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इंद्रदेव ने पन्नीवाला मोटा में मचाई ‘तबाही’
Updated Sat, 02 Sep 2017 12:08 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
ओढां (सिरसा)।
क्ष्ेात्र में वीरवार शाम से शुक्रवार सुबह तक हुई मूसलाधार बरसात ने कई क्षेत्रों में जनजीवन को बुरी तरह से प्रभावित कर दिया है। इस बरसात के कारण गांव पन्नीवाला मोटा में भारी नुकसान हुआ है। दर्जनों घरों में पानी घुसने से लोगों ने छतों पर चढुकर रात बिताई तो वहीं अधिकतर घरों में तो ये स्थिति देखने को मिली कि लोगों के पास खाने को अनाज व मवेशियों के लिए चारा तक नहीं बचा।
इस प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान की अमर उजाला ने जब वास्तुस्थिति जानी तो गलियों में व घरों में तीन से चार फुट तक पानी घुसा हुआ था और लोग अपना सामान समेटने में लगे थे। बारिश की आफत झेल रहे कुछ लोग तो अपने घर भी खाली कर सामान को दूसरी जगह शिफ्ट कर गए। मामला मीडिया में आने के बाद प्रशासनिक अधिकारी ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। इस बरसात ने निचले क्षेत्र में बसे लोगों के समक्ष आर्थिक संकट खड़ा कर दिया है। ग्राम पंचायत ने जेसीबी मशीन की सहायता से सड़क पर कट डालकर निकासी सुनिश्चित की।
नाथ समुदाय के मोहल्ले में भारी नुकसान
लागातार हो रही बारिश से नाथ समुदाय का ऐसा कोई भी घर अछूता नहीं रहा जहां नुकसान न हुआ हो। किसी के सिर से छत छिन गई तो किसी का तंबूू उखड़ गया तो किसी का सामान मलबे के नीचे दब गया। मंजर ये था कि लोगों ने एक-दृूूसरे के घरों में शरण लेकर रात बिताई। वहीं अधिकांश ने खुले आसमान में प्लास्टिक के कागज से काम चलाया। मोहल्लावासी नत्थू राम ने बताया कि बरसात के कारण उसके घर की चारदीवारी, स्नानघर व शौचालय गिर गया तथा छत भी टपकने के कारण उन्होंने अपने परिवार सहित प्लास्टिक के कागज के नीचे रात बिताई। महेंद्र नाथ के घर का एक हिस्सा व शौचालय पास से होकर गुजर रहे नाले के पानी के तेज बहाव के कारण धंस गया जिसके कारण उसका घर से निकलना बंद हो गया। संतरो बाई के घर में पानी घुसने के कारण उसके कमरे की दीवार धंस गई जिसके चलते उसने अपने दो छोटे बच्चों को लेकर पड़ोसियों के घर शरण ली। ओमवीर ने बताया कि मध्य रात्रि को वह अपनी पत्नीे व चार बच्चोेंसाथ झोपड़ी में सोया हुआ था कि पानी घुसने के कारण उन्होंने मुश्किल से बैठकर रात बिताई। वृद्धा रामप्यारी बाई ने बताया कि घर में वह तीन छोटे दोहतों के साथ सो रही थी कि अचानक तेज बहाव के साथ पानी कमरे में घुस गया जिसके चलते बच्चे तो भाग गए। वृद्धा ने जब शोर मचाया तो उसके पड़ोसियों ने उसे बाहर निक ालकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। बनवारी नाथ के घर में भी काफी नुकसान देखने को मिला। उसका परिवार जब आंगन में बनी झोपड़ी में खाना बना रहा था तो अचानक कमरे की छत क ा एक हिस्सा धड़ाम से आ गिरा। इस घटना कमरे में रखे दो टीवी, पंखा, संदूक, चारपाई व साइकिल क्षतिग्रस्त हो गए।
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घर का सामान मलबे में तबदील
