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अस्पताल में रखा 500 केवीए का ट्रांसफार्मर, प्लांट का ट्रायल शुरू
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नागरिक अस्पताल में लगे ऑक्सीजन प्लांट को शुरू करता इंजीनियर। संवाद
- फोटो : Sirsa
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सिरसा। नागरिक अस्पताल में अब जल्द ही ऑक्सीजन लाइन के माध्यम से मरीजों तक प्लांट की ऑक्सीजन पहुंचना शुरू होगी। अस्पताल में रखे 200 केवीए ट्रांसफार्मर को बदलकर 500 केवीए का ट्रांसफार्मर लगाया गया है। वोल्टेज पूरी होने के बाद अब प्लांट का 48 घंटे के लिए ट्रायल लिया जा रहा है। अब दो दिन बाद गुरुग्राम से एयर लैब की टीम सिरसा में पहुंचेंगी और ऑक्सीजन के सैंपल लेगी।
नागरिक अस्पताल में लगे एक हजार लीटर प्रति मिनट की क्षमता वाले ऑक्सीजन प्लांट की शुद्धता मशीन के अनुसार 93 फीसदी है। लेकिन लैब में सैंपलों की जांच होने के बाद ही इसे मरीजों तक पहुंचाया जा सकता है। 48 घंटे ट्रायल होने के बाद ही इसकी शुद्धता का अनुमान लगाया जा सकता है। इससे दो दिन पहले ही चंडीगढ़ से इंजीनियरों ने पहुंचकर ऑक्सीजन प्लांट को शुरू किया था और दो घंटे तक ट्रायल लिया गया था। इसका प्रशिक्षण सफल पाया गया। वोल्टेज कम होने के कारण प्लांट को जेनरेटर पर ही चालू रखा गया था। इंजीनियरों ने ट्रांसफार्मर में बदलाव होने के बाद 48 घंटे तक इसका ट्रायल लिए जाने की बात कही थी। ट्रांसफार्मर बड़ा रखने के बाद विभाग ने अब इसका ट्रायल शुरू कर दिया है, जोकि शनिवार तक चलेगा।
93 फीसदी से अधिक पाई जा रही है शुद्धता
ऑक्सीजन प्लांट के 48 घंटे तक ट्रायल के दौरान प्लांट की शुद्धता 93 फीसदी से अधिक पाई जा रही है। प्लांट को 24 घंटे से लगातार चलाया जा रहा है। इसके दौरान अभी तक किसी भी तरह की मशीन को कोई कमी नहीं मिली है। ट्रायल के दौरान इसकी शुद्धता भी अभी एक समान ही चल रही है। इसके चलते विभाग को राहत की सांस मिली है। जबकि अन्य कई जिलों में लगे ऑक्सीजन प्लांट में खामियों के कारण अभी तक उनका ट्रायल भी नहीं हो पाया है।
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ट्रांसफार्मर में बदलाव करने के बाद अब ऑक्सीजन प्लांट का ट्रायल लिया जा रहा है। ट्रायल के बाद प्लांट से तैयार होने वाली ऑक्सीजन की लैब में जांच की जाएगी। इसके बाद अस्पताल में बिछाई गई ऑक्सीजन सेंटर लाइन से वार्डों के बेड तक ऑक्सीजन पहुंचाई जाएगी।
-डॉ. मनीष बांसल, सिविल सर्जन, सिरसा
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नागरिक अस्पताल में लगे एक हजार लीटर प्रति मिनट की क्षमता वाले ऑक्सीजन प्लांट की शुद्धता मशीन के अनुसार 93 फीसदी है। लेकिन लैब में सैंपलों की जांच होने के बाद ही इसे मरीजों तक पहुंचाया जा सकता है। 48 घंटे ट्रायल होने के बाद ही इसकी शुद्धता का अनुमान लगाया जा सकता है। इससे दो दिन पहले ही चंडीगढ़ से इंजीनियरों ने पहुंचकर ऑक्सीजन प्लांट को शुरू किया था और दो घंटे तक ट्रायल लिया गया था। इसका प्रशिक्षण सफल पाया गया। वोल्टेज कम होने के कारण प्लांट को जेनरेटर पर ही चालू रखा गया था। इंजीनियरों ने ट्रांसफार्मर में बदलाव होने के बाद 48 घंटे तक इसका ट्रायल लिए जाने की बात कही थी। ट्रांसफार्मर बड़ा रखने के बाद विभाग ने अब इसका ट्रायल शुरू कर दिया है, जोकि शनिवार तक चलेगा।
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93 फीसदी से अधिक पाई जा रही है शुद्धता
ऑक्सीजन प्लांट के 48 घंटे तक ट्रायल के दौरान प्लांट की शुद्धता 93 फीसदी से अधिक पाई जा रही है। प्लांट को 24 घंटे से लगातार चलाया जा रहा है। इसके दौरान अभी तक किसी भी तरह की मशीन को कोई कमी नहीं मिली है। ट्रायल के दौरान इसकी शुद्धता भी अभी एक समान ही चल रही है। इसके चलते विभाग को राहत की सांस मिली है। जबकि अन्य कई जिलों में लगे ऑक्सीजन प्लांट में खामियों के कारण अभी तक उनका ट्रायल भी नहीं हो पाया है।
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ट्रांसफार्मर में बदलाव करने के बाद अब ऑक्सीजन प्लांट का ट्रायल लिया जा रहा है। ट्रायल के बाद प्लांट से तैयार होने वाली ऑक्सीजन की लैब में जांच की जाएगी। इसके बाद अस्पताल में बिछाई गई ऑक्सीजन सेंटर लाइन से वार्डों के बेड तक ऑक्सीजन पहुंचाई जाएगी।
-डॉ. मनीष बांसल, सिविल सर्जन, सिरसा