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खारकीव में हो रहे लगातार हमले, जान जोखिम में डाल हंगरी और रोमानिया पहुंच रहे विद्यार्थी
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यूक्रेन से निकल दूसरे देशों में जाने के लिए ट्रेन में सवार होकर जाते नागरिक।
- फोटो : Sirsa
सिरसा। यूक्रेन में लगातार हो रही बमबारी और हमलों के बीच जान जोखिम में डालकर कई भारतीय विद्यार्थी दूसरे देशों की तरफ रुख कर रहे है। विद्यार्थियों का कहना है कि हर रोज स्थिति खराब हो रही है लेकिन एंबेसी में न तो उनका कोई फोन उठा रहा है और न ही कोई जवाब दिया जा रहा है। जिसके कारण वह जान जोखिम में डालकर वहां से निकलने को मजबूर हुए हैं। कई छात्र बसों तो कई छात्र मेट्रो की सहायता से दूसरे शहरों और देशों में पहुंच रहे हैं।
यूक्रेन के खारकीव में अब स्थिति दोबारा से खराब होना शुरू हो चुकी है। छात्र खारकीव में फंसे छात्र बप्पा निवासी शुभम कंबोज ने बताया कि उनके हॉस्टल के नजदीक बमबारी और मिसाइल दागी जा रही है। बाहर फौज के टैंक घूम रहे हैं। उनके नजदीक ही एक भारतीय छात्र की मौत हो गई है। जिसके कारण खतरा अधिक बढ़ गया है। जैसे तैसे कर वह खारकीव से निकलकर मेट्रो में पहुंचे और वह वहां से लवीब की तरफ जा रहे हैं। उनके साथ काफी संख्या में भारतीय और यूक्रेन के निवासी भी पहुंच रहे हैं। वहीं कीव में फंसे कई छात्र पहले पोलैंड में पहुंचे थे। लेकिन पोलैंड में उन्हें एंट्री नहीं मिली तो बस के सहारे वह हंगरी और रोमानिया देश की तरफ जा रहे हैं ताकि वह अपनी जान बचा सके।
बोले : इंडियन एंबेसी नहीं दे रही कोई जवाब, स्थिति सामान्य होने का नहीं कोई पता
खारकीव में फंसे विद्यार्थियों ने बताया कि बीते छह दिनों से वह लगातार खारकीव में फंसे हुए हैं। खाने पीने को लेकर उनको भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। स्थिति खराब होने के कारण वह जैसे तैसे कर खारकीव से निकले हैं। खारकीव से लवीब और इसके बाद रोमानिया या हंगरी में पहुंचेंगे। वहीं छात्रों का कहना है कि भारत सरकार की ओर से विद्यार्थियों को निकालने के दावे ही किए जा रहे है लेकिन धरातल पर कोई भी काम नहीं किया जा रहा।
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खारकीव में भूखे रहने को मजबूर है सभी विद्यार्थी, खाना हुआ खत्म
वहीं खारकीव शहर में फंसे सिरसा निवासी अविश अरोड़ा के पिता राजेश अरोड़ा ने बताया कि खारकीव में ही सिरसा के सौरव कंबोज, बरनाला रोड निवासी योगेश शर्मा, पुलिस लाइन निवासी आशीष वर्मा, महक और अन्य विद्यार्थी फंसे हुए है। उनके पास अब खाने के लिए कोई सुविधा नहीं है। स्टोरों पर खाने का सामान खत्म हो चुका है। मंगलवार को भी सभी विद्यार्थी भूखे रहे हैं। आसपास के एरिया में बमबारी होने के कारण स्थिति पहले से खराब हो रही है। अभी सभी मेट्रो स्टेशन पर ही रह रहे हैं। वहीं उन्होंने बताया कि वह अपने स्तर पर भी एंबेसी में बातचीत कर रहे है। जिसके बाद उन्होंने रूस के बॉर्डर से भारतीय नागरिकों को निकालने की बात कही है। हालांकि यह फैसला सरकार की ओर से लिया जाना है। खारकीव से मेट्रो स्टेशन और अन्य स्थान पर जाना बेहद ही मुश्किल है। जिसके कारण उनकी चिंता भी पहले से अधिक बढ़ती जा रही है।
किराये पर बस कर हंगरी की तरफ रवाना हुए सिरसा के विद्यार्थी
यूक्रेन के कीव शहर में फंसे छात्र पंकज कुमार के पिता धर्मपाल निवासी छतरियां ने बताया कि उनका बेटा व अन्य कई देशों के नागरिक कीव से लवीब पहुंचे है। यहां से उन्होंने निजी बस किराये पर की है और हंगरी देश की ओर रवाना हुए है। एंबेसी की तरफ से उन्हें अभी तक कोई भी मदद नहीं मिल पाई है। करीब 50 नागरिकों ने एकत्र होकर दो लाख में बस को किराये पर किया है। ताकि वह सही तरह से देश में वापस लौट सके। जान जोखिम में डालकर भारतीय नागरिक वहां से वापस लौट रहे है। बेटे के साथ सिरसा के कई अन्य विद्यार्थी भी शामिल है।
