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Sirsa News: नागरिक अस्पताल में जन्म प्रमाण पत्र के फर्जीवाड़े का खुलासा, दो साल बाद एफआईआर दर्ज
Wed, 23 Apr 2025 11:34 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Wed, 23 Apr 2025 11:34 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा/ डिंग। नागरिक अस्पताल में जन्म प्रमाण बनाने में फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। डिंग मंडी के मनप्रीत सिंह नामक युवक का जन्म प्रमाण पत्र बनाने के लिए आवेदन कर दिया गया था। जब इसकी जांच की गई तो आवेदनपत्र व शपथपत्र दोनों ही फर्जी मिले। दो साल बाद डिंग थाना पुलिस ने दो सान बाद रजिस्ट्रार जन्म-मृत्यु-सह-सिविल सर्जन सिरसा की शिकायत अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अब पुलिस मामले की जांच कर रही है कि आखिरकार यह आवेदन किस व्यक्ति ने दायर किया था।
रजिस्ट्रार जन्म-मृत्यु-सह-सिविल सर्जन ने शिकायत में बताया गया कि उनके कार्यालय में मनप्रीत सिंह पुत्र मुख्तयार सिंह निवासी गांव पतली डाबर की विलंबित जन्म प्रमाण पत्र के लिए 20 नवंबर 2023 में फाइल दाखिल की गई थी। इसे जन्म-मृत्यु अधिनियम 2002 की धारा 9 (3) के तहत स्वीकृति के लिए उपायुक्त कार्यालय को भेजा गया। उपायुक्त कार्यालय से उक्त फाइल को पड़ताल के लिए तहसीलदार सिरसा को भेजा गया।
जांच के दौरान मुख्तयार सिंह पुत्र सुच्चा सिंह निवासी पतली डाबर ने बयान दर्ज करवाए कि मनप्रीत उसका बेटा है। उसने मनप्रीत के जन्म प्रमाणपत्र के लिए कोई आवेदन नहीं किया है। आवेदनपत्र व शपथपत्र दोनों ही फर्जी है। मामले में जन्म प्रमाण पत्र की फर्जी फाइल उनके कार्यालय में दाखिल की गई। यह स्पष्ट नहीं किया जा सकता कि उक्त आवेदन किसके द्वारा किया गया। डिंग पुलिस ने जिला रजिस्ट्रार जन्म-मृत्यु सह सिविल सर्जन सिरसा की शिकायत पर अज्ञात के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 406, 467, 468, 471 के तहत मामला दर्जकर जांच शुरू कर दी है।
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विदेश में रहता है मनप्रीत, पिता कर चुका है बेदखल
पुलिस की जांच में सामने आया है कि मनप्रीत शादीशुदा है और विदेश में रहता है। उसके पिता और उसकी नहीं बनती है। इसलिए पिता ने उसे बेदखल किया हुआ है। हालांकि मनप्रीत की पत्नी व बच्चे गांव में ही रहते हैं। ऐसे में मनप्रीत और उसके पिता के साइन किसने किए और आवेदन कहां से करवाया गया है। यह जांच का विषय है। इसकी जांच की जा रही है।
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विदेश में जन्म प्रमाण पत्र होती है जरूर
विदेशों में पिछले कुछ वर्षों से जन्म प्रमाण पत्र की मांग की जाती है। 10 साल से ज्यादा समय से रह रहे लोगों से भी जन्म प्रमाण पत्र की मांग पूर्व में सामने आई थी। इसलिए विदेश में रहने वाले लोग अपने करीबियों और दूसरे साथियों के माध्यम से आवेदन करवाते है। उनके साथ भी दूसरे लोग या परिवार के लोग ही करते है। बाकी दस्तावेजों को सत्यापन का कार्य सरपंच व अन्य लोग कर देते है और ऑन लाइन आवेदन हो जाता है।
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ऑनलाइन आवेदन करने वाले लेते हैं गारंटी
नगर परिषद कार्यालय हो या सिविल अस्पताल। दोनों ही जगह जन्म एवं मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करवाने के कार्य के लिए दलाल सक्रिय हैं। इनकी विभागीय अधिकारियों से सांठगांठ है। दलालों क ओर से कर्मचारियों को दी जाने वाले सुविधा शुल्क की मांग की जाती है और काम करवा दिया जाता है। कर्मचारियों की ओर से सीधे जाने पर तरह-तरह की खामियां निकाल दी जाती है, जबकि दलालों के माध्यम से काम आसानी से हो जाता है।
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कोट्स
मामले की जांच में मनप्रीत के पिता मुख्यतार सिंह ने अपने साइन होने से इनकार किया था। इतना ही नहीं, उसने बताया था कि मनप्रीत विदेश में रहता है। उसके साइन भी फर्जी है। इसके बाद इस मामले में एफआईआर दर्ज की गई है। मामले की जांच की जा रही है कि आखिरकार यह आवेदन किस व्यक्ति द्वारा दायर किया गया था। उसका दायर करने का मकसद क्या था। -भीम सिंह, जांच अधिकारी, डिंग थाना।
