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सीडीएलयू में किसानी झंडा ले जाने की अनुमति के लिए किसानों और कुलपति में हुई बहसबाजी
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सीडीएलयू में वाहनों पर लगे किसानी झंडे को अनुमति देने की मांग को लेकर किसान नेता कुलपति को मांग पत्र सौंपने पहुंचे। लेकिन कुलपति ने किसानों की इस मांग को मानने से साफ इंकार कर दिया। इसके चलते किसानों और कुलपति ने बहस हो गई। इसके बाद किसानों ने रोष प्रकट करते हुए कहा कि वे छात्र संगठनों के साथ मिलकर रणनीति बनाएंगे।
शुक्रवार को दोपहर के समय किसान नेता लखविंद्र सिंह ओलख, गुरप्रीत सिंह, मैक्स साहुवाला और अन्य किसान नेता सीडीएलयू के गेट पर मांग पत्र देने के लिए पहुंचे। सीडीएलयू के सुरक्षा कर्मियों ने किसानों को गेट पर ही रोक लिया और कुलपति को इस संबंधित सूचना दी। इसके पश्चात कुलपति प्रो. अजमेर सिंह मलिक, रजिस्ट्रार राकेश वधवा और अन्य अधिकारी किसानों से बातचीत करने के लिए पहुंचे।
किसान नेता लखविंद्र सिंह ओलख ने कहा कि विश्वविद्यालय में पार्टियों के झंडे को एंट्री दी जाती है लेकिन छात्रों के वाहन पर लगा किसान एकता के झंडे को बाहर ही उतरवा दिया जाता है। इसकी अनुमति लेने के लिए वे मांग पत्र सौंपने पहुंचे हैं। वहीं, कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय शिक्षण संस्थान है। यहां पर राजनीति की बजाए शिक्षा प्राप्त करवाई जाती है। इसके कारण किसी भी वाहन पर लगे कोई भी झंडे को एंट्री देने की अनुमति नहीं दे सकते।
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शुक्रवार को दोपहर के समय किसान नेता लखविंद्र सिंह ओलख, गुरप्रीत सिंह, मैक्स साहुवाला और अन्य किसान नेता सीडीएलयू के गेट पर मांग पत्र देने के लिए पहुंचे। सीडीएलयू के सुरक्षा कर्मियों ने किसानों को गेट पर ही रोक लिया और कुलपति को इस संबंधित सूचना दी। इसके पश्चात कुलपति प्रो. अजमेर सिंह मलिक, रजिस्ट्रार राकेश वधवा और अन्य अधिकारी किसानों से बातचीत करने के लिए पहुंचे।
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किसान नेता लखविंद्र सिंह ओलख ने कहा कि विश्वविद्यालय में पार्टियों के झंडे को एंट्री दी जाती है लेकिन छात्रों के वाहन पर लगा किसान एकता के झंडे को बाहर ही उतरवा दिया जाता है। इसकी अनुमति लेने के लिए वे मांग पत्र सौंपने पहुंचे हैं। वहीं, कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय शिक्षण संस्थान है। यहां पर राजनीति की बजाए शिक्षा प्राप्त करवाई जाती है। इसके कारण किसी भी वाहन पर लगे कोई भी झंडे को एंट्री देने की अनुमति नहीं दे सकते।
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