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हड्डा रोडी की बदबू से परेशान शहरवासी पहुंचे एनजीटी

Sat, 21 Apr 2018 01:24 AM IST
Updated Sat, 21 Apr 2018 01:24 AM IST
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हड्डा रोडी की बदबू से परेशान शहरवासी पहुंचे एनजीटी
अमर उजाला ब्यूरो
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सिरसा।
नगर परिषद की सीमा के अंदर मृत पशुओं की खाल उतारने के लिए बनाई गई हड्डारोड़ी अब प्रशासन के गले की फांस बन गई है। हड्डारोड़ी का मामला अब नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल पहुंच गया है। एनजीटी ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए नगर परिषद सिरसा, डीसी सिरसा, हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और स्थानीय शहरी नगर निकाय विभाग के कमिशभनर को नोटिस जारी किया है।
एनजीटी में सिरसा के जसपाल सिंह और करीब तीन स्कूल संचालकों सहित खाजाखेड़ा और श्मशादबाद पट्टी के ग्रामीणों ने याचिका दायर की है। पहली सुनवाई 18 अप्रैल को हुई और अगली सुनवाई 15 मई को है। एनजीटी ने संबंधित सभी पक्षाें को अपना पक्ष रखने के लिए कहा है।
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नगर परिषद ने कुछ समय पहले शहर से मृत पशुओं को उठाने के लिए टेंडर जारी किया था। यह ठेका पप्पू नामक ठेकेदार ने लिया। उसने मृत पशुओं को खाजाखेड़ा गांव के रकबे में आने वाले 200 गज के प्लॉट में डालना शुरू कर दिया। यह प्लाट ठेके दार का ही था। मृत पशुओं की खाल से निकलने वाली दुर्गंध ने गांव खाजाखेड़ा, श्मशाबाद पट्ठी, वार्ड नंबर 24 और वार्ड नंबर 26 के करीब दस हजार निवासियों का जीना मुश्किल कर दिया। शहरवासियों ने इसके समाधान के लिए जिला प्रशासन और नगर परिषद को शिकायत भी दी, लेकिन समाधान नहीं हुआ। तब खाजाखेड़ा रोड पर रहने वाले जसपाल सिंह, तीन स्कूल संचालक और कुछ शहरवासियों के साथ मिलकर एनजीटी में 28 फरवरी 2019 को याचिका दायर की।
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एनजीटी के जज ने दो महीने केस स्टडी की और जरूरी दस्तावेज शामिल करने के लिए कहा। पहली सुनवाई 18 अप्रैल 2018 को हुई। इसमें नगर परिषद के अधिकारी उपस्थित हुए। एनजीटी ने मामले की सुनवाई अब 15 मई 2018 को है। शहरवासियों द्वारा मृत पशुओं की हड्डारोड़ी को एनजीटी में लेकर जाने पर प्रशासन की चिंताएं बढ़ गईं हैं। नोटिस मिलने पर जिला प्रशासन ने हरियाणा के एडवोकेट जनरल से केस की पैरवी के लिए कहा।

14 किलोमीटर के अंदर नहीं बन सकती हड्डारोड़ी
प्रशासन को कोर्ट में घसीटने वाले याचीकर्ता जसपाल सिंह ने बताया कि ठेकेदार को टेंडर अलॉट करते हुए नियमों की अवहेलना की गई। नगर परिषद एक्ट अनुसार शहर से 14 किलोमीटर की दूरी के अंदर हड्डारोड़ी नहीं बन सकती। यह आबादी से दूर होनी चाहिए। सिरसा में एयरफोर्स स्टेशन है, इसलिए उनसे भी अनुमति लेनी पड़ती है, लेकिन इसमें किसी भी प्रकार के नियमों का पालन नहीं किया गया। मामले से संबंधित करीब 17 आरटीआई से भी नगर परिषद से जानकारी मांगी गई।

तीन साल का है मृत पशुओं का ठेका
शहर के मृत पशुओं को उठाने का ठेका नगर परिषद तीन साल के लिए अलॉट करती है। यह ठेका 2016 में लिया गया और अप्रैल 2019 तक इसकी समय सीमा है। ठेकेदार पिछले दस सालों से ठेका ले रहा है। कुछ समय पहले झीड़ी गांव में जमीन ली गई थी, लेकिन वहां के ग्रामीणों की आपत्ति के बाद इसे हटा दिया गया। कुछ ही महीने पहले जिला प्रशासन ने मृत पशुओं को डालने के लिए विज्ञापन निकाला था और पंचायतों से जमीन मांगी थी। तब सिरसा के तेजियाखेड़ा गांव की पंचायत ने पशुआें को डालने के लिए करीब चार कनाल पंचायती भूमि ठेकेदार को पट्टे पर दी। ठेकेदार ने इसकी कीमत भी अदा कर दी, लेकिन जैसे ही ठेकेदार ने वहां पर चार दीवारी खड़ी करके काम शुरू करने का प्रयास किया तो ग्रामीणों ने विरोध जता दिया और प्रशासन को वापस लौटा दिया। ऐसे में मृत पशुओं को डालने के लिए जगह न मिलना जिला प्रशासन और नगर परिषद के गले की फांस बन गया है, क्योंकि 2014 में भी जिला प्रशासन ने शहर में मरने वाले मृत पशुओं को डालने के लिए पंचायत विभाग से जमीन अलॉट करवाने के लिए कहा था, लेकिन किसी भी पंचायत ने हामी नहीं भरी। ऐसे में मृत पशुओं को डालने के लिए जमीन न मिलना प्रशासन के लिए सिरदर्द बन गया है।


ठेकेदार को नोटिस करके काम बंद करवाया गया : ईओ
ठेकेदार को टेंडर 2016 को जारी किया गया, जोकि उनके कार्यकाल से पहले का है। हमने शिकायत मिलने पर ठेकेदार को तीन नोटिस जारी किए। अंतिम नोटिस में उसे प्लॉट में पशु डालने बंद करने के आदेश जारी कर दिए। ठेकेदार ने पशु डालना बंद कर दिया, लेकिन यदि फिर भी वह नहीं माना तो उसका टेंडर रद्द कर दिया जाएगा और नया टेंडर जारी करने के लिए हाउस में प्रपोजल लाया जाएगा। मृत पशुओं को डालने के लिए प्रशासन नई जगह की तलाश कर रहा है।
-वीरेंद्र सहारण, ईओ, नगर परिषद सिरसा।
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