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साहब 25 बरसों से बंजर जमीन म्हां एक दाणा भी कोनी उग्या, सेम का जल्दी कोई समाधान निकालो
Updated Sat, 24 Mar 2018 01:12 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
सिरसा।
चोपटा क्षेत्र में सेम की समस्या से त्रस्त ग्रामीणों ने चंडीगढ़ व करनाल से आई हाई लेवल कमेटी के सामने अपना दुखड़ा रोया और सेम के खात्मे के सुझाव भी दिए।
हरियाणा ऑपरेशनल पायलट प्रोजेक्ट के डायरेक्टर डॉ. ओपी गोदारा के नेतृत्व में सेम का समाधान खोजने आई वैज्ञानिकों की टीम को इन गांवों के ग्रामीणों ने कहा कि साहब जमीन के म्ह तो सेम की समस्या आगी। इस्तै म्हारी जमीन बंजर होगी जिसमै 25 सालों तै एक दाणा भी ना होया। ईब घर म्ह तो खाने के दाणे भी नहीं रहे। हम तो दाणे-दाणे के मोहताज होगे। साहब सेम की समस्या का जल्दी समाधान निकालो ना तो म्हारी तो बिराण माटी हो री है म्हारै बालक तो अपराधी बण ज्यांगे।
20 ग्राम पंचायतों ने सीएम को भेजा प्रस्ताव
सेम की समस्या के खात्मे को लेकर सरकार भी चिंतित है। सेम ग्रस्त 20 ग्राम पंचायतों द्वारा प्रस्ताव बनाकर हरियाणा बीज विकास निगम के चेयरमैन व भाजपा नेता पवन बैनीवाल के मार्फत मुख्यमंत्री को भेजे गए। मुख्यमंत्री के निर्देश पर सेम की समस्या का हल खोजने के लिए शुक्रवार को चंडीगढ़ व करनाल से हाई लेवल कमेटी जिसमें हरियाणा ऑपरेशनल पायलट प्रोजेक्ट के डायरेक्टर डॉ. ओपी गोदारा, इंजीनियर डॉ. एमएल गुप्ता, वैज्ञानिक असलम पठान, भास्कर नरंजय, राहुल कुमार व सीएसएसआरइआई के सीनियर रिसर्च ऑफिसर अभिषेक ने पूरी तरह से सेम ग्रस्त 14 गावों में जोर यथा स्थिति को जाना।
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टीम ने सेम के समाधान की संभावना तलाशी
टीम सबसे पहले गांव दड़बा कलां में गई तो ग्रामीणों ने फूल मालाओं से टीम का स्वागत किया। इसके बाद हरियाणा बीज विकास निगम के चेयरमैन पवन बैनीवाल व चोपटा ब्लॉक समिति के चेयरमैन विरेंद्र सहू सहित सैकड़ों लोगों ने गांवों, खेतों, मकानों की जर्जर हालत, सेम से बंजर हुई जमीन को दिखाया व समाधान निकालने के लिए सुझाव भी दिए। इसके बाद टीम ने सेम ग्रस्त रूपाणा खुर्द, नारायण खेड़ा, माखोसरानी, लुदेसर, रूपाना बिश्नोइयां, गंजा रूपाना, शक्कर मंदोरी, निरबाण, गुडिया खेड़ा, तरकावाली, नाथूसरी कलां, कैरांवाली गावों का दौरा कर सेम से निपटने की संभावना तलाश की। इसके साथ ही टीम को ड्रेन की सफाई व सेम नाले में भरी गाद को दिखाया और सौर उर्जा आधारित ट्यूबवेल लगाकर समस्या को खत्म करने का सुझाव दिया। प्रस्तावित 108 करोड़ की लागत से चलाए जाने वाले पायलट प्रोग्राम की सफलता की संभावनाएं तलाशी।
22 हजार एकड़ जमीन हो गई बंजर
नाथूसरी कलां में ग्रामीणों ने टीम को बताया कि क्षेत्र में वर्ष 1992 में सेम की शुरूआत हो गई थी। चोपटा क्षेत्र के 20 गावों में 25 साल से करीब 22 हजार एकड़ जमीन सेम के कारण बंजर हो गई है। जमीन में लवणता की मात्रा अधिक होने के कारण अनाज का एक दाना भी नहीं उग पाता। जमीन दलदली होने के कारण किसान खेती से महरूम हो गए हैं और मजदूरी करने को मजबूर हैं। जिनकी जमीन सेम की चपेट में है उन किसानों की हालत बदतर हो गई है। सेम से मकान भी गिर रहे हैं। चोपटा क्षेत्र के दड़बा कलां, मानक दिवान, रूपाणा खुर्द, नारायण खेड़ा, माखोसरानी, लुदेसर, रूपाना बिश्नोइयां, गंजा रूपाना, शक्कर मंदोरी, निरबाण, गुडिया खेड़ा, रूपावास, तरकावाली, नाथूसरी कलां, कैरावाली, शाहपुरिया की जमीन बंजर हो रही है।
