{"_id":"6650f10b4191da9fcc0adf55","slug":"begu-village-yearning-for-clean-water-sirsa-news-c-128-1-sir1003-120203-2024-05-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sirsa News: पीने के साफ पानी के लिए तरस रहा जिले के बड़े गांवों में शुमार गांव बेगू","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sirsa News: पीने के साफ पानी के लिए तरस रहा जिले के बड़े गांवों में शुमार गांव बेगू
Sat, 25 May 2024 01:26 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Sat, 25 May 2024 01:26 AM IST
विज्ञापन
गांव बेगू के वाटर वर्क्स में पड़ी गंदगी और जमी काई।
सिरसा। हलके के सबसे बड़े गांवों में शुमार गांव बेगू के ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल की सालों से दरकार है। ग्रामीणों को आज तक नहरी पानी नहीं मिला है और नलकूप का पानी ग्रामीणों की सेहत बिगाड़ रहा है। यही नहीं गांव में नशे का प्रचलन काफी बढ़ गया है। ग्रामीणों के अनुसार, युवा जागरुकता के अभाव में नशे की तरफ आकर्षित हो रहे हैं।
गांव बेगू के लोगों में इन मुद्दों को लेकर सभी सरकारों के खिलाफ काफी टीस दिखाई देती है। करीब 22 हजार की आबादी व 7 हजार मतदाता वाले गांव बेगू के लोग बताते हैं कि 10 साल से भाजपा की सरकार रही है। इससे पहले कांग्रेस की सरकार थी, लेकिन किसी ने भी उनके गांव के सुध नहीं ली है। हलके का बड़ा गांव होने के बावजूद भी यहां पर सुविधाओं की खासी कमी है। सबसे बड़ी समस्या स्वच्छ पेयजल की है। ट्यूबवेल का पानी घरों में आता है, जिसमें भारी मात्रा में शोरा जमा होता है। इस पानी के सेवन के कारण लोग बीमार हो रहे हैं। सबसे ज्यादा हडि्डयों की बीमारी बढ़ रही है।
ग्रामीणों ने कई बार प्रशासन से इसके लिए गुहार लगाई गई है, लेकिन आज तक उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ। गांव के लोगों ने शेरावाली नहर से पीने के पानी की मांग की थी, लेकिन अभी तक यह कार्य भी नहीं किया गया है। गांव में करीब 25 साल पहले वाटर वर्क्स बनाया गया था और इसकी सफाई नहीं हुई है। जिस कारण इसमें गंदगी व काई जमी हुई है। गांव में प्रशासन ने जमीनों की रजिस्ट्री भी बंद कर दी थी। जिसको लेकर ग्रामीणों को हाईकोर्ट तक जाना पड़ा। कुछ दिन रजिस्ट्री खुली और बाद में फिर से बंद कर दिया गया। जब ग्रामीणों ने चुनाव बहिष्कार की चेतावनी दी तो फिर से रजिस्ट्री खोली गई। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में नशा सरेआम बिक रहा है और युवा पीढ़ी इसकी गर्त में आई हुई है। गांव में जिम या खेल स्टेडियम भी नहीं है।
विज्ञापन
कोट्स
हमारा गांव हलके के बड़े गांवों में शुमार है, लेकिन सुविधाओं के मामले में पिछड़ा हुआ है। किसी भी सरकार ने गांव की सही तरीके से सुध नहीं ली है। गांव के लोग ट्यूबवेल का शोरा युक्त पानी पीने को मजबूर हैं, जिससे वे बीमार हो रहे हैं।
-काला खट्टर, ग्रामीण, बेगू।
गांव में सबसे बड़ी समस्या नहरी पेयजल की है। कई बार अधिकारियों से इस बारे में मांग की जा चुकी है, लेकिन यह पूरी नहीं हो रही। यही नहीं खेतों में भी ट्यूबवेल के पानी से सिंचाई करनी पड़ रही है, जिस कारण जमीन भी खराब हो रही है।
-सोनू वर्मा, ग्रामीण, बेगू।
गांव में जमीन की रजिस्ट्री बंद थी। इसके लिए ग्रामीणों ने लंबी लड़ाई लड़ी और हाईकोर्ट तक गए। हाईकोर्ट के आदेशों पर रजिस्ट्री फिर से आरंभ हुई, लेकिन फिर बंद कर दी गई। जब चुनाव बहिष्कार की धमकी दी तो फिर से खोली गईं हैं।