इस प्राकृतिक आपदा ने नाथ समुदाय के लोगों को आर्थिक तंगी से जूझने को विवश कर दिया है। इंद्रपाल नाथ का परिवार अपने रिश्तेदार के शोक व्यक्त करने गया हुआ था। बरसात का पानी जैसे ही तंबू में घुसा तो दीवार गिरने के कारण उनका सारा सामान मलबे के नीचे दब गया। बबलूनाथ व जसवीर नाथ ने बताया कि वे अपने बच्चों के साथ झोपड़े में बैठे थे कि दीवार व बांस टूटने के कारण झोपड़े गिरते देख उन्होंने भागकर जान बचाई। वहीं विधवा सरबती बाई ने रोते हुए बताया कि उसके पास एक ही कमरा था वो भी पानी घुसने के कारण असुरक्षित हो गया है। अब उसके पास इतने पैसे भी नहीं की वह उसका पुनर्निर्माण कर सके। इसी प्रकार रणजीत नाथ, सदीनाथ, बद्रीनाथ सहित अन्य लोगों के घरों में दीवारों व मकानों के अलावा अन्य काफी नुकसान हुआ है।
पानी में बह गया अनाज और चारा
इस प्राकृतिक आपदा का मंजर कई घरों में इस कदर देखने को मिला की लोगों का सैकड़ों क्विंटल अनाज व अन्य घरेलू सामान पानी की भेंट चढ़ गया। किसान जगदीश एंचरा ने बताया कि उसके घर में पानी घुसने के कारण अनाज, भूसे से भरा कमरा, करीब चार क्विंटल नरमा व अन्य सामान नष्ट हो गया। किसान ने बताया कि उसके घर में करीब तीन फुट पानी घुसा हुआ है जिसके चलते उसके परिवार ने छत पर बने चौबारे में रात गुजारी। उधर साथ लगते धापां देवी के घर के सभी कमरों में करीब तीन फुट पानी घुस गया। उसने बताया कि वह वीरवार रात्रि घर में अकेली थी कि पानी का तेज बहाव गली से होकर उसके घर में घुसा तो उसने आनन-फानन में थैलों में मिट्टी भरकर पानी रोकने की नाकाम कोशिश की। धापां देवी ने बताया कि उसके पास कुछ बचा है तो सिर्फ तन के कपड़े। पीड़ित लोगों ने छतों पर पर चढकर रात बिताई। इस आपदा में धापां देवी का गेहूं, भूसा व करीब चार हजार रुपये की नकदी सहित अन्य सामान पानी में बह गया। वहीं किसान रायसिंह कस्वां के अनाज के भंडारण में पानी घुस गया। किसान के अनुसार उसने करीब ढाई सौ मन सरसों, 50 मण गेहूं व करीब 300 मन ग्वार का भंडारण किया हुआ था जिसमें तेज बहाव के साथ पानी घुसने के कारण उसका बड़ा नुकसान हुआ है। उधर नरमा, कपास, ग्वार की पकी फसल के अलावा पशुओं के चारे में कई-कई फीट पानी जमा होने के कारण उस पर भी विपरीत असर पड़ना स्वाभाविक है।
घर खाली कर गए कई परिवार
इस प्राकृतिक आपदा ने कई परिवारों को घर खाली करने को विवश कर दिया। पीड़ित डॉ. सुभाष ने बताया कि उन्हें आनन-फानन में घर से फसल व कीमती सामान उठाना पड़ा। वहीं साथ लगते आत्माराम, पोपराम, सुखराम ने भी अपना घर खाली कर कीमती सामान को साथ लगते मंदिर व अन्य सुरक्षित जगहों पर भिजवाया। पोपराम ने बताया कि उसने कोठड़े में अनाज व पशुओं का चारा भर रखा था लेकिन पानी घुसने के कारण दोनों कोठों में दरार आ गई है जिसके चलते उनके नजदीक कोई नहीं जा रहा। पीड़ित लोग धार्मिक स्थलों के अलावा एक-दूसरे के यहां वक्त गुजार रहे हैं। पीड़ित डॉ. सुभाष, पोपराम आदि ने बताया कि उनके घरों में तीन से चार फुट तक पानी घुसा हुआ है तथा मुख्य गली नहर का रूप धारण किए हुए हैं। पंचायत ने नाथ मोहल्ले से होकर खाईशेरगढ़, भागसर व खुईयांनेपालपुर जाने वाली सड़क को बीच में से उखाड़कर निकासी सुनिश्चित करवाई है लेकिन बरसात का जारी रहना बाधा बन रहा है।
