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Sirsa News: अव्यवस्थाओं के खिलाफ बेलर एसोसिएशन ने खोला मोर्चा
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एसोसिएशन ने अव्यवस्थाओं के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। जिले में धान का रकबा निरंतर बढ़ता जा रहा है। ऐसे में बेलर की मांग भी दिन रात बढ़ रही है। बेलर एसोसिएशन ने काम करने के बाद भी बेहतर सुविधाएं नहीं मिलने पर एकत्रित होकर उपायुक्त शांतनु शर्मा को ज्ञापन सौंपा।
उन्होंने मांग की है कि बेलर संचालकों को उचित मूल्य उपलब्ध करवाने के साथ साथ फैक्टरी मालिकों से पैसा भी साथ साथ जारी करवाया जाए, ताकि बेलर मालिक पराली प्रबंधन का काम नियमित रूप से कर सके। मनिंद्र सिंह, नवदीप सिंह, निशात कुमार आदि ने बताया कि बेलर मालिकों को फील्ड में कई तरह की परेशानी आ रही है। इस पर प्रशासन कोई संज्ञान नहीं ले रहा है। पराली प्रबंधन का समय आने पर तेजी से प्रबंधन का कार्य किया जाता है। वहीं फैक्टरी मालिक किस्तों में पैसा देते है, पराली की गांठों का मूल्य भी निर्धारित नहीं है समेत कई तरह की दिक्कतें हैं।
ज्ञापन में ये रखीं गई मांगे
- पराली की गांठों का रेट 250 रुपये निर्धारित किया जाए। नमी की मात्रा सरकार की ओर से निर्धारित की जाए।
- 1200 रुपये प्रोत्साहन सरकार की ओर से दिया जा रहा है, वह बेलर मालिक के खाते में डाला जाए।
- बेलर पर जो अनुदान दिया जा रहा है वह पुराने रेट पर दिया जाता है। जबकि इस समय बेलर की कीमत बढ़ गई है। नए रेट के अनुरूप अनुदान दिया जाए।
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उन्होंने मांग की है कि बेलर संचालकों को उचित मूल्य उपलब्ध करवाने के साथ साथ फैक्टरी मालिकों से पैसा भी साथ साथ जारी करवाया जाए, ताकि बेलर मालिक पराली प्रबंधन का काम नियमित रूप से कर सके। मनिंद्र सिंह, नवदीप सिंह, निशात कुमार आदि ने बताया कि बेलर मालिकों को फील्ड में कई तरह की परेशानी आ रही है। इस पर प्रशासन कोई संज्ञान नहीं ले रहा है। पराली प्रबंधन का समय आने पर तेजी से प्रबंधन का कार्य किया जाता है। वहीं फैक्टरी मालिक किस्तों में पैसा देते है, पराली की गांठों का मूल्य भी निर्धारित नहीं है समेत कई तरह की दिक्कतें हैं।
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ज्ञापन में ये रखीं गई मांगे
- पराली की गांठों का रेट 250 रुपये निर्धारित किया जाए। नमी की मात्रा सरकार की ओर से निर्धारित की जाए।
- 1200 रुपये प्रोत्साहन सरकार की ओर से दिया जा रहा है, वह बेलर मालिक के खाते में डाला जाए।
- बेलर पर जो अनुदान दिया जा रहा है वह पुराने रेट पर दिया जाता है। जबकि इस समय बेलर की कीमत बढ़ गई है। नए रेट के अनुरूप अनुदान दिया जाए।