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सिरसा/ डिंग। नागरिक अस्पताल में जन्म प्रमाण बनाने में फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। डिंग मंडी के मनप्रीत सिंह नामक युवक का जन्म प्रमाण पत्र बनाने के लिए आवेदन कर दिया गया था। जब इसकी जांच की गई तो आवेदनपत्र व शपथपत्र दोनों ही फर्जी मिले। दो साल बाद डिंग थाना पुलिस ने दो सान बाद रजिस्ट्रार जन्म-मृत्यु-सह-सिविल सर्जन सिरसा की शिकायत अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अब पुलिस मामले की जांच कर रही है कि आखिरकार यह आवेदन किस व्यक्ति ने दायर किया था।
रजिस्ट्रार जन्म-मृत्यु-सह-सिविल सर्जन ने शिकायत में बताया गया कि उनके कार्यालय में मनप्रीत सिंह पुत्र मुख्तयार सिंह निवासी गांव पतली डाबर की विलंबित जन्म प्रमाण पत्र के लिए 20 नवंबर 2023 में फाइल दाखिल की गई थी। इसे जन्म-मृत्यु अधिनियम 2002 की धारा 9 (3) के तहत स्वीकृति के लिए उपायुक्त कार्यालय को भेजा गया। उपायुक्त कार्यालय से उक्त फाइल को पड़ताल के लिए तहसीलदार सिरसा को भेजा गया।
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जांच के दौरान मुख्तयार सिंह पुत्र सुच्चा सिंह निवासी पतली डाबर ने बयान दर्ज करवाए कि मनप्रीत उसका बेटा है। उसने मनप्रीत के जन्म प्रमाणपत्र के लिए कोई आवेदन नहीं किया है। आवेदनपत्र व शपथपत्र दोनों ही फर्जी है। मामले में जन्म प्रमाण पत्र की फर्जी फाइल उनके कार्यालय में दाखिल की गई। यह स्पष्ट नहीं किया जा सकता कि उक्त आवेदन किसके द्वारा किया गया। डिंग पुलिस ने जिला रजिस्ट्रार जन्म-मृत्यु सह सिविल सर्जन सिरसा की शिकायत पर अज्ञात के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 406, 467, 468, 471 के तहत मामला दर्जकर जांच शुरू कर दी है।
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विदेश में रहता है मनप्रीत, पिता कर चुका है बेदखल
पुलिस की जांच में सामने आया है कि मनप्रीत शादीशुदा है और विदेश में रहता है। उसके पिता और उसकी नहीं बनती है। इसलिए पिता ने उसे बेदखल किया हुआ है। हालांकि मनप्रीत की पत्नी व बच्चे गांव में ही रहते हैं। ऐसे में मनप्रीत और उसके पिता के साइन किसने किए और आवेदन कहां से करवाया गया है। यह जांच का विषय है। इसकी जांच की जा रही है।
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विदेश में जन्म प्रमाण पत्र होती है जरूर
विदेशों में पिछले कुछ वर्षों से जन्म प्रमाण पत्र की मांग की जाती है। 10 साल से ज्यादा समय से रह रहे लोगों से भी जन्म प्रमाण पत्र की मांग पूर्व में सामने आई थी। इसलिए विदेश में रहने वाले लोग अपने करीबियों और दूसरे साथियों के माध्यम से आवेदन करवाते है। उनके साथ भी दूसरे लोग या परिवार के लोग ही करते है। बाकी दस्तावेजों को सत्यापन का कार्य सरपंच व अन्य लोग कर देते है और ऑन लाइन आवेदन हो जाता है।
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ऑनलाइन आवेदन करने वाले लेते हैं गारंटी
नगर परिषद कार्यालय हो या सिविल अस्पताल। दोनों ही जगह जन्म एवं मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करवाने के कार्य के लिए दलाल सक्रिय हैं। इनकी विभागीय अधिकारियों से सांठगांठ है। दलालों क ओर से कर्मचारियों को दी जाने वाले सुविधा शुल्क की मांग की जाती है और काम करवा दिया जाता है। कर्मचारियों की ओर से सीधे जाने पर तरह-तरह की खामियां निकाल दी जाती है, जबकि दलालों के माध्यम से काम आसानी से हो जाता है।
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कोट्स
मामले की जांच में मनप्रीत के पिता मुख्यतार सिंह ने अपने साइन होने से इनकार किया था। इतना ही नहीं, उसने बताया था कि मनप्रीत विदेश में रहता है। उसके साइन भी फर्जी है। इसके बाद इस मामले में एफआईआर दर्ज की गई है। मामले की जांच की जा रही है कि आखिरकार यह आवेदन किस व्यक्ति द्वारा दायर किया गया था। उसका दायर करने का मकसद क्या था। -भीम सिंह, जांच अधिकारी, डिंग थाना।