हो सकता है जान-माल का नुकसान
पीड़ित लोगों ने प्रशासन से मदद की गुहार लगाते हुए कहा है कि निकासी उचित प्रबंध कर हुए नुकसान का आंकलन करवाकर उचित मुआवजा दिया जाए। उन्होंने कहा कि निकासी नहीं हो पाती और बरसात अधिक होती है तो जान-माल का खतरा भी हो सकता है। इस प्राकृ तिक आपदा से नाथ मोहल्ले में सबसे अधिक नुकसान हुआ है। उनके घरों में पानी घुसने के कारण मकानों का नुकसान हो रहा है। उक्त लोगों के पास सिर छुपाने के लिए या तो एक -दो कमरे हैं या फिर झोपड़ियां। नाथ समुदाय व अन्य घर गांव के निचले क्षेत्र मेें जोहड़ के छोर पर हैं। गांव का पानी गलियां से होकर जोहड़ में आ रहा है और जोहड़ का पानी ऑवरफ्लो होकर लोगों के घरों में घुस रहा है।
अभी भेजते हैं बीडीपीओ को
अगर ये स्थिति है तो बीडीपीओ को अभी मौके भेज रहे हैं। सबसे पहले हमें लोगों की जान-माल की सुरक्षा करनी जरूरी है। गांव की निकासी दुरूस्त करवाई जाएगी।
--मुनीष नागपाल, एडीसी सिरसा
बीडीपीओ ने लिया जायजा
लोगों की परेशानी जब एडीसी तक पहुंची तो उसके बाद बीडीपीओ बलराज सिंह ने तुरंत गांव में पहुंचकर स्थिति का जायजा लेते हुए पंचायत को निर्देश दिए कि पानी को पम्प की सहायता से साथ लगती खाईशेरगढ़ माइनर में डलवाया जाए। इसके बाद जेसीबी द्वारा गोशाला से खाई खोदकर माइनर की तरफ निकासी के प्रबंध किए गए। उधर डीडीपीओ प्रीतपाल सिंह ने कहा कि वे निकासी कार्य में तेजी ला रहे हैं।
बरसात बनी परेशानी का सबब
जितना हो सकता है उतना कार्य हम कर रहे हैं। लेकि न बरसात परेशानी बन रही है। गांव की निकासी की बड़ी समस्या है। गांव में तीन जोहड़ हैं जिन्हें आपस में जोड़कर करीब 10 फुट चौड़ा व सात फुट गहरे नाले का निर्माण करवाकर बरसाती पानी को रत्ताखेड़ा लिंक चैनल में डाले जाने का प्रबंध होता है तो ये समस्या हमेशा के लिए समाप्त हो सकती है।
-सतवीर कस्वां, सरपंच पन्नीवाला
बडागुढ़ा क्षेत्र में भी नुकसान
बडागुढ़ा क्षेत्र के गांव अलीकां, भीमां, नागोकी, लहंगेवाला, मत्तड़, झिड़ी, थराज व रंगा सहित साथ लगते क्षेत्रों में भी वीरवार रात्रि से हो रही बरसात से बड़े नुकसान का समाचार है। लोगों के घरों में पानी घुसने के कारण कुछ लोगों के मकानों व पकी हुई नरमेें कपास की फसल को भारी नुकसान हुआ है। इस नुकसान के बाद किसानों में भारी चिंता देखी जा रही है। किसान अपने खेतों से पानी निकाल रहे हैं। उधर खंड कृषि विकास अधिकारी सुखविन्द्र सिंह ने हुए नुकसान का आंकलन किया। उन्होंने किसानों से आहवान किया कि वे खेतों से पानी निकालना सुनिश्चित करें तथा दो ग्राम कोवाल्ट क्लोराइड 100 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें। उन्होंने कहा कि जिन किसानों ने फसल बीमा करवा रखा है वो पीड़ित किसान 48 घंटो के अंदर विभाग को सूचित करें।
बारिश बनी आफत, गलियां बनी नदी, घरों में भरा कई फुट पानी
पन्नीवाला मोटा में भारी नुकसान
लोग घरों से सामान निकालकर पहुंचा रहे सुरक्षित स्थानों पर
-नाथ मोहल्ले में हुआ सबसे ज्यादा नुकसान, सैकड़ाें क्विं टल अनाज और पशुचारा चढ़ा पानी की भेंट
