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Sirsa News: किताबों से आगे सीखने की पहल, दादी और नानी बनेंगी विद्यार्थियों की शिक्षक
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सिरसा।प्राइमरी स्कूल के विद्यार्थी रसोई घर में आंखें बंद करके मसालों को चखकर पहचानते हुए। विभाग
सिरसा। जिले के 523 प्राइमरी विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों के लिए शीतकालीन अवकाश के दौरान विशेष गृह कार्य निर्धारित किया गया है। शिक्षा विभाग की ओर से यह नवाचार निपुण कार्यक्रम और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या के अनुरूप तैयार किया गया है। इसमें लेखन और रटने के बजाय अनुभव आधारित सीखने को प्राथमिकता दी गई है।
इस विशेष गृह कार्य की प्रमुख विशेषता यह है कि बच्चों को अपने दादी-नानी, नाना-नानी सहित परिवार के अन्य वरिष्ठ सदस्यों के साथ मिलकर विभिन्न गतिविधियां करनी होंगी। इस दौरान परिवार के वरिष्ठ सदस्य मेंटर की भूमिका निभाते हुए अपने जीवन अनुभवों के माध्यम से बच्चों को संस्कार, मार्गदर्शन, दक्षता, कौशल और व्यवहार की सीख देंगे।
व्यावहारिक ज्ञान पर आधारित इस गृह कार्य में बच्चों को रोजमर्रा के अनुभवों से सीखने पर विशेष जोर दिया गया है। इसके अंतर्गत बच्चे अपने घर के बुजुर्गों से उनके बचपन के अनुभव, गांव या शहर की पुरानी परंपराएं, ऋतु आधारित खान-पान तथा सामाजिक रीति-रिवाजों के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे। इन अनुभवों को बच्चे बातचीत, चित्र, छोटे वीडियो अथवा ऑडियो के माध्यम से साझा कर सकेंगे, जिससे उनकी अभिव्यक्ति क्षमता के साथ-साथ सीखने की रुचि भी बढ़ेगी।
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शिक्षक प्रतिदिन व्हाट्सएप ग्रुप में दें रहे गृहकार्य
शिक्षक प्रतिदिन बच्चों को करने वाले कार्यों के निर्देश शिक्षक-अभिभावक व्हाट्सएप ग्रुप में दे रहे हैं। यह निर्देश एक शाम पहले साझा किए जाएंगे, ताकि अभिभावक बच्चों को समय पर मार्गदर्शन दे सकें। बच्चे द्वारा किया गया गृहकार्य अभिभावकों के माध्यम से उसी व्हाट्सएप ग्रुप में वापस भेजा जाएगा। इससे शिक्षक, अभिभावक और विद्यार्थी के बीच निरंतर संवाद बना रहेगा।
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खेल-खेल में सीखने की है याेजना
गृह कार्य को खेल-खेल में सीखने की योजना के तहत तैयार किया गया है। विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से बच्चे आंकलन, अनुमान, विश्लेषण, एकीकरण, कहानी कहना और समझना व संवाद कौशल को मजबूत करेंगे। इससे विद्यार्थियों के शब्दकोश का विस्तार होगा और उनमें आत्मविश्वास भी बढ़ेगा। बच्चों को अपनी मातृभाषा में गीत, लोकगीत, पहेलियां, कहानियां, किस्से, पारिवारिक परंपराएं, रीति-रिवाज, भोजन और पारंपरिक व्यंजनों की जानकारी प्राप्त करने के अवसर दिए जाएंगे।
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विद्यार्थियों को जल्दी उठने की आदत डालेंगे अभिभावक
अभिभावकों के लिए भी इस अभियान के तहत विशेष सुझाव दिए गए हैं। उनसे आग्रह किया गया है कि वे बच्चों में सुबह जल्दी उठने की आदत विकसित करें और उन्हें मेडिटेशन व ध्यान लगाने का प्रशिक्षण दें। बच्चों को सामाजिक एवं धार्मिक आयोजनों में अवश्य शामिल करवाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही बच्चों में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी विकसित करने पर भी जोर दिया गया है। अभिभावकों को सलाह दी गई है कि वे बच्चों को पौधे लगाने और उनका ख्याल रखने की आदत डालें। पर्यावरण संरक्षण के लिए कचरा प्रबंधन की जानकारी दें और स्वच्छता के महत्व को समझाएं।
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अभिभावकों को रात को कहानियां सुनानी होंगी
रात्रि समय में बच्चों को पंचतंत्र, तेनाली राम जैसी शिक्षाप्रद कहानियां सुनाने के निर्देश भी दिए गए हैं। साथ ही साहित्यिक और धार्मिक कथाएं सुनाकर बच्चों में नैतिक मूल्यों, सही और गलत के अंतर और अनुशासन की समझ विकसित करने पर बल दिया गया है। बच्चों को स्वयं पढ़ने और सीखने की आदत डालने के लिए प्रेरित किया जाएगा, ताकि उनमें जिज्ञासा और आत्मनिर्भरता का भाव बढ़े।
