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यूक्रेन से अविश, सौरभ व योगेश तथा भंगू की रूप लौटी सकुशल स्वदेश

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 08 Mar 2022 12:14 AM IST
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Avish, Saurabh and Yogesh and Bhangu returned home safely from Ukraine
गांव भंगू में अपने परिजनों के साथ रूप। - फोटो : Sirsa
सिरसा, बडागुढ़ा। यूक्रेन रूस के बीच चल रहे युद्ध के चलते हालात काफी तनावपूर्ण है तथा वहां पर फंसे हुए भारतीय विद्यार्थियों के परिजनों की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही है। इसी बीच सोमवार को जिले के तीन छात्र व एक छात्रा यूक्रेन से सकुशल लौटकर आए हैं। जिले के अभी करीब आठ छात्र यूक्रेन व अन्य देशों में हैं।
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जिले के अविश अरोड़ा, सौरभ कंबोज तथा योगेश शर्मा तथा गांव भंगू की छात्रा रूप यूक्रेन से सिरसा पहुंच गए। इनके सकुशल पहुंचने पर परिजनों ने राहत की सांस ली है तो वहीं रिश्तेदारों व पड़ोसियों ने भी परिवार को बधाई दी। सिरसा के अविश अरोड़ा, सौरभ कंबोज व योगेश शर्मा यूक्रेन के खारकीव में रहकर पढ़ाई कर रहे थे। खारकीव से ये रोमानिया होते हुए भारत पहुंचे हैं। गांव भंगू की रूप ने बताया कि वह यूक्रेन के उजग्रो सिटी की यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही थी। जनवरी माह में ही रूस द्वारा आर्मी को बॉर्डर पर लगाए जाने के बाद चर्चा जरूर शुरू हो गई थी कि यूक्रेन और रूस में जंग छिड़ सकती है, लेकिन इतनी जल्दी स्थिति बिगड़ने की संभावना नहीं थी। रूप ने बताया कि वहां के स्थानीय लोगों व सरकार ने भी कहा था कि अकसर रूस-यूक्रेन में किसी न किसी मुद्दे को लेकर हलचल चलती रहती है। जिस तरह भारत पाकिस्तान में कई बार स्थिति तनावपूर्ण हो जाती है। उसी तरह अक्सर दोनों देशों में ऐसा माहौल होने के चलते सभी लोग निश्चित थे, लेकिन 24 फरवरी को 2 जगहों पर बमबारी किए जाने से एकदम लोगों में दहशत फैल गई। भारतीय दूतावास द्वारा भी पहले आगाह न किए जाने पर भारतीय छात्र निश्चित थे, लेकिन एकाएक स्थिति बिगड़ने के बाद यूक्रेन सरकार द्वारा इमरजेंसी लगाए जाने के बाद यूनिवर्सिटी के हॉस्टल में छात्र शिफ्ट हो गए। यूनिवर्सिटी प्रबंधन द्वारा अपने स्तर पर भारतीय दूतावास से संपर्क कर उन्होंने छात्रों को हंगरी बॉर्डर पर पहुंचाया। हालांकि उनकी सिटी में चाहे किसी तरह का खतरा देखने को नहीं मिला लेकिन फिर भी पुलिस के सायरन और अपने बचाव के लिए चेतावनी दी जाती थी। उसने बताया कि जैसे ही देश के हालात बिगड़े तो भारत सहित अन्य देशों के छात्र भी यूक्रेन छोड़कर अपने देश वापस लौटने लगे तो वहां के लोगों ने कहा कि आप तो यहां से चले जाओगे, लेकिन हमारा पता नहीं क्या होगा। यूक्रेन के लोगों को शायद ऐसा था कि अगर दूसरे देशों के छात्र यहां रहेंगे तो शायद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव बनने से युद्ध को रोका जा सकता है, लेकिन वहां से अपने देश जा रहे लोगों को देख यूक्रेन के लोगों के चेहरों पर चिंता की लकीरें साफ देखी जा सकती थी। परिजनों ने कहा कि वे ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि जल्द दोनों देशों में शांति वार्ता हो और सभी छात्र सही सलामत अपने देश लौट आएं।
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