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न कोच है और न ही मैदान में सुविधाएं, फिर भी पदकों की आस, जिले के नौ राजीव
Updated Fri, 08 Dec 2017 01:03 AM IST
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न कोच न ही मैदान में सुविधाएं, फिर भी पदकों की आस
अमर उजाला ब्यूरो
सिरसा।
देश में जब खेल और खिलाड़ियों की बात आती है हरियाणा का नाम जुबां पर आता है और हरियाणा में खेलों में सिरसा के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। सिरसा में खिलाड़ी तो खूब हैं, नहीं है तो उनको मिलने वाली सुविधाएं और कोच। बावजूद इसके हम खिलाड़ियों से पदकों की उम्मीद लगाए बैठे हैं। खेल विभाग ने सुधार की दिशा में कुछ कदम उठाए हैं पर इसका लाभ खिलाड़ियों को कब तक मिल पाएगा पता नहीं।
सिरसा का कुछ खेलों में शुरू से ही दबदबा रहा है। हॉकी में सिरसा के गांव संतनगर को हॉकी खिलाड़ियों की नर्सरी कहा जाता है तो गांव जोधकां ने भारतीय महिला हॉकी टीम को गोलकीपर के रूप में सविता पूनिया और नेशनल स्तर की फुटबॉल खिलाड़ी रेखा दी है। वॉलीबॉल में चौटाला, पन्नीवाला मोटा, तरकांवाली ने कई अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी दिए हैं। भावदीन और डबवाली ने फुटबॉल में नेशनल स्तर के कई महिला और पुरुष खिलाड़ी दिए हैं। जूडो, कराटे, तीरंदाजी, हैंडबॉल, बैडमिंटन, क्रिकेट में अनेक राष्ट्रीय और अंतर राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी दिए हैं। सिरसा शहर में शहीद भगत सिंह स्टेडियम और चौ.दलबीर सिंह इंडोर स्टेडियम हैं, जिसकी गिनती प्रदेश के अच्छे खेल स्टेडियम के रूप में होती है। सिरसा और श्रीजीवननगर में हॉकी एस्टोटर्फ मैदान हैं। एक जिले में दो हॉकी एस्टोटर्फ मैदान होना बहुत बड़ी बात है और इसका परिणाम यह है कि देश को कई अंतरराष्ट्रीय और ओलंपियन खिलाड़ी दिए हैं।
सिरसा शुरू से ही कोच की कमी से जूझ रहा है। जिला खेल एवं युवा कल्याण अधिकारी कृष्ण कुमार बेनीवाल से बातचीत की गई तो पता चला कि जिले में लॉन टेनिस के दो अच्छे और बडे़ कोर्ट है पर क ोच नहीं हैं। इसके साथ ही बैडमिंटन में कई राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी हैं पर कोच नहीं हैं, प्राइवेट कोच ही प्रशिक्षण दे रहे हैं। टेबल टेनिस, कबड्डी, वुशू, कराटे, तीरंदाजी, साइकलिंग, बेसबॉल, सॉफ्टबॉॅल, कोर्फबॉल, नेटबॉल, भारत्तोलन, स्कवेश, थ्रो बॉल के क ोच नहीं हैं। खिलाड़ी या तो सीनियर खिलाड़ियों या प्राइवेट कोच के मार्ग दर्शन में कोचिंग ले रहे हैं।
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ये हैं आंकड़े
सिरसा में इस समय एथलेटिक्स-एक, तैराकी-एक, क्रिकेट-एक, कुश्ती-दो (एक सिरसा और एक जोधकां में), जिम्नास्टिक-एक और हॉकी के दो कोच मौजूद हैं। सिरसा के शहीद भगत सिंह स्टेडियम में एक ही ग्राउंडमैन है, हॉकी के एस्टोटर्फ मैदान के रखरखाव के लिए चार-चार ग्राउंडमैन होना जरूरी होता है पर एक ही है। जीवननगर में तो खिलाड़ी और कोच ही काम करते हैं। डबवाली में गुरु गोबिंद सिंह खेल स्टेडियम है पर वहां पर कोई सुविधा नहीं है, स्टेडियम राजनीतिक दलों की रैलियों का स्थल बनकर रह गया है। गांव चौटाला का चौ. साहिबराम स्टेडियम भी सुविधाएं नहीं है पर वॉलीबॉल के खिलाड़ी दे रहा है।
