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Sirsa News: गांव गंगा में काले हिरण की मौत, कुत्तों ने बनाया शिकार
Sun, 27 Apr 2025 11:22 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Sun, 27 Apr 2025 11:22 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। गांव गंगा से लंबी रोड पर काला हिरण मृत अवस्था में पाया गया। भूख, प्यास के कारण हिरण कमजोर हो चुका था। इस कारण कुत्तों ने उसे अपना शिकार बना लिया। इस घटना पर वन्यजीव प्रेमियों ने रोष जताया।
जिले के लोगों में वन्यजीवों के लिए विशेष प्रेम देखने के लिए मिलता है। खेतों में नील गाय, काला हिरण, चिंकारा सहित कई वन्यजीव नजर आते हैं। एक माह की नहरबंदी और गेहूं कटाई का सीजन होने के कारण वन्यजीवों के लिए कष्टदायी रहा है। नहर, जोहड़ पूरी तरह से सूख गए। गेहूं की कटाई के कारण खालों में भी पानी नहीं चला तो वन्यजीवों की जान पर बन आई।
वन्यजीव प्रेमी चंद्रमोहन ने बताया कि गांव गंगा और आसपास के क्षेत्रों में पशुओं समेत वन्यजीवों के लिए पानी की व्यवस्था की गई है। सोलर नलकूप चलाकर खालों और खुली जगहों में पानी भरवाए जा रहे हैं।
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उन्होंने बताया कि जिले में नील गाय और हिरण की अच्छी खासी संख्या है। संरक्षित पशु होने के कारण इनको मारना प्रतिबंधित है। इन्हें मारने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। पूर्व में भी जीव रक्षक दल और जीव प्रेमियों के हस्तक्षेप के बाद पुलिस ने 10 से ज्यादा लोगों को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया था।
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सिरसा। गांव गंगा से लंबी रोड पर काला हिरण मृत अवस्था में पाया गया। भूख, प्यास के कारण हिरण कमजोर हो चुका था। इस कारण कुत्तों ने उसे अपना शिकार बना लिया। इस घटना पर वन्यजीव प्रेमियों ने रोष जताया।
जिले के लोगों में वन्यजीवों के लिए विशेष प्रेम देखने के लिए मिलता है। खेतों में नील गाय, काला हिरण, चिंकारा सहित कई वन्यजीव नजर आते हैं। एक माह की नहरबंदी और गेहूं कटाई का सीजन होने के कारण वन्यजीवों के लिए कष्टदायी रहा है। नहर, जोहड़ पूरी तरह से सूख गए। गेहूं की कटाई के कारण खालों में भी पानी नहीं चला तो वन्यजीवों की जान पर बन आई।
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वन्यजीव प्रेमी चंद्रमोहन ने बताया कि गांव गंगा और आसपास के क्षेत्रों में पशुओं समेत वन्यजीवों के लिए पानी की व्यवस्था की गई है। सोलर नलकूप चलाकर खालों और खुली जगहों में पानी भरवाए जा रहे हैं।
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उन्होंने बताया कि जिले में नील गाय और हिरण की अच्छी खासी संख्या है। संरक्षित पशु होने के कारण इनको मारना प्रतिबंधित है। इन्हें मारने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। पूर्व में भी जीव रक्षक दल और जीव प्रेमियों के हस्तक्षेप के बाद पुलिस ने 10 से ज्यादा लोगों को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया था।