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स्कूल की फीस बढ़ाने पर बिफरे अभिभावक, स्कूल में किया हंगामा
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अमर उजाला ब्यूरो
सिरसा। मंगलवार को बरनाला रोड पर स्थित द सिरसा स्कूल में वार्षिक फीस के विरोध सहित 14 मांगों को लेकर अभिभावक रोष जताने स्कूल पहुंच गए। स्कूल प्रिंसिपल और अन्य स्टाफ ने उन्हें बातचीत के लिए ऊपर हाल मेें बुलाया। स्कूल प्रबंधन ने उन्हें वार्षिक फीस बढ़ाने के पीछे अपने तर्क दिए। लेकिन परिजन संतुष्ट नहीं हुए और उनकी स्कूल प्रबंधन से अच्छी खासी बहस हुई।
इससे पहले अभिभावक वार्षिक फीस वृद्धि को लेकर बीते शनिवार को भी स्कूल प्रिंसिपल से मिले थे और 14 मांगों का मांग पत्र स्कूल प्रबंधन को सौंपा। हालांकि करीब एक बजे तक दोनों पक्षों के बीच चली बैठक में कोई नतीजा नहीं निकल पाया। स्कूल प्रिंसिपल ने हायर मैनेजमेंट से बातचीत करके उनके फैसले को बुधवार तक अभिभावकों तक पहुंचाने का आश्वासन दिया।
जानकारी अनुसार सिरसा स्कूल में करीब 70 बच्चों के अभिभावक मंगलवार को स्कूल पहुंचे। सिरसा स्कूल स्टाफ और अभिभावकों के बीच बैठक हुई। अभिभावकों ने कहा कि स्कूल प्रबंधन ने वार्षिक फीस आठ हजार से बढ़ाकर 12 हजार रुपये कर दी है। जबकि मासिक फीस अदा की जा रही है तो सालाना फीस किस बात की दें। स्कूल स्टाफ ने कहा कि हमने बोर्ड ऑफ डायरेक्टर की मीटिंग बुलाई है। अभिभावकों ने स्कूल स्टाफ को कहा कि इन मुद्दों पर पहले ही बैठक हो चुकी है। शनिवार को भी मीटिंग हो चुकी है। वार्षिक चार्ज ले रहे हैं और स्मार्ट क्लास चार्ज भी ले रहे हैं। स्कूल प्रिंसिपल राकेश सचदेवा ने भी अभिभावकों के सामने अपना पक्ष रखा। लेकिन अभिभावक उनके तर्कों से संतुष्ट नहीं हुए।
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एसएमएस भेजने के नाम पर वसूली का आरोप
अभिभावकों ने कहा कि स्कूल प्रबंधन एसएमस भेजने के भी 500 रुपये वार्षिक चार्ज ले रहा है। अभिभावकों ने कहा कि कंप्यूटर एजुकेशन का पार्ट बन गया है फिर भी उसके अलग से पैसे लिए जा रहे हैं। अभिभावकों के गुस्से को देखकर स्कूल स्टाफ के एक सदस्य ने उन्हें कहा कि आप सभी गुस्से में है। लेकिन गुस्से में बच्चों के फ्यूचर से मत खेलें। इससे नाराज एक अभिभावक ने कहा कि यदि आपकों बच्चों का फ्यूचर की इतनी ही चिंता है तो हर महीने अध्यापक क्यों बदल देते हो। कम पैसों में जो मिला, उसे ही रख लिया।
ट्रैक शूट की क्वालिटी घटिया होने का आरोप
अभिभावकों ने कहा कि पिछले वर्ष स्कूल प्रबंधन ने बाला जी ड्रेस दुकान संचालक के साथ टाइअप करके 2500 रुपये में ट्रैक सूट खरीदने के लिए मजबूर किया। लेकिन वह ट्रैक सूट बेहद घटिया क्वालिटी का था। उस पर स्कूल का टैग लगा हुआ था। हम स्कूल की फ्री में एडवरटाइजिंग क्यों करें। अभिभावकों ने कहा कि एक ही पब्लिशर से बुक खरीदने के लिए कहा जाता है। किताबें महंगी हैं। इसे मार्केट में सभी दुकानों पर क्यों नहीं उपलब्ध करवाया जाता।