सिरसा जिले में गांव जमाल, कंवरपुरा, धोलपालियां, सुखचैन, गंगा, नुहियांवाली, गोदिकां और बालासर में राजीव गांधी खेल स्टेडियम हैं, पर वहां पर कोई कोच नहीं कोई सुविधा नहीं है। पहले कोच थे जिन्हें जिला मुख्यालय पर बुला लिया गया। बाद में खेल विभाग ने कोच के स्थान पर क्रीडाश्री रखे जिन्हें बाद में हटा दिया गया। अब गांव के पीटीआई, डीपी या सीनियर खिलाड़ी ही कुछ कर रहे हैं। सिरसा में नौ स्थानों पर स्वर्णजयंती खेल नर्सरी स्थापित की गई हैैं। पर ये खिलाड़ियों को रास नहीं आ रही हैं। कहीं रहने की सुविधा नहीं, खिलाड़ी अपने गांव से 30-40 किमी दूर रोजाना नहीं जा सकते।
जिला जिला खेल एवं युवा कल्याण अधिकारी कृष्ण कुमार बेनीवाल ने बताया कि कोच की कमी के देखते हुए उपायुक्त के नेतृत्व में एक कमेटी का गठन किया गया है जो जल्द ही 11 कोच की स्थानीय स्तर पर भर्ती करेगी। उन्होंने बताया कि सिरसा में सिंथेटिक ट्रैक के लिए लिखा गया है। चौ.दलबीर सिंह इंडोर हाल की मरम्मत के लिए एक करोड़ तीन लाख रुपये आए हैं कार्य जारी है। बास्केटबॉॅल और वालीबॉल के सिंथेटिक कोर्ट के लिए पत्र लिखा गया है। इसके साथ ही स्टेडियम में जो भी टूटफूट है उसकी मरम्मत के लिए दस लाख रुपये का बजट भेजा गया है। इससे जल्द ही बहुत सुधार होगा।
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अमर उजाला ब्यूरो
सिरसा।
देश में जब खेल और खिलाड़ियों की बात आती है हरियाणा का नाम जुबां पर आता है और हरियाणा में खेलों में सिरसा के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। सिरसा में खिलाड़ी तो खूब हैं, नहीं है तो उनको मिलने वाली सुविधाएं और कोच। बावजूद इसके हम खिलाड़ियों से पदकों की उम्मीद लगाए बैठे हैं। खेल विभाग ने सुधार की दिशा में कुछ कदम उठाए हैं पर इसका लाभ खिलाड़ियों को कब तक मिल पाएगा पता नहीं।
सिरसा का कुछ खेलों में शुरू से ही दबदबा रहा है। हॉकी में सिरसा के गांव संतनगर को हॉकी खिलाड़ियों की नर्सरी कहा जाता है तो गांव जोधकां ने भारतीय महिला हॉकी टीम को गोलकीपर के रूप में सविता पूनिया और नेशनल स्तर की फुटबॉल खिलाड़ी रेखा दी है। वॉलीबॉल में चौटाला, पन्नीवाला मोटा, तरकांवाली ने कई अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी दिए हैं। भावदीन और डबवाली ने फुटबॉल में नेशनल स्तर के कई महिला और पुरुष खिलाड़ी दिए हैं। जूडो, कराटे, तीरंदाजी, हैंडबॉल, बैडमिंटन, क्रिकेट में अनेक राष्ट्रीय और अंतर राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी दिए हैं। सिरसा शहर में शहीद भगत सिंह स्टेडियम और चौ.दलबीर सिंह इंडोर स्टेडियम हैं, जिसकी गिनती प्रदेश के अच्छे खेल स्टेडियम के रूप में होती है। सिरसा और श्रीजीवननगर में हॉकी एस्टोटर्फ मैदान हैं। एक जिले में दो हॉकी एस्टोटर्फ मैदान होना बहुत बड़ी बात है और इसका परिणाम यह है कि देश को कई अंतरराष्ट्रीय और ओलंपियन खिलाड़ी दिए हैं।