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फोटो:42 से 47:
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ओढां (सिरसा)।
क्ष्ेात्र में वीरवार शाम से शुक्रवार सुबह तक हुई मूसलाधार बरसात ने कई क्षेत्रों में जनजीवन को बुरी तरह से प्रभावित कर दिया है। इस बरसात के कारण गांव पन्नीवाला मोटा में भारी नुकसान हुआ है। दर्जनों घरों में पानी घुसने से लोगों ने छतों पर चढुकर रात बिताई तो वहीं अधिकतर घरों में तो ये स्थिति देखने को मिली कि लोगों के पास खाने को अनाज व मवेशियों के लिए चारा तक नहीं बचा।
इस प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान की अमर उजाला ने जब वास्तुस्थिति जानी तो गलियों में व घरों में तीन से चार फुट तक पानी घुसा हुआ था और लोग अपना सामान समेटने में लगे थे। बारिश की आफत झेल रहे कुछ लोग तो अपने घर भी खाली कर सामान को दूसरी जगह शिफ्ट कर गए। मामला मीडिया में आने के बाद प्रशासनिक अधिकारी ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। इस बरसात ने निचले क्षेत्र में बसे लोगों के समक्ष आर्थिक संकट खड़ा कर दिया है। ग्राम पंचायत ने जेसीबी मशीन की सहायता से सड़क पर कट डालकर निकासी सुनिश्चित की।
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नाथ समुदाय के मोहल्ले में भारी नुकसान
लागातार हो रही बारिश से नाथ समुदाय का ऐसा कोई भी घर अछूता नहीं रहा जहां नुकसान न हुआ हो। किसी के सिर से छत छिन गई तो किसी का तंबूू उखड़ गया तो किसी का सामान मलबे के नीचे दब गया। मंजर ये था कि लोगों ने एक-दृूूसरे के घरों में शरण लेकर रात बिताई। वहीं अधिकांश ने खुले आसमान में प्लास्टिक के कागज से काम चलाया। मोहल्लावासी नत्थू राम ने बताया कि बरसात के कारण उसके घर की चारदीवारी, स्नानघर व शौचालय गिर गया तथा छत भी टपकने के कारण उन्होंने अपने परिवार सहित प्लास्टिक के कागज के नीचे रात बिताई। महेंद्र नाथ के घर का एक हिस्सा व शौचालय पास से होकर गुजर रहे नाले के पानी के तेज बहाव के कारण धंस गया जिसके कारण उसका घर से निकलना बंद हो गया। संतरो बाई के घर में पानी घुसने के कारण उसके कमरे की दीवार धंस गई जिसके चलते उसने अपने दो छोटे बच्चों को लेकर पड़ोसियों के घर शरण ली। ओमवीर ने बताया कि मध्य रात्रि को वह अपनी पत्नीे व चार बच्चोेंसाथ झोपड़ी में सोया हुआ था कि पानी घुसने के कारण उन्होंने मुश्किल से बैठकर रात बिताई। वृद्धा रामप्यारी बाई ने बताया कि घर में वह तीन छोटे दोहतों के साथ सो रही थी कि अचानक तेज बहाव के साथ पानी कमरे में घुस गया जिसके चलते बच्चे तो भाग गए। वृद्धा ने जब शोर मचाया तो उसके पड़ोसियों ने उसे बाहर निक ालकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। बनवारी नाथ के घर में भी काफी नुकसान देखने को मिला। उसका परिवार जब आंगन में बनी झोपड़ी में खाना बना रहा था तो अचानक कमरे की छत क ा एक हिस्सा धड़ाम से आ गिरा। इस घटना कमरे में रखे दो टीवी, पंखा, संदूक, चारपाई व साइकिल क्षतिग्रस्त हो गए।
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घर का सामान मलबे में तबदील