एक सप्ताह में कमेटी अपनी रिपोर्ट सौंप देगी : डायरेक्टर
हरियाणा ऑपरेशनल पायलट प्रोजेक्ट के डायरेक्टर डॉ. ओपी गोदारा को इस बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि यहां आकर देखने पर पता चला कि क्षेत्र में सेम की समस्या गंभीर है। इस बारे में सरकार के निर्देश पर सेम ग्रस्त जमीन का निरीक्षण किया गया है। तथा किसानों की परेशानियों को जाना गया व किसानों से सुझाव लिए गए हैं कि किस प्रकार से सेम से निपटा जा सकता है किसानों ने सेम नाले के लेवल को ठीक करवाने व सौर उर्जा आधारित टयूबवेल लगाकर उससे पानी को ड्रेन में डालकर सेम को कम करने का सुझाव दिए हैं। अब एक सप्ताह में हमारी कमेटी अपनी रिपोर्ट आगे सौंप देगी और जल्द ही इस पर काम शुरू हो जाएगा।
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फसल न होने से कर्ज में डूबे किसान
किसान राममूर्ति ने बताया कि उसकी 25 एकड़ जमीन करीब 20 सालों से सेम की चपेट में है। फसलों की बिजाई भी नहीं हो पा रही है। इन्होंने बताया कि अगर सेम की समस्या का जल्द कोई हल नहीं निकाला गया तो जीना दूभर हो जाएगा। आर्थिक तंगी के कारण व कर्ज से दबे होने के कारण बच्चों को पढ़ाया लिखाया भी नहीं जा सकता। बच्चे अब तो नशा तस्करी व अन्य अपराधों मे लिप्त होने लगे हैं। किसान नरेंद्र कुमार ने बताया कि सेम को खत्म करने के लिए सौर उर्जा आधारित नलकूप लगाएं जाएं व सेम नाले का लेवल ठीक किया जाए। सेम नाले की समय-समय पर सफाई होनी चाहिए। किसान रवि कुमार ने कहा कि साहब ईब तो जीना मुश्किल हो गया है। खेती बाड़ी से ही आमदनी होती है वो 20 बरसों से ठप है, बच्चे पूछते हैं कि क्या काम करें तो जवाब देना मुश्किल हो जाता है। कोई जल्दी समाधान ना होया तो बच्चे तो अपराधी ही बणेंगे। टीम के साथ राममूर्ति आर्य, ब्लॉक समिति सदस्य सतबीर सहारण, माखोसरानी के सरपंच सुभाष चंद्र , सीता राम, सहित कई लोगों ने सेम ग्रस्त जमीन का निरीक्षण करवाया। इस पर ग्रामीणों ने टीम को सुझाव दिया कि सौर उर्जा आधारित नलकूप लगाकर सेम का खारा पानी सेम नाले में डाला जाए तो सेम कम हो सकती है और पायलट प्रोजेक्ट को जल्द शुरू करवाया जाए ताकि आगामी फसल की बिजाई करवाई जा सके।
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108 करोड़ रुपये की लागत से प्रोजेक्ट चालू करने की योजना
सेम की समस्या के समाधान के प्रयास किए जा रहे हैं। 20 ग्राम पंचायतों ने सेम की समस्या के समाधान करवाने के प्रस्ताव दिए हैं। इनको लेकर हरियाणा बीज विकास निगम के चेयरमैन पवन बैनीवाल ने मुख्यमंत्री से कई बार मुलाकात की है। मुख्यमंत्री ने सेम की समस्या को खत्म करने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए हैं जिसको लेकर एक टीम ने आज सेम ग्रस्त गावों का दौरा किया और सेम के खात्मे की संभावनाओं को तलाशा। तीन कैटेगरी बनाकर सेम को रोकने के प्रयास किए गए हैं। एक तो बिलकुल बंजर जमीन में क्या किया जाए, दूसरा थोड़ी सेम वाली जमीन से सेम हटाई जाए, इसके अलावा आगे बढ़ रही सेम को रोका जाए। 108 करोड़ रुपये की लागत से एक प्रोजेक्ट चालू करने की योजना पर काम चल रहा है। किसानों ने सौर उर्जा आधारित ट्यूबवेल लगाकर सेम का खारा पानी सेम नाले में डालने का सुझाव दिया है।
- वीरेंद्र सहू चेयरमैन ब्लॉक समिति नाथूसरी चोपटा
