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Sirsa News: आरोपी डॉक्टर संजीव कौशल को हाईकोर्ट से मिली अंतरिम राहत
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सिरसा। फाइनेंसर से व्हाट्सएप पर कॉल करके 10 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने के मामले में आरोपी डॉक्टर संजीव कौशल ने मंगलवार सुबह 10 बजे जेल में आत्मसमर्पण नहीं किया। वहीं, पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने डॉक्टर संजीव कौशल की नियमित जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए अंतरिम राहत दे दी।
नियमित याचिका पर अगली सुनवाई तीन जुलाई को होगी। बता दें कि आरोपी को सिरसा जिला एवं सत्र न्यायालय इलाज के लिए चार माह की अंतरिम राहत दे चुका है। आरोपी ने न्यायालय से अंतरिम राहत अवधि बढ़ाने के लिए याचिका लगाई थी। इसे न्यायालय ने खारिज कर दिया था और डॉ. संजीव कौशल को 20 मई सुबह 10 बजे जेल में आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया था।
जिला एवं सत्र न्यायाधीश पुनीश जिंदिया ने अपने फैसले में कहा था कि लोक अभियोजक की ओर से प्रस्तुत दस्तावेज से यह स्पष्ट है कि याचिकाकर्ता का सिरसा में अपना निजी अल्ट्रासाउंड सेंटर है और अंतरिम जमानत की अवधि के दौरान वह इसे चला रहा है। वह मरीजों की देखभाल कर रहा है व परीक्षण भी कर रहा है।
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सिविल सर्जन सिरसा के कार्यालय ने याचिकाकर्ता की ओर से फरवरी, मार्च और अप्रैल के महीनों में तैयार की गई अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट का विधिवत समर्थन किया है। इस तथ्य को अन्यथा भी नकारा नहीं जा सकता। जब याचिकाकर्ता अंतरिम जमानत पर रहते हुए सामान्य कामकाज कर रहा है और उसकी बीमारी उसके काम करने में बाधा नहीं बन रही है, तो यह परिस्थिति इस बात पर प्रकाश डालती है कि उसे चिकित्सा उपचार के लिए दी गई अंतरिम सुरक्षा की आवश्यकता नहीं है।
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नियमित याचिका पर अगली सुनवाई तीन जुलाई को होगी। बता दें कि आरोपी को सिरसा जिला एवं सत्र न्यायालय इलाज के लिए चार माह की अंतरिम राहत दे चुका है। आरोपी ने न्यायालय से अंतरिम राहत अवधि बढ़ाने के लिए याचिका लगाई थी। इसे न्यायालय ने खारिज कर दिया था और डॉ. संजीव कौशल को 20 मई सुबह 10 बजे जेल में आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया था।
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जिला एवं सत्र न्यायाधीश पुनीश जिंदिया ने अपने फैसले में कहा था कि लोक अभियोजक की ओर से प्रस्तुत दस्तावेज से यह स्पष्ट है कि याचिकाकर्ता का सिरसा में अपना निजी अल्ट्रासाउंड सेंटर है और अंतरिम जमानत की अवधि के दौरान वह इसे चला रहा है। वह मरीजों की देखभाल कर रहा है व परीक्षण भी कर रहा है।
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सिविल सर्जन सिरसा के कार्यालय ने याचिकाकर्ता की ओर से फरवरी, मार्च और अप्रैल के महीनों में तैयार की गई अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट का विधिवत समर्थन किया है। इस तथ्य को अन्यथा भी नकारा नहीं जा सकता। जब याचिकाकर्ता अंतरिम जमानत पर रहते हुए सामान्य कामकाज कर रहा है और उसकी बीमारी उसके काम करने में बाधा नहीं बन रही है, तो यह परिस्थिति इस बात पर प्रकाश डालती है कि उसे चिकित्सा उपचार के लिए दी गई अंतरिम सुरक्षा की आवश्यकता नहीं है।