गोल्डी बजाज, ग्रामीण, बेगू।
गांव बेगू में नशे की प्रवृति पूरे जिले में सबसे अधिक बनी हुई है। सरेआम यहां पर हेरोइन व अन्य नशा बिक रहा है। पुलिस इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रही। यह कहते हुए दुख होता है कि गांव के करीब 25 बच्चे नशे की ओवरडोज के कारण जान गंवा चुके हैं। गांव में जिम व खेल स्टेडियम भी नहीं है, अगर बन जाएं तो बच्चों का ध्यान खेलों की ओर जा सकता है।
-डॉ. हरिकृष्ण नड्ढ़ा, ग्रामीण बेगू।
विज्ञापन
गांव बेगू के लोगों में इन मुद्दों को लेकर सभी सरकारों के खिलाफ काफी टीस दिखाई देती है। करीब 22 हजार की आबादी व 7 हजार मतदाता वाले गांव बेगू के लोग बताते हैं कि 10 साल से भाजपा की सरकार रही है। इससे पहले कांग्रेस की सरकार थी, लेकिन किसी ने भी उनके गांव के सुध नहीं ली है। हलके का बड़ा गांव होने के बावजूद भी यहां पर सुविधाओं की खासी कमी है। सबसे बड़ी समस्या स्वच्छ पेयजल की है। ट्यूबवेल का पानी घरों में आता है, जिसमें भारी मात्रा में शोरा जमा होता है। इस पानी के सेवन के कारण लोग बीमार हो रहे हैं। सबसे ज्यादा हडि्डयों की बीमारी बढ़ रही है।
विज्ञापन
ग्रामीणों ने कई बार प्रशासन से इसके लिए गुहार लगाई गई है, लेकिन आज तक उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ। गांव के लोगों ने शेरावाली नहर से पीने के पानी की मांग की थी, लेकिन अभी तक यह कार्य भी नहीं किया गया है। गांव में करीब 25 साल पहले वाटर वर्क्स बनाया गया था और इसकी सफाई नहीं हुई है। जिस कारण इसमें गंदगी व काई जमी हुई है। गांव में प्रशासन ने जमीनों की रजिस्ट्री भी बंद कर दी थी। जिसको लेकर ग्रामीणों को हाईकोर्ट तक जाना पड़ा। कुछ दिन रजिस्ट्री खुली और बाद में फिर से बंद कर दिया गया। जब ग्रामीणों ने चुनाव बहिष्कार की चेतावनी दी तो फिर से रजिस्ट्री खोली गई। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में नशा सरेआम बिक रहा है और युवा पीढ़ी इसकी गर्त में आई हुई है। गांव में जिम या खेल स्टेडियम भी नहीं है।
विज्ञापन
कोट्स
हमारा गांव हलके के बड़े गांवों में शुमार है, लेकिन सुविधाओं के मामले में पिछड़ा हुआ है। किसी भी सरकार ने गांव की सही तरीके से सुध नहीं ली है। गांव के लोग ट्यूबवेल का शोरा युक्त पानी पीने को मजबूर हैं, जिससे वे बीमार हो रहे हैं।
-काला खट्टर, ग्रामीण, बेगू।
गांव में सबसे बड़ी समस्या नहरी पेयजल की है। कई बार अधिकारियों से इस बारे में मांग की जा चुकी है, लेकिन यह पूरी नहीं हो रही। यही नहीं खेतों में भी ट्यूबवेल के पानी से सिंचाई करनी पड़ रही है, जिस कारण जमीन भी खराब हो रही है।
-सोनू वर्मा, ग्रामीण, बेगू।
गांव में जमीन की रजिस्ट्री बंद थी। इसके लिए ग्रामीणों ने लंबी लड़ाई लड़ी और हाईकोर्ट तक गए। हाईकोर्ट के आदेशों पर रजिस्ट्री फिर से आरंभ हुई, लेकिन फिर बंद कर दी गई। जब चुनाव बहिष्कार की धमकी दी तो फिर से खोली गईं हैं।
गोल्डी बजाज, ग्रामीण, बेगू।
गांव बेगू में नशे की प्रवृति पूरे जिले में सबसे अधिक बनी हुई है। सरेआम यहां पर हेरोइन व अन्य नशा बिक रहा है। पुलिस इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रही। यह कहते हुए दुख होता है कि गांव के करीब 25 बच्चे नशे की ओवरडोज के कारण जान गंवा चुके हैं। गांव में जिम व खेल स्टेडियम भी नहीं है, अगर बन जाएं तो बच्चों का ध्यान खेलों की ओर जा सकता है।
-डॉ. हरिकृष्ण नड्ढ़ा, ग्रामीण बेगू।