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बड़ागुढ़ा में मम्मडख़ेड़ा व कालांवाली में कालूआना माइनर में दरार से 300 एकड़ भूमि जलमग्न
Updated Sat, 23 Jun 2018 01:04 AM IST
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- किसानों ने विभाग के अधिकारियों पर लगाया नहरों की सफाई न करने का आरोप, मुआवजे की मांग
अमर उजाला ब्यूरो
ओढां/कालांवाली। ओढां व कालांवाली क्षेत्र में वीरवार की रात्रि को दो नहरों में आई दरारों ने 300 एकड़ भूमि को जलमग्न कर दिया। जलमग्न हुई भूमि में नरमा, कपास, ग्वार व अन्य फसलों की बिजाई की गई थी। इसके साथ-साथ कई ढाणियां व ट्यूबवेल की मोटरें भी पानी की भेंट चढ़ गई, जिससे किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ा है। नहरें टूटने की सूचना मिलने के काफी देर बाद संबंधित विभाग के अधिकारी टीम सहित मौके पर पहुंचे और पानी की सप्लाई रूकवाकर नहर में आई दरारों को पाटने का कार्य शुरू करवाया।
कालूआना माइनर में 60 से 70 फुट दरार पड़ गई। कालूआना माइनर में पंजाब के गोलूूआना हेड से पानी आता है। जो करीब 30 किलोमीटर दूर है। किसानों का आरोप है कि सूचना देने के बाद भी अधिकारी काफी लेट पहुंचे, जिसके कारण नुकसान अधिक हुआ है। प्रभावित किसानों का कहना है कि नहरों की सफाई न होने के कारण बार-बार नहरें टूटती हैं।
नहर टूटने से गांव तारूआना के किसान भूपिंद्र सिंह, जगपाल सिंह, महक सिंह, पूर्व सरपंच दर्शन सिंह, गदराना के किसान कर्म चंद, मैहमा सिंह, दलबीर सिंह, सुखदेव सिंह, बलजिंद्र सिंह, जैला सिंह, रेशम सिंह, काला सिंह, जगसीर सिंह, मंदर सिंह किसानों की लगभग डेढ़ सौ एकड़ नरमा व अन्य फसलें प्रभावित होने से नुकसान पहुंचा है। किसानों ने सरकार से खराब हुई फसल का मुआवजा देने की मांग की है। गांव के पूर्व सरपंच बेअंत सिंह का कहना है कि जहां से यह नहर टूटी है। वहां पर कुछ माह पूर्व नया मोघा लगाया गया था। नया मोघा लगाने में घटिया निर्माण सामग्री का प्रयोग किया गया।
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विधायक ने लिया जायजा
घटना की सूचना मिलने पर कालांवाली के विधायक बलकौर सिंह भी घटनास्थल पर पहुंचे और नहर टूटने से हुए नुकसान का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि विभाग की लापरवाही के कारण किसानों की फसल का नुकसान हुआ है। उन्होंने किसानों को आश्वासन दिया कि वे इस मामले को अधिकारियों के समक्ष रखेंगे। ताकि किसानों को उचित मुआवजा मिल सके।
नहर टूटने की सूचना मिली थी। जिस पर मैने अधिकारियों को मौके पर भेज दिया था। नहर टूटने के कारणों की जांच करवाई जाएगी। विभाग के पास कर्मचारियों की कमी है। जिसकी वजह से सफाई और देखभाल सही तरीके से नहीं हो पा रही है। पहले साल में दो बार नहरों की सफाई मनरेगा के तहत करवाई जाती थी। लेकिन इस बार टेंडर जारी करने में देरी हो गई।
- केएस नरवारा, एससी नहरी विभाग।
ओढां में मम्मड़खेड़ा ब्रांच टूटने से 80 एकड़ में भरा पानी:
दूसरी ओर सुबाखेडा़ के पास शुक्रवार की सुबह मम्मड़ खेड़ा डिस्ट्रीब्यूटरी टूटने से करीब 80 एकड़ से अधिक रकबे में जलभराव हो गया। गांव सुबाखेडा़ से दौलतपुर खेड़ा के पास गुजरने वाली मम्मड़ खेड़ा डिस्ट्रीब्यूटरी की बुर्जी नं. 62000 के निकट नहर टूट गई। घटना की सूचना मिलते ही किसान मौके पर पहुंचे। बेलदार की सूचना पाकर एसडीओ राजेंद्र कुमार व जेई योगेश कुमार भी मौके पर पहुंचे और उच्चाधिकारियों को स्थित से अवगत करवाकर पानी बंद करवाया। किसानों ने जिला प्रशासन से स्पेशल गिरदावरी करवाकर फसलों में जल भराव के कारण हुए नुकसान के मुआवजे की मांग की है जेई योगेश कुमार ने बताया कि नहर टूटने की सूचना मिलते ही पीछे हेड से पानी बंद करवा दिया है। पानी बंद होने के बाद जेसीबी व ट्रैक्टर-ट्रालियों द्वारा मिट्टी लाकर दरार को पाट दिया जाएगा। ताकि समय पर पानी टेल पर पहुंच सके।
