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Sirsa News: डीपफेक से निवेश के जाल में फंसने से बचें
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डबवाली। पुलिस अधीक्षक डबवाली निकिता खट्टर ने शेयर बाजार व अन्य प्लेटफाॅर्म पर पैसे निवेश करने वाले लोगों से डीपफेक तकनीक से सतर्कता बरतने की अपील की है। उन्होंने कहा कि साइबर जालसाज फेसबुक, इंस्टाग्राम और गूगल जैसे प्लेटफॉर्म पर प्रायोजित विज्ञापनों में डीपफेक तकनीक का इस्तेमाल कर लोगों को जालसाजी करने वाले व्हाट्सएप व टेलीग्राम समूहों में फंसा रहे हैं।
उन्हें गलत तरीके से अवैध निवेश प्लेटफाॅर्म को वैध निवेश प्लेटफॉर्म बता रहे हैं। ये समूह निवेश सलाह, स्टॉक टिप्स और यहां तक कि आईपीओ आवंटन का वादा भी करते हैं, उपयोगकर्ताओं को संस्थागत खाते खोलने और बैंक खातों में पैसा जमा करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। शुरुआती भुगतान का इस्तेमाल विश्वास हासिल करने के लिए किया जाता है, और बड़ी रकम जमा होने के बाद जालसाज गायब हो जाते हैं ।
बनाए जा रहे फर्जी चित्र और वीडियो
एसपी निकिता खट्टर ने बताया कि डीपफेक तकनीक का उपयोग धोखेबाजों की ओर से प्रमुख व्यक्तियों के फर्जी वीडियो और चित्र बनाने के लिए किया जा रहा है, ताकि लोगों का विश्वास जीता जा सकें। उन्हें धोखाधड़ी के जाल में फंसाया जा सके। साइबर अपराधी अक्सर उपयोगकर्ताओं को पैसे जमा कराने के लिए धोखा देने के लिए नकली ट्रेडिंग एप्लीकेशन के लिंक या एपीके फाइलें सांझा करते हैं। धोखेबाज लोग पैसे लेकर गायब होने से पहले सुरक्षा का झूठा अहसास पैदा करने के लिए शुरुआत में भुगतान करते हैं।
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ये सावधानी बरतना जरूरी
- व्हाट्सएप या टेलीग्राम पर निवेश समूहों को बढ़ावा देने वाले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर विज्ञापनों से सावधान रहें।
- किसी भी निवेश सलाहकार (आईए) से जुड़ने से पहले जांच लें कि क्या वे भारत में प्रतिभूति बाजार के नियामक प्राधिकरण सेबी के साथ पंजीकृत हैं ।
- अज्ञात संस्थाओं के साथ बैंक विवरण या लॉगिन क्रेडेंशियल साझा करने से बचें ।
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उन्हें गलत तरीके से अवैध निवेश प्लेटफाॅर्म को वैध निवेश प्लेटफॉर्म बता रहे हैं। ये समूह निवेश सलाह, स्टॉक टिप्स और यहां तक कि आईपीओ आवंटन का वादा भी करते हैं, उपयोगकर्ताओं को संस्थागत खाते खोलने और बैंक खातों में पैसा जमा करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। शुरुआती भुगतान का इस्तेमाल विश्वास हासिल करने के लिए किया जाता है, और बड़ी रकम जमा होने के बाद जालसाज गायब हो जाते हैं ।
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बनाए जा रहे फर्जी चित्र और वीडियो
एसपी निकिता खट्टर ने बताया कि डीपफेक तकनीक का उपयोग धोखेबाजों की ओर से प्रमुख व्यक्तियों के फर्जी वीडियो और चित्र बनाने के लिए किया जा रहा है, ताकि लोगों का विश्वास जीता जा सकें। उन्हें धोखाधड़ी के जाल में फंसाया जा सके। साइबर अपराधी अक्सर उपयोगकर्ताओं को पैसे जमा कराने के लिए धोखा देने के लिए नकली ट्रेडिंग एप्लीकेशन के लिंक या एपीके फाइलें सांझा करते हैं। धोखेबाज लोग पैसे लेकर गायब होने से पहले सुरक्षा का झूठा अहसास पैदा करने के लिए शुरुआत में भुगतान करते हैं।
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ये सावधानी बरतना जरूरी
- व्हाट्सएप या टेलीग्राम पर निवेश समूहों को बढ़ावा देने वाले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर विज्ञापनों से सावधान रहें।
- किसी भी निवेश सलाहकार (आईए) से जुड़ने से पहले जांच लें कि क्या वे भारत में प्रतिभूति बाजार के नियामक प्राधिकरण सेबी के साथ पंजीकृत हैं ।
- अज्ञात संस्थाओं के साथ बैंक विवरण या लॉगिन क्रेडेंशियल साझा करने से बचें ।