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सिरसा शुरू से ही कोच की कमी से जूझ रहा है। जिला खेल एवं युवा कल्याण अधिकारी कृष्ण कुमार बेनीवाल से बातचीत की गई तो पता चला कि जिले में लॉन टेनिस के दो अच्छे और बडे़ कोर्ट है पर क ोच नहीं हैं। इसके साथ ही बैडमिंटन में कई राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी हैं पर कोच नहीं हैं, प्राइवेट कोच ही प्रशिक्षण दे रहे हैं। टेबल टेनिस, कबड्डी, वुशू, कराटे, तीरंदाजी, साइकलिंग, बेसबॉल, सॉफ्टबॉॅल, कोर्फबॉल, नेटबॉल, भारत्तोलन, स्कवेश, थ्रो बॉल के क ोच नहीं हैं। खिलाड़ी या तो सीनियर खिलाड़ियों या प्राइवेट कोच के मार्ग दर्शन में कोचिंग ले रहे हैं।
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सिरसा में इस समय एथलेटिक्स-एक, तैराकी-एक, क्रिकेट-एक, कुश्ती-दो (एक सिरसा और एक जोधकां में), जिम्नास्टिक-एक और हॉकी के दो कोच मौजूद हैं। सिरसा के शहीद भगत सिंह स्टेडियम में एक ही ग्राउंडमैन है, हॉकी के एस्टोटर्फ मैदान के रखरखाव के लिए चार-चार ग्राउंडमैन होना जरूरी होता है पर एक ही है। जीवननगर में तो खिलाड़ी और कोच ही काम करते हैं। डबवाली में गुरु गोबिंद सिंह खेल स्टेडियम है पर वहां पर कोई सुविधा नहीं है, स्टेडियम राजनीतिक दलों की रैलियों का स्थल बनकर रह गया है। गांव चौटाला का चौ. साहिबराम स्टेडियम भी सुविधाएं नहीं है पर वॉलीबॉल के खिलाड़ी दे रहा है।
सिरसा जिले में गांव जमाल, कंवरपुरा, धोलपालियां, सुखचैन, गंगा, नुहियांवाली, गोदिकां और बालासर में राजीव गांधी खेल स्टेडियम हैं, पर वहां पर कोई कोच नहीं कोई सुविधा नहीं है। पहले कोच थे जिन्हें जिला मुख्यालय पर बुला लिया गया। बाद में खेल विभाग ने कोच के स्थान पर क्रीडाश्री रखे जिन्हें बाद में हटा दिया गया। अब गांव के पीटीआई, डीपी या सीनियर खिलाड़ी ही कुछ कर रहे हैं। सिरसा में नौ स्थानों पर स्वर्णजयंती खेल नर्सरी स्थापित की गई हैैं। पर ये खिलाड़ियों को रास नहीं आ रही हैं। कहीं रहने की सुविधा नहीं, खिलाड़ी अपने गांव से 30-40 किमी दूर रोजाना नहीं जा सकते।
जिला जिला खेल एवं युवा कल्याण अधिकारी कृष्ण कुमार बेनीवाल ने बताया कि कोच की कमी के देखते हुए उपायुक्त के नेतृत्व में एक कमेटी का गठन किया गया है जो जल्द ही 11 कोच की स्थानीय स्तर पर भर्ती करेगी। उन्होंने बताया कि सिरसा में सिंथेटिक ट्रैक के लिए लिखा गया है। चौ.दलबीर सिंह इंडोर हाल की मरम्मत के लिए एक करोड़ तीन लाख रुपये आए हैं कार्य जारी है। बास्केटबॉॅल और वालीबॉल के सिंथेटिक कोर्ट के लिए पत्र लिखा गया है। इसके साथ ही स्टेडियम में जो भी टूटफूट है उसकी मरम्मत के लिए दस लाख रुपये का बजट भेजा गया है। इससे जल्द ही बहुत सुधार होगा।