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गुहला चीका में जलस्तर में कमी, लेकिन सिरसा में अभी भी जलस्तर में वृद्घि, डीसी ने किया तटबंधों का निरीक्षण
Updated Sat, 29 Sep 2018 02:04 AM IST
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घग्गर का जलस्तर 17 हजार क्यूसिक पहुंचा, राजस्थान साइफन पर जलकुंभी बनी मुसीबत
सिरसा,रानियां,ऐलनाबाद। घग्गर का जलस्तर शुक्रवार रात करीब 17 हजार क्यूसिक तक पहुंच गया। हालांकि गुहला चीका में शाम को जलस्तर 34755 क्यूसिक था। लेकिन गुहला चीका में जलस्तर कम होने का असर अभी तक ओटू हेड पर दिखाई नहीं दे रहा। बीते दिन ओटू हेड का जलस्तर 15 हजार क्यूसिक था। जलस्तर बढ़ने से प्रशासन के साथ साथ घग्गर किनारे रहने वाले 33 गांवों के ग्रामीणों की चिंता बरकरार है। इतना ही नहीं सिंचाई विभाग के लिए पीछे से आ रही जलखुंभी मुसीबत बन रही है जो कि ओटू हेड और राजस्थान साइफन पर पानी के बहाव को कम कर रही है। शुक्रवार को डीसी प्रभजोत सिंह ने प्रशासन के साथ ओटू हेड का निरीक्षण किया। सिंचाई विभाग बढ़ते जलस्तर के बीच अभी भी लोहे के गेटों की मरम्मत में जुटा हुआ है। सुबह गेट नंबर नौ में आयरन सीलिंग वायर डाली जा रही थी। ओटू डैम के किनारे सिरसा की ओर लगी स्ट्रीट लाइट्स भी बंद पड़ी है। यह लाइट्स चार साल से बंद पड़ी है।
सिरसा में घग्गर का जलस्तर खतरे के निशान पर पहुंच चुका है। बढ़ते जलस्तर के साथ साथ प्रशासन के लिए जलकुंभी भी मुसीबत बन रही है। ओटू हेड पर करीब एक जेसीबी मशीन और मजदूर जलकुंभी निकालने में तीन दिनों से जुटे हुए है। गुरुवार चार गेट खोलने से राजस्थान साइफन पर जलखुंभी भी बढ़ गई है। राजस्थान साइफन पर जलकुंभी इकट्ठी हो रही है। प्रशासन को जलखुंभी निकालने में दिक्कतें आ रही है। खुद सिंचाई विभाग के कार्यकारी अभियंता एनके भोला मान रहे हैं कि राजस्थान साइफन पर जलकुंभी इक्ट्ठी होने से पानी के बहाव में रुकावट आ रही है। बढ़ते जलस्तर से ज्यादातर फसलें डूब चुकी हैं। किसान ट्यूब पर चारपाई रखकर उसके ऊपर धान की फसल काटकर रख रहे हैं। किसान अमरीक सिंह, मनदीप सिंह, मलकीत सिंह, पूर्ण सिंह बिल्लू सिंह का कहना है कि बढ़ते जलस्तर के बीच धान की फसल काटना जान जोखिम में डालना है। क्योंकि बदबूदार पानी के कारण शरीर पर खुजली हो रही है।
वीरवार रात 12 बजे तक मजदूर बैठे रहे ओटू हेड पर, मजदूरी को लेकर नाराजगी
गुरुवार रात को बढ़ते जलस्तर के बीच ओटू हेड से आगे फिरोजाबाद गांव के पास मोगे में लीकेज हो गई। इससे ग्रामीण मौके पर आए और लीकेज को बंद कर दिया। इसी बीच सिंचाई विभाग ने आसपास के गांव के मजदूरों को भी आठ बजे बुला लिया। मजदूर जब मौके पर पहुंचे तो मजदूरी को लेकर एक बेलदार से उनकी बहस हो गई। मजदूर वापस डैम पर आ गए और रात 12 बजे तक बैठे रहे। सुबह मजदूरों ने काम पर आने से मना कर दिया। मजदूरों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि उन्हें रात को घरों से बुलाया गया। लेकिन सिंचाई विभाग के कर्मचारियों ने बाद में मजदूरी देने से मना कर दिया। हालांकि बाद में सिंचाई विभाग के कर्मचारियों ने उन्हें मनाकर काम पर बुलाया।
