{"_id":"6742313a41e7cd67fb0c6f04","slug":"adoption-of-76-parks-became-a-problem-for-the-officials-the-process-of-allotment-stopped-sirsa-news-c-128-1-svns1027-129025-2024-11-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sirsa News: 76 पार्कों को गोद देना अधिकारियों के लिए बना परेशानी, आवंटन की प्रक्रिया रोकी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sirsa News: 76 पार्कों को गोद देना अधिकारियों के लिए बना परेशानी, आवंटन की प्रक्रिया रोकी
Sun, 24 Nov 2024 01:17 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Sun, 24 Nov 2024 01:17 AM IST
विज्ञापन
शहर में स्थित पार्क। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। शहर के पार्कों को नए नियमों के अनुसार गोद देना शहर के मौजिज लोगों को रास नहीं आ रहा है। अपने चहेतों को पार्क दिलाने के लिए अधिकारियों के पास राजनेताओं से लेकर पूर्व पार्षदों के निरंतर फोन आ रहे हैं। ऐसे में इन पार्कों को गोद देना अधिकारियों के लिए मुसीबत बन गया है। इसके चलते इस प्रक्रिया को अब फिर से रोक दिया गया है।
जानकारी के अनुसार नगर परिषद के 76 पार्कों को गोद लेने के लिए 66 आवेदन समितियों के आए हैं। नगर परिषद प्रशासन ने निर्णय लिया है कि ग्रीन बेल्ट को दुरुस्त किया जाएगा। इसलिए इन्हें गोद नहीं दिया जाएगा। जानकारी के अनुसार राजनीतिक लोगों के साथ साथ कई पूर्व पार्षद भी अपने अपने एरिया के पार्कों को गोद लेना चाहते हैं। नगर परिषद ने सरकार के नियमानुसार पार्क वेलफेयर सोसायटी को ही पार्क गोद देने है। इन पार्कों से कमाई करने के इच्छुक लोग हर तरफ से अधिकारियों पर दबाव बना रहे हैं।
इस प्रकार हुए हैं आवेदन
कुल पार्क - 76
क्लस्टर बनाए - 18
क्लस्टर में पार्कों की संख्या - 4 से 10
समितियों ने किए आवेदन-- 66
ग्रीन बेल्ट - 6
-- -
बॉक्स
एजेंसियों और सोसायटी पूर्व में कमा रही थीं पैसा
नगर परिषद 4 रुपये प्रति स्क्वायर फीट के हिसाब से पार्कों के लिए पैसा जारी करती है। पूर्व में सफाई एजेंसियों से लेकर रानियां में काम करने वालीं एजेंसियों को पार्क गोद दिए गए थे। एजेंसियों और सोसायटियों के पास 10 से 12 तक पार्क गोद थे। इनको लेकर बड़े स्तर पर शिकायतें विभाग को प्राप्त हुई थीं। इतना ही नहीं, पूर्व निकाय मंत्री डाॅ. कमल गुप्ता के सामने भी यह मामला उठा था। इसके अतिरिक्त, जिला नगर आयुक्त को भी लोगों ने लिखित में शिकायत दी थी।
विज्ञापन
कोट्स
पार्कों को गोद देने की प्रक्रिया फिलहाल रोक दी है। पार्क गोद सोसायटियों को देने का सरकार के आदेश है। इसके अतिरिक्त किसी को पार्क गोद नहीं दे सकते है। बिना सोसायटी के लोग पार्क गोद लेना चाहते हैं, जो संभव नहीं है। इसलिए जल्द ही उच्चाधिकारियों से विचार विमर्श कर आगामी निर्णय लिया जाएगा।
- रोहित हुड्डा, जेई, नगर परिषद
विज्ञापन
सिरसा। शहर के पार्कों को नए नियमों के अनुसार गोद देना शहर के मौजिज लोगों को रास नहीं आ रहा है। अपने चहेतों को पार्क दिलाने के लिए अधिकारियों के पास राजनेताओं से लेकर पूर्व पार्षदों के निरंतर फोन आ रहे हैं। ऐसे में इन पार्कों को गोद देना अधिकारियों के लिए मुसीबत बन गया है। इसके चलते इस प्रक्रिया को अब फिर से रोक दिया गया है।
जानकारी के अनुसार नगर परिषद के 76 पार्कों को गोद लेने के लिए 66 आवेदन समितियों के आए हैं। नगर परिषद प्रशासन ने निर्णय लिया है कि ग्रीन बेल्ट को दुरुस्त किया जाएगा। इसलिए इन्हें गोद नहीं दिया जाएगा। जानकारी के अनुसार राजनीतिक लोगों के साथ साथ कई पूर्व पार्षद भी अपने अपने एरिया के पार्कों को गोद लेना चाहते हैं। नगर परिषद ने सरकार के नियमानुसार पार्क वेलफेयर सोसायटी को ही पार्क गोद देने है। इन पार्कों से कमाई करने के इच्छुक लोग हर तरफ से अधिकारियों पर दबाव बना रहे हैं।
विज्ञापन
इस प्रकार हुए हैं आवेदन
कुल पार्क - 76
क्लस्टर बनाए - 18
क्लस्टर में पार्कों की संख्या - 4 से 10
समितियों ने किए आवेदन
ग्रीन बेल्ट - 6
बॉक्स
एजेंसियों और सोसायटी पूर्व में कमा रही थीं पैसा
नगर परिषद 4 रुपये प्रति स्क्वायर फीट के हिसाब से पार्कों के लिए पैसा जारी करती है। पूर्व में सफाई एजेंसियों से लेकर रानियां में काम करने वालीं एजेंसियों को पार्क गोद दिए गए थे। एजेंसियों और सोसायटियों के पास 10 से 12 तक पार्क गोद थे। इनको लेकर बड़े स्तर पर शिकायतें विभाग को प्राप्त हुई थीं। इतना ही नहीं, पूर्व निकाय मंत्री डाॅ. कमल गुप्ता के सामने भी यह मामला उठा था। इसके अतिरिक्त, जिला नगर आयुक्त को भी लोगों ने लिखित में शिकायत दी थी।
विज्ञापन
कोट्स
पार्कों को गोद देने की प्रक्रिया फिलहाल रोक दी है। पार्क गोद सोसायटियों को देने का सरकार के आदेश है। इसके अतिरिक्त किसी को पार्क गोद नहीं दे सकते है। बिना सोसायटी के लोग पार्क गोद लेना चाहते हैं, जो संभव नहीं है। इसलिए जल्द ही उच्चाधिकारियों से विचार विमर्श कर आगामी निर्णय लिया जाएगा।
- रोहित हुड्डा, जेई, नगर परिषद