ये हैं अभिभावकों की 14 मांगे
बच्चों की कम्युनिकेशन स्किल व अंग्रेजी कमजोर है। कंप्यूटर क्लास, स्मार्ट क्लास रूम और रोबोटिक ऐच्छिक होने चाहिए। वार्षिक फीस नहीं होनी चाहिए, यूनिफार्म क्वालिटी बुरी है। हर दुकान पर मिलनी चाहिए, स्कूल ट्रांसपोर्ट ओवरलोडिड होती है। स्थायी अध्यापकों की नियुक्ति हो, अध्यापक कक्षा में अंग्रेजी में बात नहीं करते, सर्दी और गर्मी की छुट्टियों में स्कूल फीस और परिवहन चार्ज अदा नहीं किए जाएंगे, एनसीईआरटी किताबें लगाई जाएं जो हर दुकान पर उपलब्ध हों, एसएमएस चार्ज नहीं दिए जाएंगे, खेल गतिविधियां नहीं होती, हर गतिविधि के अतिरिक्त चार्ज लिए जा रहे हैं। अध्यापक बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने के लिए फोर्स करते हैं यह बंद होना चाहिए।
मैंने कुछ ही दिनों पहले स्कूल का चार्ज लिया है। फीस वृद्धि संस्थान की मजबूरी है। कुछ मांगों को मान भी लिया गया है। साथ ही हमने अभिभावकों की मांगों को स्कूल प्रबंधन तक पहुंचा दिया है। वे जो भी फैसला लेंगे, उसे अभिभावकों को बता दिया जाएगा।
- राकेश सचदेवा, स्कूल प्रिंसिपल, दि सिरसा स्कूल।
फीस बढ़ाने से पहले फार्म 6 देना होता है, स्कूल ने वह भरा हुआ है: डीईओ
निजी स्कूलों को फीस वृद्धि से पहले फार्म 6 देना होता है। स्कूल प्रबंधन ने फार्म भरा हुआ है।
- राजेश चौहान, जिला शिक्षा अधिकारी, सिरसा।
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सिरसा। मंगलवार को बरनाला रोड पर स्थित द सिरसा स्कूल में वार्षिक फीस के विरोध सहित 14 मांगों को लेकर अभिभावक रोष जताने स्कूल पहुंच गए। स्कूल प्रिंसिपल और अन्य स्टाफ ने उन्हें बातचीत के लिए ऊपर हाल मेें बुलाया। स्कूल प्रबंधन ने उन्हें वार्षिक फीस बढ़ाने के पीछे अपने तर्क दिए। लेकिन परिजन संतुष्ट नहीं हुए और उनकी स्कूल प्रबंधन से अच्छी खासी बहस हुई।
इससे पहले अभिभावक वार्षिक फीस वृद्धि को लेकर बीते शनिवार को भी स्कूल प्रिंसिपल से मिले थे और 14 मांगों का मांग पत्र स्कूल प्रबंधन को सौंपा। हालांकि करीब एक बजे तक दोनों पक्षों के बीच चली बैठक में कोई नतीजा नहीं निकल पाया। स्कूल प्रिंसिपल ने हायर मैनेजमेंट से बातचीत करके उनके फैसले को बुधवार तक अभिभावकों तक पहुंचाने का आश्वासन दिया।
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जानकारी अनुसार सिरसा स्कूल में करीब 70 बच्चों के अभिभावक मंगलवार को स्कूल पहुंचे। सिरसा स्कूल स्टाफ और अभिभावकों के बीच बैठक हुई। अभिभावकों ने कहा कि स्कूल प्रबंधन ने वार्षिक फीस आठ हजार से बढ़ाकर 12 हजार रुपये कर दी है। जबकि मासिक फीस अदा की जा रही है तो सालाना फीस किस बात की दें। स्कूल स्टाफ ने कहा कि हमने बोर्ड ऑफ डायरेक्टर की मीटिंग बुलाई है। अभिभावकों ने स्कूल स्टाफ को कहा कि इन मुद्दों पर पहले ही बैठक हो चुकी है। शनिवार को भी मीटिंग हो चुकी है। वार्षिक चार्ज ले रहे हैं और स्मार्ट क्लास चार्ज भी ले रहे हैं। स्कूल प्रिंसिपल राकेश सचदेवा ने भी अभिभावकों के सामने अपना पक्ष रखा। लेकिन अभिभावक उनके तर्कों से संतुष्ट नहीं हुए।