फोटो-01,02
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अमर उजाला ब्यूरो
ओढां/कालांवाली। ओढां व कालांवाली क्षेत्र में वीरवार की रात्रि को दो नहरों में आई दरारों ने 300 एकड़ भूमि को जलमग्न कर दिया। जलमग्न हुई भूमि में नरमा, कपास, ग्वार व अन्य फसलों की बिजाई की गई थी। इसके साथ-साथ कई ढाणियां व ट्यूबवेल की मोटरें भी पानी की भेंट चढ़ गई, जिससे किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ा है। नहरें टूटने की सूचना मिलने के काफी देर बाद संबंधित विभाग के अधिकारी टीम सहित मौके पर पहुंचे और पानी की सप्लाई रूकवाकर नहर में आई दरारों को पाटने का कार्य शुरू करवाया।
कालूआना माइनर में 60 से 70 फुट दरार पड़ गई। कालूआना माइनर में पंजाब के गोलूूआना हेड से पानी आता है। जो करीब 30 किलोमीटर दूर है। किसानों का आरोप है कि सूचना देने के बाद भी अधिकारी काफी लेट पहुंचे, जिसके कारण नुकसान अधिक हुआ है। प्रभावित किसानों का कहना है कि नहरों की सफाई न होने के कारण बार-बार नहरें टूटती हैं।
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नहर टूटने से गांव तारूआना के किसान भूपिंद्र सिंह, जगपाल सिंह, महक सिंह, पूर्व सरपंच दर्शन सिंह, गदराना के किसान कर्म चंद, मैहमा सिंह, दलबीर सिंह, सुखदेव सिंह, बलजिंद्र सिंह, जैला सिंह, रेशम सिंह, काला सिंह, जगसीर सिंह, मंदर सिंह किसानों की लगभग डेढ़ सौ एकड़ नरमा व अन्य फसलें प्रभावित होने से नुकसान पहुंचा है। किसानों ने सरकार से खराब हुई फसल का मुआवजा देने की मांग की है। गांव के पूर्व सरपंच बेअंत सिंह का कहना है कि जहां से यह नहर टूटी है। वहां पर कुछ माह पूर्व नया मोघा लगाया गया था। नया मोघा लगाने में घटिया निर्माण सामग्री का प्रयोग किया गया।
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विधायक ने लिया जायजा
घटना की सूचना मिलने पर कालांवाली के विधायक बलकौर सिंह भी घटनास्थल पर पहुंचे और नहर टूटने से हुए नुकसान का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि विभाग की लापरवाही के कारण किसानों की फसल का नुकसान हुआ है। उन्होंने किसानों को आश्वासन दिया कि वे इस मामले को अधिकारियों के समक्ष रखेंगे। ताकि किसानों को उचित मुआवजा मिल सके।
नहर टूटने की सूचना मिली थी। जिस पर मैने अधिकारियों को मौके पर भेज दिया था। नहर टूटने के कारणों की जांच करवाई जाएगी। विभाग के पास कर्मचारियों की कमी है। जिसकी वजह से सफाई और देखभाल सही तरीके से नहीं हो पा रही है। पहले साल में दो बार नहरों की सफाई मनरेगा के तहत करवाई जाती थी। लेकिन इस बार टेंडर जारी करने में देरी हो गई।
- केएस नरवारा, एससी नहरी विभाग।
ओढां में मम्मड़खेड़ा ब्रांच टूटने से 80 एकड़ में भरा पानी:
दूसरी ओर सुबाखेडा़ के पास शुक्रवार की सुबह मम्मड़ खेड़ा डिस्ट्रीब्यूटरी टूटने से करीब 80 एकड़ से अधिक रकबे में जलभराव हो गया। गांव सुबाखेडा़ से दौलतपुर खेड़ा के पास गुजरने वाली मम्मड़ खेड़ा डिस्ट्रीब्यूटरी की बुर्जी नं. 62000 के निकट नहर टूट गई। घटना की सूचना मिलते ही किसान मौके पर पहुंचे। बेलदार की सूचना पाकर एसडीओ राजेंद्र कुमार व जेई योगेश कुमार भी मौके पर पहुंचे और उच्चाधिकारियों को स्थित से अवगत करवाकर पानी बंद करवाया। किसानों ने जिला प्रशासन से स्पेशल गिरदावरी करवाकर फसलों में जल भराव के कारण हुए नुकसान के मुआवजे की मांग की है जेई योगेश कुमार ने बताया कि नहर टूटने की सूचना मिलते ही पीछे हेड से पानी बंद करवा दिया है। पानी बंद होने के बाद जेसीबी व ट्रैक्टर-ट्रालियों द्वारा मिट्टी लाकर दरार को पाट दिया जाएगा। ताकि समय पर पानी टेल पर पहुंच सके।
फोटो-01,02