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डीसी ने किया डैम का दौरा
उपायुक्त प्रभजोत सिंह ने खैरेकां से झोरडनाली पूल व ओटू हेड तक का निरीक्षण कर घग्घर नदी में पीछे से आ रहे पानी के बहाव का जायजा लिया। उन्होंने किसानों से कहा कि डरने की कोई बात नहीं है, धीरे-धीरे जलस्तर और कम होने की संभावना है। जिला प्रशासन अपने स्तर पर पूरी तरह मुस्तैद है। लेकिन तब तक तटवर्तीय क्षेत्र में ग्रामीणों को रात्रि के समय ठिकरी पहरा देकर निगरानी रखने को कहा गया है, वही प्रशासन लगातार प्रत्येक क्षण की जानकारी जुटाने हेतु आपस में संपर्क बनाए हुए हैं। उन्होंनेे अधिकारियों को निर्र्देश देते हुए कहा कि पूल के नीचे जलखुंभी को एकत्रित न होने दें, क्यों कि जलकुंभी पानी के बहाव में रुकावट पैदा करता है, जोकि तटबंध को नुकसान पहुंचा सकता है। इस अवसर पर उपमंडल अधिकारी ना. अमित कुमार, जिला राजस्व अधिकारी नौरंग दास, अधीक्षक अभियंता सिंचाई विभाग राजेश कुमार, कार्यकारी अभियंता एनके भोला, बीडीपीओ रवि कुमार, वेदपाल, तहसीलदार श्रीनिवास उपस्थित थे।
कोट्स
गुहला चीका में जलस्तर कम हुआ है। लेकिन अभी सिरसा में जलस्तर कम नहीं हो रहा है। जलस्तर 18 हजार क्यूसिक के पास है। हालांकि स्थिति कंट्रोल में है। जलकुंभी राजस्थान साइफन के पास इकट्ठी हो रही है।
एनके भोला, कार्यकारी अभियंता, सिंचाई विभाग।
ये रहा है जलस्तर
गुहला चीका, 34755
खनौरी, 12800
चांदपुर हैड, 12650
ओटू, 17 हजार क्यूसिक
राजस्थान साइफन, 13600
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सिरसा,रानियां,ऐलनाबाद। घग्गर का जलस्तर शुक्रवार रात करीब 17 हजार क्यूसिक तक पहुंच गया। हालांकि गुहला चीका में शाम को जलस्तर 34755 क्यूसिक था। लेकिन गुहला चीका में जलस्तर कम होने का असर अभी तक ओटू हेड पर दिखाई नहीं दे रहा। बीते दिन ओटू हेड का जलस्तर 15 हजार क्यूसिक था। जलस्तर बढ़ने से प्रशासन के साथ साथ घग्गर किनारे रहने वाले 33 गांवों के ग्रामीणों की चिंता बरकरार है। इतना ही नहीं सिंचाई विभाग के लिए पीछे से आ रही जलखुंभी मुसीबत बन रही है जो कि ओटू हेड और राजस्थान साइफन पर पानी के बहाव को कम कर रही है। शुक्रवार को डीसी प्रभजोत सिंह ने प्रशासन के साथ ओटू हेड का निरीक्षण किया। सिंचाई विभाग बढ़ते जलस्तर के बीच अभी भी लोहे के गेटों की मरम्मत में जुटा हुआ है। सुबह गेट नंबर नौ में आयरन सीलिंग वायर डाली जा रही थी। ओटू डैम के किनारे सिरसा की ओर लगी स्ट्रीट लाइट्स भी बंद पड़ी है। यह लाइट्स चार साल से बंद पड़ी है।