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एसएमएस भेजने के नाम पर वसूली का आरोप
अभिभावकों ने कहा कि स्कूल प्रबंधन एसएमस भेजने के भी 500 रुपये वार्षिक चार्ज ले रहा है। अभिभावकों ने कहा कि कंप्यूटर एजुकेशन का पार्ट बन गया है फिर भी उसके अलग से पैसे लिए जा रहे हैं। अभिभावकों के गुस्से को देखकर स्कूल स्टाफ के एक सदस्य ने उन्हें कहा कि आप सभी गुस्से में है। लेकिन गुस्से में बच्चों के फ्यूचर से मत खेलें। इससे नाराज एक अभिभावक ने कहा कि यदि आपकों बच्चों का फ्यूचर की इतनी ही चिंता है तो हर महीने अध्यापक क्यों बदल देते हो। कम पैसों में जो मिला, उसे ही रख लिया।
ट्रैक शूट की क्वालिटी घटिया होने का आरोप
अभिभावकों ने कहा कि पिछले वर्ष स्कूल प्रबंधन ने बाला जी ड्रेस दुकान संचालक के साथ टाइअप करके 2500 रुपये में ट्रैक सूट खरीदने के लिए मजबूर किया। लेकिन वह ट्रैक सूट बेहद घटिया क्वालिटी का था। उस पर स्कूल का टैग लगा हुआ था। हम स्कूल की फ्री में एडवरटाइजिंग क्यों करें। अभिभावकों ने कहा कि एक ही पब्लिशर से बुक खरीदने के लिए कहा जाता है। किताबें महंगी हैं। इसे मार्केट में सभी दुकानों पर क्यों नहीं उपलब्ध करवाया जाता।
ये हैं अभिभावकों की 14 मांगे
बच्चों की कम्युनिकेशन स्किल व अंग्रेजी कमजोर है। कंप्यूटर क्लास, स्मार्ट क्लास रूम और रोबोटिक ऐच्छिक होने चाहिए। वार्षिक फीस नहीं होनी चाहिए, यूनिफार्म क्वालिटी बुरी है। हर दुकान पर मिलनी चाहिए, स्कूल ट्रांसपोर्ट ओवरलोडिड होती है। स्थायी अध्यापकों की नियुक्ति हो, अध्यापक कक्षा में अंग्रेजी में बात नहीं करते, सर्दी और गर्मी की छुट्टियों में स्कूल फीस और परिवहन चार्ज अदा नहीं किए जाएंगे, एनसीईआरटी किताबें लगाई जाएं जो हर दुकान पर उपलब्ध हों, एसएमएस चार्ज नहीं दिए जाएंगे, खेल गतिविधियां नहीं होती, हर गतिविधि के अतिरिक्त चार्ज लिए जा रहे हैं। अध्यापक बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने के लिए फोर्स करते हैं यह बंद होना चाहिए।
मैंने कुछ ही दिनों पहले स्कूल का चार्ज लिया है। फीस वृद्धि संस्थान की मजबूरी है। कुछ मांगों को मान भी लिया गया है। साथ ही हमने अभिभावकों की मांगों को स्कूल प्रबंधन तक पहुंचा दिया है। वे जो भी फैसला लेंगे, उसे अभिभावकों को बता दिया जाएगा।
- राकेश सचदेवा, स्कूल प्रिंसिपल, दि सिरसा स्कूल।
फीस बढ़ाने से पहले फार्म 6 देना होता है, स्कूल ने वह भरा हुआ है: डीईओ
निजी स्कूलों को फीस वृद्धि से पहले फार्म 6 देना होता है। स्कूल प्रबंधन ने फार्म भरा हुआ है।
- राजेश चौहान, जिला शिक्षा अधिकारी, सिरसा।