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दिनभर रही ठिठुरन, फुहारों ने बढ़ाई शीत लहर
ब्यूरो/अमर उजाला सिरसा
Updated Thu, 14 Jan 2016 11:01 PM IST
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मकर संक्रांति को दिन भर सूर्य नहीं निकलने ठिठुरन रही। दो दिन से मौसम में बदलाव आया है। पारा 24 डिग्री से गिरकर 18 डिग्री पर आ पहुंचा है, जिससे ठंड महसूस होने लगी है।
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सुबह-सवेरे फुहारें भी गिर रही थीं। ठंड के कारण लोग घरों में ही दुबके रहे। लोगों को कंपकंपाती ठंड में सुबह घरों से निकलना पड़ा। स्कूली बच्चों को धुंध में ही स्कूल जाना पड़ा। जगह-जगह पर अलाव जलाकर लोगों ने ठंड से राहत पाने का प्रयास किया।
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इस सर्दी में वीरवार का दिन सबसे अधिक ठंडक वाला रहा। वीरवार को दिनभर बादल छाए रहे, जिस कारण सूरज नहीं निकल पाया। सुबह फुहारें गिरने से शीत लहर शुरू हो गई थी, जो दोपहर तक जारी रही। लोगों ने अलाव जलाकर ठंड से बचने का प्रयास किया।
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स्कूलों में जाने वाले बच्चों को सुबह-सुबह ठंड में जाना पड़ा। गर्म वस्त्रों में लिपटकर लोगों ने टाइम पास किया। इस सर्दी का आज पहला ऐसा दिन था, जब कड़ाके की ठंड महसूस की गई। मूंगफली का बाजार आज दिन भर गर्म रहा। शाम को सूप की रेहड़ियों पर भी बिक्री खूब हुई।
मौसम के जानकारों के अनुसार अब कुछ दिन तक अच्छी ठंड रहेगी। बरसात के भी आसार बने हुए हैं। शाम ढलने से पूर्व ही धुंध शुरू हो गई। लोगों को काम के लिए कंपकंपाती ठंड में घरों से बाहर निकलना पड़ा। लोगों ने घरों में हीटर चला कर ठंड से राहत पाई। ठंड के कारण जनजीवन प्रभावित हुआ। सुबह से लेकर रात तक शीत लहर जारी रही।
बरतें सावधानी
चिकित्सकों का कहना है कि इस ठंड में गर्म वस्त्र पहनकर ही घरों से निकलें। खासकर छोटे बच्चों को इस ठंड से बचाकर रखें, ताकि उन्हें ठंड न लगे। नंगे पांव बच्चों को न घूमने दें। इससे पूर्व मंगलवार तक पारा 24 से 25 डिग्री तक जारी था, जिस कारण सर्दी के मौसम में भी ठंड का अहसास नहीं हो रहा था।
बुधवार को पारा 20 डिग्री पर आ पहुंचा और आज पारा दो डिग्री और कम हो गया। जिस कारण ठिठुरन बढ़ना स्वाभाविक था। ऐसे में गर्म कपड़ों की दुकानों पर भी रौनक बढ़ गई है।
लोग गर्म वस्त्रों की खरीदारी करने बाजारों में पहुंचे। बरसात होने के अनुमान भी लगाए जा रहे हैं। इतना ही नहीं लोगों ने जगह-जगह पर अलाव जलाकर ठंड से बचाव का सहारा लिया।
फसलों के लिए फायदेमंद
अधिक ठंड फसलों के लिए लाभकारी मानी जाती है। जिले में तीन लाख हेक्टेयर से अधिक रकबे में गेहूं की फसल है, इसके अलावा 55 हजार हेक्टेयर में सरसों की बिजाई हुई है। मंगलवार तक का मौसम फसलों के अनुकूल नहीं था, लेकिन बुधवार और वीरवार का दिन फसलों के लिए काफी लाभकारी माना जा रहा है।
किसानों का कहना है कि जनवरी में जितनी अधिक ठंड पड़ती है, फसलों का उत्पादन उतना ही अधिक होता है। कृषि विशेषज्ञ राजेंद्र सिंह कहना है कि गेहूं की फसल ठंड से ही अच्छी होती है। इन दिनों में ठंड और धुंध फसलों को घी का काम करती है। इसकेे अलावा ऐसे मौसम में कई प्रकार की बीमारियां फसलों में नहीं आ पाती।
10 से 15 दिन और ऐसा ही मौसम रहा तो फसलों का उत्पादन अच्छा होगा। सिंचाई की जरूरत कम पड़ेगी, जिससे पानी की बचत होगी। यदि अब बरसात आ जाए तो फसलों के लिए सोने पे सुहागा हो जाएगा।
किसानों द्वारा ऐसे मौसम के लिए कई दिनों से फरियाद की जा रही थी। इससे पूर्व पड़ रही गर्मी के कारण किसान वर्ग चिंता में दिखाई पड़ रहा था।