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200 बसों की जरूरत, 132 से चलाया जा रहा काम, छात्राएं भी लटक कर सफर करने को मजबूर
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सिरसा बस में सफर के दौरान खिड़की से लटके छात्र और छात्राएं।
- फोटो : Sirsa
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सिरसा। रोडवेज विभाग की ओर से यात्रियों को बेहतर सुविधा देने के दावे किए जाते हैं। लेकिन बसों में लटककर और छतों पर सफर करने वाले यात्री रोडवेज की ओर से दी जाने वाली सुविधाओं की पोल खोलते हुए नजर आते हैं। सिरसा डिपो में यात्रियों की संख्या अनुसार 200 बसों की आवश्यकता है लेकिन 132 के सहारे ही काम चलाया जा रहा है। जिनमें से 32 बसें किलोमीटर स्कीम के तहत चलाई जा रही है। वहीं कर्मचारियों की कमी होने के कारण कई रूटों पर फेरे भी मिस होने से यात्रियों को घंटों परेशानी का सामना करना पड़ता है।
बसों की कमी और फेरों के मिस होने के कारण बस स्टैंड और काउंटरों पर यात्रियों की भीड़ लगी हुई दिखाई देती है। यहां तक की छात्राएं भी बसों में लटक सफर करती हुई नजर आती हैं। सुबह और दोपहर के समय विद्यार्थियों की संख्या अधिक होने के कारण बसों में अधिक भीड़ देखने को मिलती है। हालांकि अधिकारी विद्यार्थियों के लिए अलग से बसों का संचालन करने का दावा कर रहे हैं। लेकिन ग्रामीण रूटों पर जान जोखिम में डालकर सफर करने वाले विद्यार्थी इन दावों पर सवाल खड़े करते हुए नजर आ रहे हैं।
32 बसें किलोमीटर योजना की
सिरसा डिपो में कुल 132 बसें ऑनरूट है। इनमें से 100 बसें रोडवेज की तो 32 बसें किलोमीटर स्कीम के तहत चलाई जा रही है। वहीं डबवाली सब डिपो में कुल 36 बसों का संचालन किया जा रहा है। हालांकि सिरसा डिपो में ही 200 बसों की आवश्यकता है। लेकिन बसों की कमी होने के कारण यात्रियों को इस परेशानी का सामना करना पड़ता है। इन बसों का संचालन जिले के 122 रूटों पर किया जाता है। हर रोज करीब 20 हजार यात्री इन बसों में सफर करते हैं।
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काउंटर पर लगने से पहले ही खिड़की से बस में सवार होते हैं विद्यार्थी
सिरसा बस स्टैंड से पंजुआना, गोरीवाली, बिज्जुवाली, बनवाली, रिसालिया खेड़ा, गंगा, संगरिया, नुहियांवाली, मम्मड़ खेड़ा सहित कई रूटों पर चलने वाली बसों में यात्रियों के साथ विद्यार्थियों की संख्या सबसे अधिक रहती है। इन रूटों पर बसों के काउंटर पर लगने से पहले ही विद्यार्थी खिड़की से बस में सवार होते हुए नजर आते हैं। वहीं छात्राओं को इन बसों में सवार होने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। हालांकि इन रूटों पर बसों की संख्या को बढ़ाने के लिए विद्यार्थी कई बार अधिकारियों को भी शिकायत दे चुके हैं। लेकिन इसके बाद भी स्थिति का समाधान नहीं हो पा रहा है।
छात्राओं द्वारा बस की खिड़की में लटक कर सफर करने का वीडियो वायरल
मम्मड़ खेड़ा, केहरवाला व चक्का रूट पर बसों की कमी होने के कारण छात्राओं को इस परेशानी का सामना करना पड़ता है। हालांकि करीब दो दिन पहले ही इस रूट की बस में छात्राओं की ओर से लटक कर सफर करने का वीडियो भी वायरल हुआ है। लेकिन विभाग की ओर से अभी तक स्थिति के समाधान को लेकर कोई भी एक्शन नहीं लिया गया है। हर रोज विद्यार्थियों को खिड़की में लटक कर सफर करने को मजबूर होना पड़ता है।