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इस प्रकार का अनुभव आधारित गृह कार्य बच्चों को सीखने से जोड़ने में सहायक होगा। परिवार और विद्यालय के संयुक्त प्रयास से बच्चे न केवल शैक्षणिक रूप से मजबूत होंगे, बल्कि उनमें जीवन कौशल, संस्कार और व्यावहारिक समझ भी विकसित होगी।
- डॉ. कपिल देव, जिला कोऑर्डिनेटर, एफएलएन, सिरसा।
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इस विशेष गृह कार्य की प्रमुख विशेषता यह है कि बच्चों को अपने दादी-नानी, नाना-नानी सहित परिवार के अन्य वरिष्ठ सदस्यों के साथ मिलकर विभिन्न गतिविधियां करनी होंगी। इस दौरान परिवार के वरिष्ठ सदस्य मेंटर की भूमिका निभाते हुए अपने जीवन अनुभवों के माध्यम से बच्चों को संस्कार, मार्गदर्शन, दक्षता, कौशल और व्यवहार की सीख देंगे।
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व्यावहारिक ज्ञान पर आधारित इस गृह कार्य में बच्चों को रोजमर्रा के अनुभवों से सीखने पर विशेष जोर दिया गया है। इसके अंतर्गत बच्चे अपने घर के बुजुर्गों से उनके बचपन के अनुभव, गांव या शहर की पुरानी परंपराएं, ऋतु आधारित खान-पान तथा सामाजिक रीति-रिवाजों के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे। इन अनुभवों को बच्चे बातचीत, चित्र, छोटे वीडियो अथवा ऑडियो के माध्यम से साझा कर सकेंगे, जिससे उनकी अभिव्यक्ति क्षमता के साथ-साथ सीखने की रुचि भी बढ़ेगी।
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शिक्षक प्रतिदिन व्हाट्सएप ग्रुप में दें रहे गृहकार्य
शिक्षक प्रतिदिन बच्चों को करने वाले कार्यों के निर्देश शिक्षक-अभिभावक व्हाट्सएप ग्रुप में दे रहे हैं। यह निर्देश एक शाम पहले साझा किए जाएंगे, ताकि अभिभावक बच्चों को समय पर मार्गदर्शन दे सकें। बच्चे द्वारा किया गया गृहकार्य अभिभावकों के माध्यम से उसी व्हाट्सएप ग्रुप में वापस भेजा जाएगा। इससे शिक्षक, अभिभावक और विद्यार्थी के बीच निरंतर संवाद बना रहेगा।
खेल-खेल में सीखने की है याेजना
गृह कार्य को खेल-खेल में सीखने की योजना के तहत तैयार किया गया है। विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से बच्चे आंकलन, अनुमान, विश्लेषण, एकीकरण, कहानी कहना और समझना व संवाद कौशल को मजबूत करेंगे। इससे विद्यार्थियों के शब्दकोश का विस्तार होगा और उनमें आत्मविश्वास भी बढ़ेगा। बच्चों को अपनी मातृभाषा में गीत, लोकगीत, पहेलियां, कहानियां, किस्से, पारिवारिक परंपराएं, रीति-रिवाज, भोजन और पारंपरिक व्यंजनों की जानकारी प्राप्त करने के अवसर दिए जाएंगे।
विद्यार्थियों को जल्दी उठने की आदत डालेंगे अभिभावक
अभिभावकों के लिए भी इस अभियान के तहत विशेष सुझाव दिए गए हैं। उनसे आग्रह किया गया है कि वे बच्चों में सुबह जल्दी उठने की आदत विकसित करें और उन्हें मेडिटेशन व ध्यान लगाने का प्रशिक्षण दें। बच्चों को सामाजिक एवं धार्मिक आयोजनों में अवश्य शामिल करवाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही बच्चों में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी विकसित करने पर भी जोर दिया गया है। अभिभावकों को सलाह दी गई है कि वे बच्चों को पौधे लगाने और उनका ख्याल रखने की आदत डालें। पर्यावरण संरक्षण के लिए कचरा प्रबंधन की जानकारी दें और स्वच्छता के महत्व को समझाएं।
अभिभावकों को रात को कहानियां सुनानी होंगी
रात्रि समय में बच्चों को पंचतंत्र, तेनाली राम जैसी शिक्षाप्रद कहानियां सुनाने के निर्देश भी दिए गए हैं। साथ ही साहित्यिक और धार्मिक कथाएं सुनाकर बच्चों में नैतिक मूल्यों, सही और गलत के अंतर और अनुशासन की समझ विकसित करने पर बल दिया गया है। बच्चों को स्वयं पढ़ने और सीखने की आदत डालने के लिए प्रेरित किया जाएगा, ताकि उनमें जिज्ञासा और आत्मनिर्भरता का भाव बढ़े।
इस प्रकार का अनुभव आधारित गृह कार्य बच्चों को सीखने से जोड़ने में सहायक होगा। परिवार और विद्यालय के संयुक्त प्रयास से बच्चे न केवल शैक्षणिक रूप से मजबूत होंगे, बल्कि उनमें जीवन कौशल, संस्कार और व्यावहारिक समझ भी विकसित होगी।
- डॉ. कपिल देव, जिला कोऑर्डिनेटर, एफएलएन, सिरसा।