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खुले में शौच जाने वालों को पकड़ेगी पुलिस, घरों में जाकर शौचालय भी देखेगी
ब्यूरो/अमर उजाला सिरसा
Updated Tue, 28 Jun 2016 01:31 AM IST
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खुले में शौच को जातीं महिलाएं
- फोटो : Desk
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स्वच्छ भारत मिशन के तहत गांवों को पूरी तरह से खुले में शौच मुक्त करने के लिए प्रशासन ने चेतावनी दी है। सरकारी योजना के तहत लाभ प्राप्त कर रहा व्यक्ति अगर खुले में शौच करता मिला तो उसके सभी लाभ छीन लिए जाएंगे। साथ ही सिरसा जिले को पूर्णत: स्वच्छ घोषित करवाने के लिए प्रशासन खाकी का भी सहारा ले रहा है। पुलिस को मॉनीटरिंग का जिम्मा सौंपा गया है। अंतर जिलास्तरीय टीम के दौरे के चलते प्रशासन मुस्तैद है।
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सोमवार को जिला प्रशासन ने स्वच्छ भारत मिशन को लेकर खंड डबवाली के सभी सरपंचों, ब्लाक समिति सदस्यों के साथ-साथ सामाजिक संस्थाओं की एक बैठक बीडीपीओ कार्यालय में की। बैठक को संबोधित करते हुए जिला समन्वयक सुखविंद्र सिंह ने कहा कि खुले में शौच मुक्त जिलों की बात करें तो पूरे हरियाणा में सिरसा टॉप पर है। पंचकूला उससे मामूली सा पीछे है।
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खंड स्तर पर डबवाली पहले तथा ओढ़ां दूसरे नंबर पर है। अभियान से जुड़े सभी अधिकारी तथा कर्मचारी कड़ी मेहनत कर रहे हैं। हर रोज सुबह पांच से सात बजे तक गांवों में रहकर खुले में शौच जाने वाले लोगों की वीडियो बनाते हैं, साथ में उन्हें समझाते भी हैं। जिला प्रशासन ने फैसला लिया है कि ऐसा कोई भी व्यक्ति जो सरकार की किसी भी योजना का लाभ प्राप्त कर रहा है।
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वह वीडियो या फोटो में नजर आता है, तो उसके सभी लाभ छीन लिए जाएंगे। अगर वह मनरेगा योजना में कार्यरत है तो उसका जॉब कार्ड समाप्त कर दिया जाएगा, अगर वह योजना के तहत मकान बना रहा है तो उसे आगामी किश्त नहीं मिलेगी। अगर कोई पेंशन पात्र पकड़ा जाता है तो उसे पेंशन भी नहीं मिलेगी। इस मौके पर आईएएस (ट्रेनी) इमरान, कार्यकारी एसडीएम प्रशांत कुमार, बीडीपीओ वेदपाल सिंह, तहसीलदार नौरंग दास, नायब तहसीलदार जगदीश चंद्र, संजय चौधरी मौजूद थे।
गांव को एक लाख ब्लॉक को मिलेगा पांच लाख का ईनाम
सुखविंद्र सिंह ने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत जो गांव खुले में शौच मुक्त होगा सरकार उसे एक लाख रुपये का पुरस्कार देगी। ब्लाक को पांच लाख रुपये का पुरस्कार मिलेगा। उन्होंने कहा कि अंतर जिला टीम निरीक्षण पर आ रही है। टीम एक गांव में 40 से 50 घरों में जाकर टॉयलेट होने बारे साक्ष्य जुटाएगी। इसके अतिरिक्त यही देखेगी कि गांव में कोई व्यक्ति खुले में शौच तो नहीं जाता, साथ में मानव मल संबंधी जांच करेगी। उन्होंने कहा कि अगर हम जीते तो अभियान के तहत कार्य करने वाले प्रत्येक व्यक्ति को बड़ा समारोह करके सम्मानित किया जाएगा।
औढ़ां तथा डबवाली में दौड़
गांवों को खुले में शौच मुक्त करने के मामले में डबवाली पहले नंबर पर चल रहा है। जिसके 10 गांव खुले में शौच मुक्त हो चुके हैं। शेष 38 गांवों पर टीम सर्वे करके रिपोर्ट देगी। उधर औढ़ां के तहत आने वाले कुल 35 गांवों में से 12 खुले में शौच मुक्त हो चुके हैं, जबकि 25 का निरीक्षण करके टीम अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को भेजेगी। इसके बाद स्टेट, फिर केंद्र सरकार की टीम उपरोक्त गांवों का निरीक्षण करने पहुंचेगी।
इसे सामाजिक सरोकार समझें
डीडीपीओ प्रितपाल ने कहा कि अपने गांव को खुले में शौच मुक्त करने के लिए पंचायतें आगे आएं। इसे सरकारी फरमान नहीं, बल्कि सामाजिक सरोकार मानकर चलें। हमारा देश 1989 में स्वच्छता को पहचान चुका था। लेकिन हम लोगों की सोच जुदा थी। उस समय कार्यक्रम को सीआरएसपी का नाम दिया गया था। 1999 में नाम बदलकर संपूर्ण स्वच्छता अभियान हो गया। 2003 में निर्मल ग्राम पुरस्कार की शुरूआत हुई। 2012 तक चली चला। 2 अक्तूबर 2014 को पीएम नरेंद्र मोदी ने स्वच्छ भारत मिशन की शुरुआत की। हालांकि हमारे देश में इस मुहिम की शुरुआत 1916 में महात्मा गांधी ने की थी।
सीएम को सिरसा पर भरोसा है
इस मौके पर डीडीपीओ ने कहा कि सीएम मनोहर लाल खट्टर का कहना है पहले नंबर पर चल रहा जिला सिरसा पुरस्कार प्राप्त करेगा। सीएम के अनुसार सिरसा के लोग संस्कारी हैं। गंदगी पसंद नहीं करते। डीडीपीओ के अनुसार बांग्लादेश जैसा मुल्क भी पूर्णत: खुले में शौच मुक्त है। ऐसे में जिले के लोगों के लिए परीक्षा की घड़ी है। अब इज्जत और बेइज्जती का सवाल है।
पुलिसकर्मी करेंगे मॉनीटरिंग
स्वच्छ भारत मिशन की कमान पुलिस के हाथों में होगी। पुलिसकर्मी गांव के पचास घरों में जाकर देखेंगे कि शौचालय बना है या नहीं। इसकी रिपोर्ट अधिकारियों को देंगे। यहीं नहीं पुलिस वाले खुले में शौच जाने वालों को भी समझाएंगे।
-सुखविंद्र सिंह, जिला कोऑर्डिनेटर, स्वच्छ भारत मिशन, सिरसा