छात्राओं को सुविधा देने के लिए पांच गुलाबी बसों का संचालन किया जा रहा है। अन्य ग्रामीण रूटों पर जरूरत अनुसार अतिरिक्त बसों का संचालन किया जा रहा है। कर्मचारियों और बसों की कमी होने के कारण इस तरह की परेशानी यात्रियों को उठानी पड़ती है।
-रतनलाल, बस स्टैंड इंचार्ज, सिरसा डिपो
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बसों की कमी और फेरों के मिस होने के कारण बस स्टैंड और काउंटरों पर यात्रियों की भीड़ लगी हुई दिखाई देती है। यहां तक की छात्राएं भी बसों में लटक सफर करती हुई नजर आती हैं। सुबह और दोपहर के समय विद्यार्थियों की संख्या अधिक होने के कारण बसों में अधिक भीड़ देखने को मिलती है। हालांकि अधिकारी विद्यार्थियों के लिए अलग से बसों का संचालन करने का दावा कर रहे हैं। लेकिन ग्रामीण रूटों पर जान जोखिम में डालकर सफर करने वाले विद्यार्थी इन दावों पर सवाल खड़े करते हुए नजर आ रहे हैं।
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32 बसें किलोमीटर योजना की
सिरसा डिपो में कुल 132 बसें ऑनरूट है। इनमें से 100 बसें रोडवेज की तो 32 बसें किलोमीटर स्कीम के तहत चलाई जा रही है। वहीं डबवाली सब डिपो में कुल 36 बसों का संचालन किया जा रहा है। हालांकि सिरसा डिपो में ही 200 बसों की आवश्यकता है। लेकिन बसों की कमी होने के कारण यात्रियों को इस परेशानी का सामना करना पड़ता है। इन बसों का संचालन जिले के 122 रूटों पर किया जाता है। हर रोज करीब 20 हजार यात्री इन बसों में सफर करते हैं।
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काउंटर पर लगने से पहले ही खिड़की से बस में सवार होते हैं विद्यार्थी
सिरसा बस स्टैंड से पंजुआना, गोरीवाली, बिज्जुवाली, बनवाली, रिसालिया खेड़ा, गंगा, संगरिया, नुहियांवाली, मम्मड़ खेड़ा सहित कई रूटों पर चलने वाली बसों में यात्रियों के साथ विद्यार्थियों की संख्या सबसे अधिक रहती है। इन रूटों पर बसों के काउंटर पर लगने से पहले ही विद्यार्थी खिड़की से बस में सवार होते हुए नजर आते हैं। वहीं छात्राओं को इन बसों में सवार होने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। हालांकि इन रूटों पर बसों की संख्या को बढ़ाने के लिए विद्यार्थी कई बार अधिकारियों को भी शिकायत दे चुके हैं। लेकिन इसके बाद भी स्थिति का समाधान नहीं हो पा रहा है।
छात्राओं द्वारा बस की खिड़की में लटक कर सफर करने का वीडियो वायरल
मम्मड़ खेड़ा, केहरवाला व चक्का रूट पर बसों की कमी होने के कारण छात्राओं को इस परेशानी का सामना करना पड़ता है। हालांकि करीब दो दिन पहले ही इस रूट की बस में छात्राओं की ओर से लटक कर सफर करने का वीडियो भी वायरल हुआ है। लेकिन विभाग की ओर से अभी तक स्थिति के समाधान को लेकर कोई भी एक्शन नहीं लिया गया है। हर रोज विद्यार्थियों को खिड़की में लटक कर सफर करने को मजबूर होना पड़ता है।
छात्राओं को सुविधा देने के लिए पांच गुलाबी बसों का संचालन किया जा रहा है। अन्य ग्रामीण रूटों पर जरूरत अनुसार अतिरिक्त बसों का संचालन किया जा रहा है। कर्मचारियों और बसों की कमी होने के कारण इस तरह की परेशानी यात्रियों को उठानी पड़ती है।
-रतनलाल, बस स्टैंड इंचार्ज, सिरसा डिपो

सिरसा रोडवेज बस की खिड़की में लटककर सफर करते विद्यार्थी।- फोटो : Sirsa