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सीडीएलयू : दाखिला नियम को लेकर हुई वार्ता, अब मंथन के बाद फैसला करेगी यूनिवर्सिटी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 14 Jul 2022 11:21 PM IST
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CDLU: Talks on admission rules, now university will decide after brainstorming
सीडीएलयू में प्रो. एसके गहलावत को मांग पत्र सौंपते संयुक्त मोर्चा के विद्यार्थी। - फोटो : Sirsa
संवाद न्यूज एजेंसी
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सिरसा। चौधरी देवीलाल यूनिवर्सिटी की ओर से पास आउट विद्यार्थियों के लिए फिर से नियमित दाखिला नियम को लेकर फैसले के खिलाफ वीरवार को भी संयुक्त मोर्चा एक्टिव रहा। संयुक्त मोर्चा के छात्र नेताओं की डीन ऑफ एकेडमिक के साथ बैठक हुई। इस दौरान मांगों संबंधी सुझाव पत्र भी सौंपा गया। अब सीडीएलयू प्रशासन मंथन करेगा और फैसला करेगा कि क्या किया जाए।
सीडीएलयू ने फैसला किया है कि पासआउट विद्यार्थी जो 28 की आयु पूरी कर लेगा उसे दोबारा नियमित दाखिला नहीं मिलेगा। फैसले के विरोध में संयुक्त मोर्चा का गठन किया गया और इसमें करीब पांच छात्र संगठन शामिल हुए। दो दिन के दौरान विरोध प्रदर्शन हुए। वीरवार को सीडीएलयू प्रशासन ने बातचीत के लिए विद्यार्थियों को बुलाया। वीरवार को डीन ऑफ एकेडमिक प्रो. एसके गहलावत के साथ बैठक हुई। इस दौरान बैठक में रेखा रानी, हर्ष नड्डा, मोनिका गोदारा, नवनीत, शेखावत, विद्यार्थी रंजीत कुमार, चंद्रशेखर आजाद, विजय अरोड़ा, राकेश कुमार, पंकज शर्मा, प्रवीण जस्सा, गुरप्रीत, हरप्रीत, संदीप बराड़, अवतार सिंह, जगजीत सिंह उपस्थित रहे।
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सीडीएलयू प्रशासन को विद्यार्थियों ने सुझाव पत्र भी सौंपा
बैठक में छात्र नेताओं डॉ. रेखा रानी, सुमित कुमार, हर्ष नड्ढा ने कहा कि सीडीएलयू का यह फैसला विद्यार्थी हित में नहीं है। उन्होंने मांग की कि इस शर्त को हटाया जाए। विश्वविद्यालय में एमए में दाखिला लेने की उम्र 28 की न रखी जाए और इसे बढ़ाया जाए। जितने भी भाषायी कोर्स हैं, उनमें दाखिला के लिए तय उम्र सीमा पूरी तरह से हटाई जाए। इसके अलावा महिलाओं के लिए दाखिला उम्र सीमा पूर्णतया समाप्त की जाए। इस दौरान अधिकारियों ने कहा कि यह फैसला विद्यार्थियों के हित में है। इससे विद्यार्थियों का भविष्य सुधरेगा। संयुक्त छात्र मोर्चा ने अपने कुछ और बिंदू भी रखे।
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रिव्यू करेंगे और उसके बाद लेंगे फैसला : प्रो. गहलावत
विद्यार्थियों का प्रतिनिधि मंडल बातचीत करने के लिए आया था। सुझाव पत्र देकर गए हैं। अब इसका रिव्यू किया जाएगा। इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन फैसला करेगा कि कमेटी बनाई जाए या शैक्षणिक परिषद के पास भेजा जाए। क्योंकि पहले फैसला शैक्षणिक परिषद का है। विचार मंथन के बाद निर्णय लिया जाएगा। -प्रो. एसके गहलावत, डीन ऑफ एकेडमिक, सीडीएलयू।
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