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फॅोटो 37:38:39
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चोपटा क्षेत्र में सेम की समस्या से त्रस्त ग्रामीणों ने चंडीगढ़ व करनाल से आई हाई लेवल कमेटी के सामने अपना दुखड़ा रोया और सेम के खात्मे के सुझाव भी दिए।
हरियाणा ऑपरेशनल पायलट प्रोजेक्ट के डायरेक्टर डॉ. ओपी गोदारा के नेतृत्व में सेम का समाधान खोजने आई वैज्ञानिकों की टीम को इन गांवों के ग्रामीणों ने कहा कि साहब जमीन के म्ह तो सेम की समस्या आगी। इस्तै म्हारी जमीन बंजर होगी जिसमै 25 सालों तै एक दाणा भी ना होया। ईब घर म्ह तो खाने के दाणे भी नहीं रहे। हम तो दाणे-दाणे के मोहताज होगे। साहब सेम की समस्या का जल्दी समाधान निकालो ना तो म्हारी तो बिराण माटी हो री है म्हारै बालक तो अपराधी बण ज्यांगे।
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सेम की समस्या के खात्मे को लेकर सरकार भी चिंतित है। सेम ग्रस्त 20 ग्राम पंचायतों द्वारा प्रस्ताव बनाकर हरियाणा बीज विकास निगम के चेयरमैन व भाजपा नेता पवन बैनीवाल के मार्फत मुख्यमंत्री को भेजे गए। मुख्यमंत्री के निर्देश पर सेम की समस्या का हल खोजने के लिए शुक्रवार को चंडीगढ़ व करनाल से हाई लेवल कमेटी जिसमें हरियाणा ऑपरेशनल पायलट प्रोजेक्ट के डायरेक्टर डॉ. ओपी गोदारा, इंजीनियर डॉ. एमएल गुप्ता, वैज्ञानिक असलम पठान, भास्कर नरंजय, राहुल कुमार व सीएसएसआरइआई के सीनियर रिसर्च ऑफिसर अभिषेक ने पूरी तरह से सेम ग्रस्त 14 गावों में जोर यथा स्थिति को जाना।
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टीम ने सेम के समाधान की संभावना तलाशी
टीम सबसे पहले गांव दड़बा कलां में गई तो ग्रामीणों ने फूल मालाओं से टीम का स्वागत किया। इसके बाद हरियाणा बीज विकास निगम के चेयरमैन पवन बैनीवाल व चोपटा ब्लॉक समिति के चेयरमैन विरेंद्र सहू सहित सैकड़ों लोगों ने गांवों, खेतों, मकानों की जर्जर हालत, सेम से बंजर हुई जमीन को दिखाया व समाधान निकालने के लिए सुझाव भी दिए। इसके बाद टीम ने सेम ग्रस्त रूपाणा खुर्द, नारायण खेड़ा, माखोसरानी, लुदेसर, रूपाना बिश्नोइयां, गंजा रूपाना, शक्कर मंदोरी, निरबाण, गुडिया खेड़ा, तरकावाली, नाथूसरी कलां, कैरांवाली गावों का दौरा कर सेम से निपटने की संभावना तलाश की। इसके साथ ही टीम को ड्रेन की सफाई व सेम नाले में भरी गाद को दिखाया और सौर उर्जा आधारित ट्यूबवेल लगाकर समस्या को खत्म करने का सुझाव दिया। प्रस्तावित 108 करोड़ की लागत से चलाए जाने वाले पायलट प्रोग्राम की सफलता की संभावनाएं तलाशी।
22 हजार एकड़ जमीन हो गई बंजर
नाथूसरी कलां में ग्रामीणों ने टीम को बताया कि क्षेत्र में वर्ष 1992 में सेम की शुरूआत हो गई थी। चोपटा क्षेत्र के 20 गावों में 25 साल से करीब 22 हजार एकड़ जमीन सेम के कारण बंजर हो गई है। जमीन में लवणता की मात्रा अधिक होने के कारण अनाज का एक दाना भी नहीं उग पाता। जमीन दलदली होने के कारण किसान खेती से महरूम हो गए हैं और मजदूरी करने को मजबूर हैं। जिनकी जमीन सेम की चपेट में है उन किसानों की हालत बदतर हो गई है। सेम से मकान भी गिर रहे हैं। चोपटा क्षेत्र के दड़बा कलां, मानक दिवान, रूपाणा खुर्द, नारायण खेड़ा, माखोसरानी, लुदेसर, रूपाना बिश्नोइयां, गंजा रूपाना, शक्कर मंदोरी, निरबाण, गुडिया खेड़ा, रूपावास, तरकावाली, नाथूसरी कलां, कैरावाली, शाहपुरिया की जमीन बंजर हो रही है।