सिरसा में घग्गर का जलस्तर खतरे के निशान पर पहुंच चुका है। बढ़ते जलस्तर के साथ साथ प्रशासन के लिए जलकुंभी भी मुसीबत बन रही है। ओटू हेड पर करीब एक जेसीबी मशीन और मजदूर जलकुंभी निकालने में तीन दिनों से जुटे हुए है। गुरुवार चार गेट खोलने से राजस्थान साइफन पर जलखुंभी भी बढ़ गई है। राजस्थान साइफन पर जलकुंभी इकट्ठी हो रही है। प्रशासन को जलखुंभी निकालने में दिक्कतें आ रही है। खुद सिंचाई विभाग के कार्यकारी अभियंता एनके भोला मान रहे हैं कि राजस्थान साइफन पर जलकुंभी इक्ट्ठी होने से पानी के बहाव में रुकावट आ रही है। बढ़ते जलस्तर से ज्यादातर फसलें डूब चुकी हैं। किसान ट्यूब पर चारपाई रखकर उसके ऊपर धान की फसल काटकर रख रहे हैं। किसान अमरीक सिंह, मनदीप सिंह, मलकीत सिंह, पूर्ण सिंह बिल्लू सिंह का कहना है कि बढ़ते जलस्तर के बीच धान की फसल काटना जान जोखिम में डालना है। क्योंकि बदबूदार पानी के कारण शरीर पर खुजली हो रही है।
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वीरवार रात 12 बजे तक मजदूर बैठे रहे ओटू हेड पर, मजदूरी को लेकर नाराजगी
गुरुवार रात को बढ़ते जलस्तर के बीच ओटू हेड से आगे फिरोजाबाद गांव के पास मोगे में लीकेज हो गई। इससे ग्रामीण मौके पर आए और लीकेज को बंद कर दिया। इसी बीच सिंचाई विभाग ने आसपास के गांव के मजदूरों को भी आठ बजे बुला लिया। मजदूर जब मौके पर पहुंचे तो मजदूरी को लेकर एक बेलदार से उनकी बहस हो गई। मजदूर वापस डैम पर आ गए और रात 12 बजे तक बैठे रहे। सुबह मजदूरों ने काम पर आने से मना कर दिया। मजदूरों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि उन्हें रात को घरों से बुलाया गया। लेकिन सिंचाई विभाग के कर्मचारियों ने बाद में मजदूरी देने से मना कर दिया। हालांकि बाद में सिंचाई विभाग के कर्मचारियों ने उन्हें मनाकर काम पर बुलाया।
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डीसी ने किया डैम का दौरा
उपायुक्त प्रभजोत सिंह ने खैरेकां से झोरडनाली पूल व ओटू हेड तक का निरीक्षण कर घग्घर नदी में पीछे से आ रहे पानी के बहाव का जायजा लिया। उन्होंने किसानों से कहा कि डरने की कोई बात नहीं है, धीरे-धीरे जलस्तर और कम होने की संभावना है। जिला प्रशासन अपने स्तर पर पूरी तरह मुस्तैद है। लेकिन तब तक तटवर्तीय क्षेत्र में ग्रामीणों को रात्रि के समय ठिकरी पहरा देकर निगरानी रखने को कहा गया है, वही प्रशासन लगातार प्रत्येक क्षण की जानकारी जुटाने हेतु आपस में संपर्क बनाए हुए हैं। उन्होंनेे अधिकारियों को निर्र्देश देते हुए कहा कि पूल के नीचे जलखुंभी को एकत्रित न होने दें, क्यों कि जलकुंभी पानी के बहाव में रुकावट पैदा करता है, जोकि तटबंध को नुकसान पहुंचा सकता है। इस अवसर पर उपमंडल अधिकारी ना. अमित कुमार, जिला राजस्व अधिकारी नौरंग दास, अधीक्षक अभियंता सिंचाई विभाग राजेश कुमार, कार्यकारी अभियंता एनके भोला, बीडीपीओ रवि कुमार, वेदपाल, तहसीलदार श्रीनिवास उपस्थित थे।
कोट्स
गुहला चीका में जलस्तर कम हुआ है। लेकिन अभी सिरसा में जलस्तर कम नहीं हो रहा है। जलस्तर 18 हजार क्यूसिक के पास है। हालांकि स्थिति कंट्रोल में है। जलकुंभी राजस्थान साइफन के पास इकट्ठी हो रही है।
एनके भोला, कार्यकारी अभियंता, सिंचाई विभाग।
ये रहा है जलस्तर
गुहला चीका, 34755
खनौरी, 12800
चांदपुर हैड, 12650
ओटू, 17 हजार क्यूसिक
राजस्थान साइफन, 13600