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बारिश से गेहूं व चने की फसल को फायदा, बादलवाही सरसों के लिए घातक
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अमर उजाला ब्यूरो
चोपटा। राजस्थान की सीमा से सटे पैंतालिसा क्षेत्र में शनिवार रात को हुई हल्की बारिश से गेहूं व चने की फसल को फायदा हुआ है। लेकिन पककर तैयार खड़ी सरसों की फसल के लिए बादलवाई नुकसानदेह साबित हो सकती है। इस बार चोपटा कृषि खंड में 41300 हेक्टेयर में गेहूं, 15800 हेक्टेयर में सरसों, 2100 हेक्टेयर में चने व 1090 हेक्टेयर में जौ फसल की बिजाई की गई है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश से तो रबी की फसल को फायदा ही होगा। लेकिन लगातार बादलवाई से सरसों की फसल में तैला आदि की संभावना बढ़ जाती है। जिससे उत्पादन पर विपरीत असर पड़ सकता है।
क्षेत्र के गांव कागदाना, कुुम्हारिया, खेड़ी, जसानियां, चाहरवाला, जोगीवाला, रामपुरा नवाबाद, गिगोरानी, शाहपुरिया सहित कई गांवों में दो दिन से बादल छाए रहने के बाद हुई बूूंदाबांदी गेहूं व चने की फसल के लिए संजीवनी साबित हो रही है। किसान राज कुमार बैनीवाल व सुभाष चंद्र का कहना है कि बारिश से गेहूं व चने की फसल को फायदा होगा। लेकिन सरसों की फसल तो पककर तैयार है उस पर बूंदाबांदी या ओलावृष्टि हो जाए तो नुकसान हो सकता है।
कृषि विकास अधिकारी डॉ. बहादर राम गोदारा ने बताया कि बेमौसमी बारिश से चने व गेहूं की फसल का तो कोई नुकसान नहीं है, लेकिन बादलवाई से सरसों की फसल पर तैला का प्रकोप बढ़ सकता है।
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चोपटा। राजस्थान की सीमा से सटे पैंतालिसा क्षेत्र में शनिवार रात को हुई हल्की बारिश से गेहूं व चने की फसल को फायदा हुआ है। लेकिन पककर तैयार खड़ी सरसों की फसल के लिए बादलवाई नुकसानदेह साबित हो सकती है। इस बार चोपटा कृषि खंड में 41300 हेक्टेयर में गेहूं, 15800 हेक्टेयर में सरसों, 2100 हेक्टेयर में चने व 1090 हेक्टेयर में जौ फसल की बिजाई की गई है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश से तो रबी की फसल को फायदा ही होगा। लेकिन लगातार बादलवाई से सरसों की फसल में तैला आदि की संभावना बढ़ जाती है। जिससे उत्पादन पर विपरीत असर पड़ सकता है।
क्षेत्र के गांव कागदाना, कुुम्हारिया, खेड़ी, जसानियां, चाहरवाला, जोगीवाला, रामपुरा नवाबाद, गिगोरानी, शाहपुरिया सहित कई गांवों में दो दिन से बादल छाए रहने के बाद हुई बूूंदाबांदी गेहूं व चने की फसल के लिए संजीवनी साबित हो रही है। किसान राज कुमार बैनीवाल व सुभाष चंद्र का कहना है कि बारिश से गेहूं व चने की फसल को फायदा होगा। लेकिन सरसों की फसल तो पककर तैयार है उस पर बूंदाबांदी या ओलावृष्टि हो जाए तो नुकसान हो सकता है।
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कृषि विकास अधिकारी डॉ. बहादर राम गोदारा ने बताया कि बेमौसमी बारिश से चने व गेहूं की फसल का तो कोई नुकसान नहीं है, लेकिन बादलवाई से सरसों की फसल पर तैला का प्रकोप बढ़ सकता है।
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