कोई जवाब नहीं आया है। हो सकता है कि उप-रजिस्ट्रार व सहायक रजिस्ट्रार के बीच इस विषय में कोई पत्राचार हो रहा हो। अलीकां गबन में हमारे कार्यालय की तरफ से भी एक टीम जांच कर रही है। ये जांच लगभग अंतिम चरण में है।
-सुरेंद्र भादू, कार्यवाहक महाप्रबंधक (सीबी सिरसा)।