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पांच माह से बच्चों और गर्भवती महिलाओं को नहीं मिल रहा राशन

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 02 Feb 2022 11:48 PM IST
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Children and pregnant women are not getting ration for five months
धरने के दौरान प्रदर्शन करती आंगनबाड़ी कार्यकर्ताएं व हेल्पर्स। - फोटो : Sirsa
सिरसा। वेतन बढ़ाने और नियमित करने की मांग को लेकर करीब दो महीने से हड़ताल पर चल रही आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने राशन लेने से इनकार कर दिया है। जबकि इससे पहले तीन माह तक विभाग की ओर से राशन नहीं आया। ऐसे में पांच माह से सरकार के पोषण अभियान को झटका लगा है। जिले के 56 हजार बच्चों और गर्भवती महिलाओं को पोषणयुक्त राशन नहीं मिल रहा। महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी कोई वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं कर पा रहे हैं।
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आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व हेल्पर्स पिछले दो महीने से धरने पर हैं। जिसके चलते जिले की लगभग आंगनबाड़ी केंद्रों पर ताले लटके पड़े है। वहीं कार्यकर्ताओं द्वारा किए जा रहे सभी कार्य प्रभावित हो रहे हैं। वहीं विभाग के पास धरनारत कार्यकर्ताओं के विकल्प में अन्य कोई कार्यकर्ता मौजूद नहीं है जो कार्य को पूरा कर सके। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा घर-घर जाकर गर्भवती महिलाओं और बच्चों को पोषण आहार वितरित किया जाता है। लेकिन पिछले 2 महीने से कार्यकर्ताओं के धरने पर होने के कारण बच्चों को पोषण आहार पिछले 5 महीनों से नहीं मिल पा रहा है। क्योंकि पिछले तीन महीनों से केंद्रों पर विभाग की तरफ से राशन आ ही नहीं रहा था। अब केंद्रों पर राशन तो है लेकिन बच्चों व गर्भवती महिलाओं बांटा नहीं जा रहा। वहीं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा हर माह विभिन्न प्रकार के सर्वे किए जाते हैं। लेकिन कार्यकर्ताओं द्वारा धरने पर होने के कारण यह कार्य भी नहीं किया जा रहा है।
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जिले के 56 हजार लाभार्थियों को नहीं मिल रहा राशन
जिले भर में करीब 800 आंगनबाड़ी केंद्र हैं जो इस समय बंद पड़े हैं। प्रत्यके केंद्र से 70 से 80 लाभार्थी लाभ लेते हैं। जिसमें छोटे बच्चे व गर्भवती महिलाएं शामिल है। आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से कार्यकर्ता गर्भवती महिला को गर्भधारण के दौरान पोषण युक्त पंजीरी देतीं हैं। वहीं छोटे बच्चों को पोषण-आहार वितरित किया जाता है। प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र से बच्चों व गर्भवती महिलाओं को मिलाकर 80 को राशन दिया जाता है। लेकिन इस समय जिले के 56 हजार लाभार्थियों को नुकसान पहुंच रहा है। इन जरूरतमंदों को पिछले 5 महीनों से सूखा राशन नहीं मिला है।
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एक आंगनबाड़ी केंद्र की प्रति माह 2 क्विंटल 40 हजार किलो के राशन की होती है खपत
आंगनबाड़ी केंद्रों पर प्रति माह राशन की सप्लाई की जाती है। एक आंगनबाड़ी केंद्र पर 50 से 60 के बीच में बच्चे होते है। वहीं गर्भवती महिलाएं व छोटे बच्चों को दूध पिलाने वाली महिलाएं भी होती हैं। औसतन एक बच्चे को 100 ग्राम की डाइट प्रतिदिन कार्यकर्ता को देनी होती है। जिसके हिसाब से प्रतिदिन 8 किलो के हिसाब से आंगनबाड़ी केंद्र में राशन की खपत होती है। वहीं इसी हिसाब से प्रति माह एक आंगनबाड़ी केंद्र पर 2 क्विंटल 40 किलो राशन की खपत होती है। वहीं एक महीने में 800 आंगनबाड़ी केंद्रों पर 2 हजार क्विंटल की खपत होगी। लेकिन इसकी विभाग के पास कोई जानकारी नहीं है कि ये राशन इस वक्त कहां है। वहीं इस राशन के अलावा बच्चों को दूध के पैकेट भी अतिरिक्त दिए जाते हैं। इन पैकेट्स का भी विभाग को कोई अता पता नहीं है।

हम पिछले दो महीने से धरने पर है। केंद्रों को ताले जड़कर लघु सचिवालय में धरना प्रदर्शन कर रही हैं। आंगनबाड़ी केंद्र बंद होने के कारण हमने राशन की सप्लाई नहीं ली है। जब तक हमारी मांगे नहीं मानी जाती तब तक केंद्रों को नहीं खोला जाएगा।
-शकुंतला जगलान, जिला कार्यकारी प्रधान, आंगनबाड़ी व हेल्पर्स यूनियन सिरसा।
मुझे इस मामले की कोई जानकारी नहीं है। हमारे पास वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं है। ऐसे में राशन कैसे पहुंचाएं।
-डॉ. दर्शना सिंह, जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग सिरसा।
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