एक सप्ताह में कमेटी अपनी रिपोर्ट सौंप देगी : डायरेक्टर
हरियाणा ऑपरेशनल पायलट प्रोजेक्ट के डायरेक्टर डॉ. ओपी गोदारा को इस बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि यहां आकर देखने पर पता चला कि क्षेत्र में सेम की समस्या गंभीर है। इस बारे में सरकार के निर्देश पर सेम ग्रस्त जमीन का निरीक्षण किया गया है। तथा किसानों की परेशानियों को जाना गया व किसानों से सुझाव लिए गए हैं कि किस प्रकार से सेम से निपटा जा सकता है किसानों ने सेम नाले के लेवल को ठीक करवाने व सौर उर्जा आधारित टयूबवेल लगाकर उससे पानी को ड्रेन में डालकर सेम को कम करने का सुझाव दिए हैं। अब एक सप्ताह में हमारी कमेटी अपनी रिपोर्ट आगे सौंप देगी और जल्द ही इस पर काम शुरू हो जाएगा।
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फसल न होने से कर्ज में डूबे किसान
किसान राममूर्ति ने बताया कि उसकी 25 एकड़ जमीन करीब 20 सालों से सेम की चपेट में है। फसलों की बिजाई भी नहीं हो पा रही है। इन्होंने बताया कि अगर सेम की समस्या का जल्द कोई हल नहीं निकाला गया तो जीना दूभर हो जाएगा। आर्थिक तंगी के कारण व कर्ज से दबे होने के कारण बच्चों को पढ़ाया लिखाया भी नहीं जा सकता। बच्चे अब तो नशा तस्करी व अन्य अपराधों मे लिप्त होने लगे हैं। किसान नरेंद्र कुमार ने बताया कि सेम को खत्म करने के लिए सौर उर्जा आधारित नलकूप लगाएं जाएं व सेम नाले का लेवल ठीक किया जाए। सेम नाले की समय-समय पर सफाई होनी चाहिए। किसान रवि कुमार ने कहा कि साहब ईब तो जीना मुश्किल हो गया है। खेती बाड़ी से ही आमदनी होती है वो 20 बरसों से ठप है, बच्चे पूछते हैं कि क्या काम करें तो जवाब देना मुश्किल हो जाता है। कोई जल्दी समाधान ना होया तो बच्चे तो अपराधी ही बणेंगे। टीम के साथ राममूर्ति आर्य, ब्लॉक समिति सदस्य सतबीर सहारण, माखोसरानी के सरपंच सुभाष चंद्र , सीता राम, सहित कई लोगों ने सेम ग्रस्त जमीन का निरीक्षण करवाया। इस पर ग्रामीणों ने टीम को सुझाव दिया कि सौर उर्जा आधारित नलकूप लगाकर सेम का खारा पानी सेम नाले में डाला जाए तो सेम कम हो सकती है और पायलट प्रोजेक्ट को जल्द शुरू करवाया जाए ताकि आगामी फसल की बिजाई करवाई जा सके।
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108 करोड़ रुपये की लागत से प्रोजेक्ट चालू करने की योजना
सेम की समस्या के समाधान के प्रयास किए जा रहे हैं। 20 ग्राम पंचायतों ने सेम की समस्या के समाधान करवाने के प्रस्ताव दिए हैं। इनको लेकर हरियाणा बीज विकास निगम के चेयरमैन पवन बैनीवाल ने मुख्यमंत्री से कई बार मुलाकात की है। मुख्यमंत्री ने सेम की समस्या को खत्म करने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए हैं जिसको लेकर एक टीम ने आज सेम ग्रस्त गावों का दौरा किया और सेम के खात्मे की संभावनाओं को तलाशा। तीन कैटेगरी बनाकर सेम को रोकने के प्रयास किए गए हैं। एक तो बिलकुल बंजर जमीन में क्या किया जाए, दूसरा थोड़ी सेम वाली जमीन से सेम हटाई जाए, इसके अलावा आगे बढ़ रही सेम को रोका जाए। 108 करोड़ रुपये की लागत से एक प्रोजेक्ट चालू करने की योजना पर काम चल रहा है। किसानों ने सौर उर्जा आधारित ट्यूबवेल लगाकर सेम का खारा पानी सेम नाले में डालने का सुझाव दिया है।
- वीरेंद्र सहू चेयरमैन ब्लॉक समिति नाथूसरी चोपटा
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फॅोटो 37:38:39