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Sirsa News: नहरबंदी से किसानों पर दोहरी मार, ट्यूबवेल के पानी से बीज नहीं हो पा रहे अंकुरित

Sun, 27 Apr 2025 11:24 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा Updated Sun, 27 Apr 2025 11:24 PM IST
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Canal closure has doubled the farmers' chances, seeds are not able to germinate with tubewell water
 गांव नुहियांवाली में दोबारा बीज डालकर सिंचाई करते किसान।
संवाद न्यूज एजेंसी
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ओढां। 25 मार्च से हुई नहरबंदी किसानों के लिए दोहरी समस्या बन चुकी है। उम्मीद थी कि 21 अप्रैल तक नहरों में पानी आ जाएगा, लेकिन पानी न आने के कारण किसानों का बिजाई कार्य बुरी तरह प्रभावित हो गया है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, 20 मई तक नहरों में पानी नहीं आएगा। ऐसे में किसानों की परेशानियां और बढ़ सकती हैं।

नहरी पानी के अभाव में किसान अब पूरी तरह से ट्यूबवेल के पानी पर निर्भर हो गए हैं। हालांकि, 26 अप्रैल को जिले की 119 नहरों में एक सप्ताह के लिए पानी छोड़ा गया है, लेकिन यह पानी सिंचाई के लिए नहीं, बल्कि केवल जल घरों के लिए है। बताया जा रहा है कि पंजाब ने नंगल डेम से हरियाणा को 85 हजार क्यूसेक के बजाय 45 हजार क्यूसेक पानी दिया है, जिसके चलते हरियाणा सरकार ने नरवाना ब्रांच के पानी को सिरसा की नहरों में डायवर्ट करने का निर्णय लिया है। इसी कारण 26 अप्रैल को जिले की नहरों में पानी की आपूर्ति केवल पेयजल के लिए की जाएगी, जो एक सप्ताह ही जारी रहेगा।
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ट्यूबवेलों के पानी से नहीं मिल रही सफलता

नहरी पानी के अभाव में किसानों के पास ट्यूबवेल ही एकमात्र विकल्प बचा है। हालांकि, ट्यूबवेल का पानी खारा और शोरायुक्त होने के कारण बीज अंकुरित नहीं हो पा रहे हैं और अगर अंकुरण होता भी है, तो पौधे झुलसकर नष्ट हो जाते हैं। गांव नुहियांवाली के किसान जसराज सहारण, जगदीश सहारण, कालू राम, रणवीर, आशाराम नेहरा और बलदेव सिंह ने बताया कि कई बार बीज डाले जाने के बावजूद भी यही स्थिति बनी हुई है। किसान जसराज ने बताया कि उसने बिजाई के समय करीब 2,000 रुपये का नरमे का बीज डाला था। जैसे-तैसे बीज अंकुरित हुआ, लेकिन भूमि से बाहर आते ही पौधे झुलस गए। ऐसे में अगर फिर से बिजाई करते हैं, तो बीज और बुआई-बिजाई का खर्च दोबारा होगा। जसराज ने बताया कि उसने 4 एकड़ में ट्यूबवेल के पानी से नरमे की बिजाई की थी, जिसमें से केवल 30 प्रतिशत बीज ही अंकुरित हो पाया है। उसने मजबूरन फिर से 2,600 रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से बीज डाला है, लेकिन उसे उम्मीद नहीं है कि वह अंकुरित होगा या नहीं। किसानों का कहना है कि अगर नहरों में पानी नहीं आता, तो खरीफ की फसल में तिहरी मार झेलनी पड़ेगी। वर्तमान में, पानी की कमी के कारण करीब 30 प्रतिशत किसानों ने ही बिजाई की है।
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मिट्टी को कठोर और क्षारीय बनाता है ट्यूबवेल का पानी :-

नहरी पानी भूमि को प्राकृतिक पोषक तत्व प्रदान कर फसलों की पैदावार बढ़ाता है, जबकि ट्यूबवेल का पानी मिट्टी को कठोर और क्षारीय बना देता है, जिससे पौधों का विकास प्रभावित होता है। इसके अलावा, ट्यूबवेल का पानी खेत में खरपतवारों की अधिकता को बढ़ावा देता है और मिट्टी में पीएच स्तर भी बढ़ जाता है। हालांकि, किसान इस समस्या से भली-भांति परिचित हैं, लेकिन नहरों के बंद होने के कारण उनके पास कोई और विकल्प नहीं है।
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