इस प्राकृतिक आपदा ने नाथ समुदाय के लोगों को आर्थिक तंगी से जूझने को विवश कर दिया है। इंद्रपाल नाथ का परिवार अपने रिश्तेदार के शोक व्यक्त करने गया हुआ था। बरसात का पानी जैसे ही तंबू में घुसा तो दीवार गिरने के कारण उनका सारा सामान मलबे के नीचे दब गया। बबलूनाथ व जसवीर नाथ ने बताया कि वे अपने बच्चों के साथ झोपड़े में बैठे थे कि दीवार व बांस टूटने के कारण झोपड़े गिरते देख उन्होंने भागकर जान बचाई। वहीं विधवा सरबती बाई ने रोते हुए बताया कि उसके पास एक ही कमरा था वो भी पानी घुसने के कारण असुरक्षित हो गया है। अब उसके पास इतने पैसे भी नहीं की वह उसका पुनर्निर्माण कर सके। इसी प्रकार रणजीत नाथ, सदीनाथ, बद्रीनाथ सहित अन्य लोगों के घरों में दीवारों व मकानों के अलावा अन्य काफी नुकसान हुआ है।
पानी में बह गया अनाज और चारा
इस प्राकृतिक आपदा का मंजर कई घरों में इस कदर देखने को मिला की लोगों का सैकड़ों क्विंटल अनाज व अन्य घरेलू सामान पानी की भेंट चढ़ गया। किसान जगदीश एंचरा ने बताया कि उसके घर में पानी घुसने के कारण अनाज, भूसे से भरा कमरा, करीब चार क्विंटल नरमा व अन्य सामान नष्ट हो गया। किसान ने बताया कि उसके घर में करीब तीन फुट पानी घुसा हुआ है जिसके चलते उसके परिवार ने छत पर बने चौबारे में रात गुजारी। उधर साथ लगते धापां देवी के घर के सभी कमरों में करीब तीन फुट पानी घुस गया। उसने बताया कि वह वीरवार रात्रि घर में अकेली थी कि पानी का तेज बहाव गली से होकर उसके घर में घुसा तो उसने आनन-फानन में थैलों में मिट्टी भरकर पानी रोकने की नाकाम कोशिश की। धापां देवी ने बताया कि उसके पास कुछ बचा है तो सिर्फ तन के कपड़े। पीड़ित लोगों ने छतों पर पर चढकर रात बिताई। इस आपदा में धापां देवी का गेहूं, भूसा व करीब चार हजार रुपये की नकदी सहित अन्य सामान पानी में बह गया। वहीं किसान रायसिंह कस्वां के अनाज के भंडारण में पानी घुस गया। किसान के अनुसार उसने करीब ढाई सौ मन सरसों, 50 मण गेहूं व करीब 300 मन ग्वार का भंडारण किया हुआ था जिसमें तेज बहाव के साथ पानी घुसने के कारण उसका बड़ा नुकसान हुआ है। उधर नरमा, कपास, ग्वार की पकी फसल के अलावा पशुओं के चारे में कई-कई फीट पानी जमा होने के कारण उस पर भी विपरीत असर पड़ना स्वाभाविक है।
घर खाली कर गए कई परिवार
इस प्राकृतिक आपदा ने कई परिवारों को घर खाली करने को विवश कर दिया। पीड़ित डॉ. सुभाष ने बताया कि उन्हें आनन-फानन में घर से फसल व कीमती सामान उठाना पड़ा। वहीं साथ लगते आत्माराम, पोपराम, सुखराम ने भी अपना घर खाली कर कीमती सामान को साथ लगते मंदिर व अन्य सुरक्षित जगहों पर भिजवाया। पोपराम ने बताया कि उसने कोठड़े में अनाज व पशुओं का चारा भर रखा था लेकिन पानी घुसने के कारण दोनों कोठों में दरार आ गई है जिसके चलते उनके नजदीक कोई नहीं जा रहा। पीड़ित लोग धार्मिक स्थलों के अलावा एक-दूसरे के यहां वक्त गुजार रहे हैं। पीड़ित डॉ. सुभाष, पोपराम आदि ने बताया कि उनके घरों में तीन से चार फुट तक पानी घुसा हुआ है तथा मुख्य गली नहर का रूप धारण किए हुए हैं। पंचायत ने नाथ मोहल्ले से होकर खाईशेरगढ़, भागसर व खुईयांनेपालपुर जाने वाली सड़क को बीच में से उखाड़कर निकासी सुनिश्चित करवाई है लेकिन बरसात का जारी रहना बाधा बन रहा है।