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यूक्रेन के खारकीव में अब स्थिति दोबारा से खराब होना शुरू हो चुकी है। छात्र खारकीव में फंसे छात्र बप्पा निवासी शुभम कंबोज ने बताया कि उनके हॉस्टल के नजदीक बमबारी और मिसाइल दागी जा रही है। बाहर फौज के टैंक घूम रहे हैं। उनके नजदीक ही एक भारतीय छात्र की मौत हो गई है। जिसके कारण खतरा अधिक बढ़ गया है। जैसे तैसे कर वह खारकीव से निकलकर मेट्रो में पहुंचे और वह वहां से लवीब की तरफ जा रहे हैं। उनके साथ काफी संख्या में भारतीय और यूक्रेन के निवासी भी पहुंच रहे हैं। वहीं कीव में फंसे कई छात्र पहले पोलैंड में पहुंचे थे। लेकिन पोलैंड में उन्हें एंट्री नहीं मिली तो बस के सहारे वह हंगरी और रोमानिया देश की तरफ जा रहे हैं ताकि वह अपनी जान बचा सके।
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बोले : इंडियन एंबेसी नहीं दे रही कोई जवाब, स्थिति सामान्य होने का नहीं कोई पता
खारकीव में फंसे विद्यार्थियों ने बताया कि बीते छह दिनों से वह लगातार खारकीव में फंसे हुए हैं। खाने पीने को लेकर उनको भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। स्थिति खराब होने के कारण वह जैसे तैसे कर खारकीव से निकले हैं। खारकीव से लवीब और इसके बाद रोमानिया या हंगरी में पहुंचेंगे। वहीं छात्रों का कहना है कि भारत सरकार की ओर से विद्यार्थियों को निकालने के दावे ही किए जा रहे है लेकिन धरातल पर कोई भी काम नहीं किया जा रहा।
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खारकीव में भूखे रहने को मजबूर है सभी विद्यार्थी, खाना हुआ खत्म
वहीं खारकीव शहर में फंसे सिरसा निवासी अविश अरोड़ा के पिता राजेश अरोड़ा ने बताया कि खारकीव में ही सिरसा के सौरव कंबोज, बरनाला रोड निवासी योगेश शर्मा, पुलिस लाइन निवासी आशीष वर्मा, महक और अन्य विद्यार्थी फंसे हुए है। उनके पास अब खाने के लिए कोई सुविधा नहीं है। स्टोरों पर खाने का सामान खत्म हो चुका है। मंगलवार को भी सभी विद्यार्थी भूखे रहे हैं। आसपास के एरिया में बमबारी होने के कारण स्थिति पहले से खराब हो रही है। अभी सभी मेट्रो स्टेशन पर ही रह रहे हैं। वहीं उन्होंने बताया कि वह अपने स्तर पर भी एंबेसी में बातचीत कर रहे है। जिसके बाद उन्होंने रूस के बॉर्डर से भारतीय नागरिकों को निकालने की बात कही है। हालांकि यह फैसला सरकार की ओर से लिया जाना है। खारकीव से मेट्रो स्टेशन और अन्य स्थान पर जाना बेहद ही मुश्किल है। जिसके कारण उनकी चिंता भी पहले से अधिक बढ़ती जा रही है।
किराये पर बस कर हंगरी की तरफ रवाना हुए सिरसा के विद्यार्थी
यूक्रेन के कीव शहर में फंसे छात्र पंकज कुमार के पिता धर्मपाल निवासी छतरियां ने बताया कि उनका बेटा व अन्य कई देशों के नागरिक कीव से लवीब पहुंचे है। यहां से उन्होंने निजी बस किराये पर की है और हंगरी देश की ओर रवाना हुए है। एंबेसी की तरफ से उन्हें अभी तक कोई भी मदद नहीं मिल पाई है। करीब 50 नागरिकों ने एकत्र होकर दो लाख में बस को किराये पर किया है। ताकि वह सही तरह से देश में वापस लौट सके। जान जोखिम में डालकर भारतीय नागरिक वहां से वापस लौट रहे है। बेटे के साथ सिरसा के कई अन्य विद्यार्थी भी शामिल है।

यूक्रेन से सुरक्षित स्थान की तरफ जाते भारतीय छात्र।- फोटो : Sirsa

रोमानिया एयरपोर्ट पर लगी नागरिकों की भीड़।- फोटो : Sirsa