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Sirsa News: शिवपुरी मामले में एडीसी ने की सुनवाई, सभी के बयान किए दर्ज
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सिरसा। शिवपुरी मामले में आखिरकार जांच शुरू हो गई है। एडीसी विरेंद्र सहरावत ने मंगलवार को आरोप लगाने वाले समाजसेवी लोगों और नगर परिषद व बीएंडआर के अधिकारियों को सुनवाई के लिए बुलाया। सुनवाई के साथ ही सभी के अलग अलग बयान दर्ज करवाए गए हैं। समाजसेवियों ने एडीसी से मांग की कि मामले की निष्पक्षता से जांच की जाएगी और जो भी दोषी है, उसके खिलाफ सख्त से कार्रवाई की जाए।
उन्होंने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि सरकारी पैसे को कैसे कोई संस्था को सौंप सकता है। यदि सौंप सकता है तो उसका नियम क्या हैं। ठेकेदार को बिना काम किए कैसे पैमेंट जारी कर दी गई है। ठेकेदार हो या अधिकारी सभी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। एडीसी ने आश्वासन दिया कि मामले की निष्पक्षता से जांच की जाएगी।
यदि गलत काम हुआ है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। एक्सईएन विजय कुमार, एमई अनिल मोहिल, जेई प्रवीण शर्मा , बीएंडआर के अधिकारी, समाजसेवी सुशील सैनी व अन्य लोग सुनवाई के लिए पहुंचे। समाजसेवी सुशील सैनी ने बताया कि सुनवाई के लिए 11 बजे बुलाया गया था। सुनवाई के दौरान सभी अधिकारी व ठेकेदार भी मौजूद थे। उन्होंने कहा कि हमने अपने बयान लिखित में एडीसी को सौंप दिए हैं। वहीं, जेई व अधिकारियों ने भी अपने बयान दर्ज करवाए हैं।
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यह है मामला
नगर परिषद की ओर से नटार रोड पर बनी शिवपुरी में दो शेड और दीवार बनाने का कार्य करवाने के लिए टेंडर लगाए गए थे। ठेकेदार और स्थानीय नेता के बीच विवाद पनप गया और ठेकेदार ने शहर के मौजिज लोगों और समाजसेवियों को सारे दस्तावेज भ्रष्टाचार के सौंप दिए। ठेकेदार ने कहा कि उसने कोई काम नहीं किया है। विवाद उठने के बाद समाजसेवी लोगों ने शिवपुरी के बाहर अपना धरना शुरू कर दिया और ढाई करोड़ रुपये का हिसाब मांगना शुरू कर दिया। वहीं, एक स्थानीय नेता व शिवपुरी कमेटी के सदस्यों ने बैठक की और ठेकेदार को बुलाया। उस दौरान भी ठेकेदार ने कहा कि उसने काम नहीं किया है। धरने पर बैठे लोगों ने दस्तावेज सार्वजनिक कर कार्रवाई की मांग की। ऐसे में 10 दिनों तक धरने पर बैठने और नगर परिषद की शव यात्रा निकालने के बाद प्रशासन ने उन्हें जांच का आश्वासन दिया।
अधिकारियों का दावा 66 लाख लगे
इस मामले में नगर परिषद के अधिकारियों ने ढाई साल का रिकॉर्ड प्रस्तुत करते हुए कहा था कि उनके कार्यकाल में 66 लाख रुपये ही लगे हैं और इतना ही पैसा जारी किया गया है। किसी प्रकार को कोई गबन नहीं किया गया और ठेकेदार को काम की पेमेंट जारी की गई है।
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उन्होंने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि सरकारी पैसे को कैसे कोई संस्था को सौंप सकता है। यदि सौंप सकता है तो उसका नियम क्या हैं। ठेकेदार को बिना काम किए कैसे पैमेंट जारी कर दी गई है। ठेकेदार हो या अधिकारी सभी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। एडीसी ने आश्वासन दिया कि मामले की निष्पक्षता से जांच की जाएगी।
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यदि गलत काम हुआ है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। एक्सईएन विजय कुमार, एमई अनिल मोहिल, जेई प्रवीण शर्मा , बीएंडआर के अधिकारी, समाजसेवी सुशील सैनी व अन्य लोग सुनवाई के लिए पहुंचे। समाजसेवी सुशील सैनी ने बताया कि सुनवाई के लिए 11 बजे बुलाया गया था। सुनवाई के दौरान सभी अधिकारी व ठेकेदार भी मौजूद थे। उन्होंने कहा कि हमने अपने बयान लिखित में एडीसी को सौंप दिए हैं। वहीं, जेई व अधिकारियों ने भी अपने बयान दर्ज करवाए हैं।
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यह है मामला
नगर परिषद की ओर से नटार रोड पर बनी शिवपुरी में दो शेड और दीवार बनाने का कार्य करवाने के लिए टेंडर लगाए गए थे। ठेकेदार और स्थानीय नेता के बीच विवाद पनप गया और ठेकेदार ने शहर के मौजिज लोगों और समाजसेवियों को सारे दस्तावेज भ्रष्टाचार के सौंप दिए। ठेकेदार ने कहा कि उसने कोई काम नहीं किया है। विवाद उठने के बाद समाजसेवी लोगों ने शिवपुरी के बाहर अपना धरना शुरू कर दिया और ढाई करोड़ रुपये का हिसाब मांगना शुरू कर दिया। वहीं, एक स्थानीय नेता व शिवपुरी कमेटी के सदस्यों ने बैठक की और ठेकेदार को बुलाया। उस दौरान भी ठेकेदार ने कहा कि उसने काम नहीं किया है। धरने पर बैठे लोगों ने दस्तावेज सार्वजनिक कर कार्रवाई की मांग की। ऐसे में 10 दिनों तक धरने पर बैठने और नगर परिषद की शव यात्रा निकालने के बाद प्रशासन ने उन्हें जांच का आश्वासन दिया।
अधिकारियों का दावा 66 लाख लगे
इस मामले में नगर परिषद के अधिकारियों ने ढाई साल का रिकॉर्ड प्रस्तुत करते हुए कहा था कि उनके कार्यकाल में 66 लाख रुपये ही लगे हैं और इतना ही पैसा जारी किया गया है। किसी प्रकार को कोई गबन नहीं किया गया और ठेकेदार को काम की पेमेंट जारी की गई है।