हो सकता है जान-माल का नुकसान
पीड़ित लोगों ने प्रशासन से मदद की गुहार लगाते हुए कहा है कि निकासी उचित प्रबंध कर हुए नुकसान का आंकलन करवाकर उचित मुआवजा दिया जाए। उन्होंने कहा कि निकासी नहीं हो पाती और बरसात अधिक होती है तो जान-माल का खतरा भी हो सकता है। इस प्राकृ तिक आपदा से नाथ मोहल्ले में सबसे अधिक नुकसान हुआ है। उनके घरों में पानी घुसने के कारण मकानों का नुकसान हो रहा है। उक्त लोगों के पास सिर छुपाने के लिए या तो एक -दो कमरे हैं या फिर झोपड़ियां। नाथ समुदाय व अन्य घर गांव के निचले क्षेत्र मेें जोहड़ के छोर पर हैं। गांव का पानी गलियां से होकर जोहड़ में आ रहा है और जोहड़ का पानी ऑवरफ्लो होकर लोगों के घरों में घुस रहा है।
अभी भेजते हैं बीडीपीओ को
अगर ये स्थिति है तो बीडीपीओ को अभी मौके भेज रहे हैं। सबसे पहले हमें लोगों की जान-माल की सुरक्षा करनी जरूरी है। गांव की निकासी दुरूस्त करवाई जाएगी।
--मुनीष नागपाल, एडीसी सिरसा
बीडीपीओ ने लिया जायजा
लोगों की परेशानी जब एडीसी तक पहुंची तो उसके बाद बीडीपीओ बलराज सिंह ने तुरंत गांव में पहुंचकर स्थिति का जायजा लेते हुए पंचायत को निर्देश दिए कि पानी को पम्प की सहायता से साथ लगती खाईशेरगढ़ माइनर में डलवाया जाए। इसके बाद जेसीबी द्वारा गोशाला से खाई खोदकर माइनर की तरफ निकासी के प्रबंध किए गए। उधर डीडीपीओ प्रीतपाल सिंह ने कहा कि वे निकासी कार्य में तेजी ला रहे हैं।
बरसात बनी परेशानी का सबब
जितना हो सकता है उतना कार्य हम कर रहे हैं। लेकि न बरसात परेशानी बन रही है। गांव की निकासी की बड़ी समस्या है। गांव में तीन जोहड़ हैं जिन्हें आपस में जोड़कर करीब 10 फुट चौड़ा व सात फुट गहरे नाले का निर्माण करवाकर बरसाती पानी को रत्ताखेड़ा लिंक चैनल में डाले जाने का प्रबंध होता है तो ये समस्या हमेशा के लिए समाप्त हो सकती है।
-सतवीर कस्वां, सरपंच पन्नीवाला
बडागुढ़ा क्षेत्र में भी नुकसान
बडागुढ़ा क्षेत्र के गांव अलीकां, भीमां, नागोकी, लहंगेवाला, मत्तड़, झिड़ी, थराज व रंगा सहित साथ लगते क्षेत्रों में भी वीरवार रात्रि से हो रही बरसात से बड़े नुकसान का समाचार है। लोगों के घरों में पानी घुसने के कारण कुछ लोगों के मकानों व पकी हुई नरमेें कपास की फसल को भारी नुकसान हुआ है। इस नुकसान के बाद किसानों में भारी चिंता देखी जा रही है। किसान अपने खेतों से पानी निकाल रहे हैं। उधर खंड कृषि विकास अधिकारी सुखविन्द्र सिंह ने हुए नुकसान का आंकलन किया। उन्होंने किसानों से आहवान किया कि वे खेतों से पानी निकालना सुनिश्चित करें तथा दो ग्राम कोवाल्ट क्लोराइड 100 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें। उन्होंने कहा कि जिन किसानों ने फसल बीमा करवा रखा है वो पीड़ित किसान 48 घंटो के अंदर विभाग को सूचित करें।
बारिश बनी आफत, गलियां बनी नदी, घरों में भरा कई फुट पानी
पन्नीवाला मोटा में भारी नुकसान
लोग घरों से सामान निकालकर पहुंचा रहे सुरक्षित स्थानों पर
-नाथ मोहल्ले में हुआ सबसे ज्यादा नुकसान, सैकड़ाें क्विं टल अनाज और पशुचारा चढ़ा पानी की भेंट
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