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हर साल लोगों के खून से लाल हो रही हैं जिले की सड़कें

Sat, 02 Dec 2017 12:47 AM IST
Updated Sat, 02 Dec 2017 12:47 AM IST
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हर साल लोगों के खून से लाल हो रही हैं जिले की सड़कें
हर साल लोगाें के खून से लाल हो रही हैं जिले की सड़कें
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चार सालों के अकाल मौत के आगोश में समाई 479 जिंदगी
अमर उजाला ब्यूरो
सिरसा।
सड़कों पर मौत का तांडव निरंतर जारी है। सड़कें लोगों के खून से लाल हो रही हैं। चार साल के आंकड़ों को ही उठाकर देखा जाए तो सड़क दुर्घटनाओं के कारण 479 लोग अकाल मौत के आगोश में समा चुके हैं, जबकि 914 लोग घायल होकर अस्पतालों पहुंचे। सर्दी का मौसम शुरू होने के बाद धुंध के कारण होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में हर वर्ष सैकड़ों लोग अकाल मौत के आगोश में समा जाते हैं।
पुलिस थानों में दर्ज हुए मामलों का पिछले चार साल के रिकार्ड को उठाकर देखा जाए तो जिले में हर साल 200 से अधिक सड़क हादसे हुए हैं। इन हादसों का सबसे बड़ा कारण वाहन चालकों की लापरवाही, शराब पीकर वाहन चलाना, धुंध और अंधे मोड़ रहे। जिले की कोई ऐसी सड़क नहीं है जहां पर कोई दुर्घटना संभावित स्थान न हो। मुख्य मार्गों पर करीब 49 ऐसे मोड़ हैं जहां पर अक्सर दुर्घटनाएं होती रहती हैं। चाहे वह नेशनल हाईवे हो या फिर कोई अन्य रोड। अधिकांश सड़कों पर दुर्घटना संभावित स्थान हैं। सड़कों पर अधिकांश स्थानों से कोहरे के समय वाहन चालकों के लिए सहायता बनने वाली सफेद पट्टी भी गायब है। इसके अलावा जिले में कोई ऐसा गांव नहीं है जहां पर ब्रेकर न बने हों। धुंध के समय रात के अंधेरे में ये ब्रेकर वाहन चालकों को दिखाई नहीं देते। इन ब्रेकरों पर सफेद पट्टी तक नहीं लगी है। ब्रेकर दिखाई न देने के कारण वाहन चालक हादसों का शिकार हो जाते हैं और जान से भी हाथ धो बैठते हैं। प्रदेशभर की बात की जाए तो वर्ष 2016 में राज्य के अंदर 11234 सड़क हादसे हुए। इन हादसों में 5021 लोगों की मौत हुई और 10531 लोग घायल हुए।
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डबल डेकर से भी हो रहे हैं हादसे
जिले में सड़क हादसों के मेन कारण दो हैं। धुंध के समय ट्रैक्टर-ट्रॉली तो मेलों के दौरान डबल डेकर वाहनों में सवारियां भरने से भी हादसे होते हैं। धुंध में ट्रैक्टर ट्रालियों के पीछे न रिफ्लेक्टर लगे होते हैं और न ही लाइट जलाई गई होती है। जिससे पीछे आ रहे वाहन को ट्रैक्टर ट्राली दिखाई नहीं देती और हादसा हो जाता है। स्थिति उस समय और ज्यादा भयानक हो जाती है, जब वाहन ओवर लोड होता है।
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चार सालों में हो चुके हैं 479 से ज्यादा हादसे
जिले में पिछले चार वर्षों में हुए सड़क हादसे में 479 लोगाें को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। वहीं, करीब एक हजार से अधिक लोग घायल हो गए। मगर स्थिति में फिर भी कोई सुधार नहीं आया है। नेशनल हाईवे पर र तार रोकने के लिए जिला ट्रैफिक पुलिस के पास पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। मात्र एक इंटरसेप्टर के आसरे दुपहिया वाहनों के चालान काटने तक ही प्रयास सीमित हैं।

एनएच पर हुआ था बड़ा हादसा
13 सितंबर 2016 को नेशनल हाईवे पर स्थित पन्नीवाला मोटा के पास बड़ा सड़क हादसा हुआ था। दो डबल डेकर कैंटरों की टक्कर में सात गोगामोड़ी श्रद्धालुओें की मौत हो गई थी, जबकि 48 श्रद्धालु गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इसके अलावा सावंत खेड़ा के पास हादसे में भी छह लोगों की मौत हो गई थी।


हर साल इतने लोगों की हुई मौत
2014 110
2015 154
2016 119
2017 96

हर साल कितने लोग हुए घायल
2014 205
2015 302
2016 218
2017 189

नियमों का करें पालन
सबसे अधिक हादसे वाहनों अधिक गति, ओवर टेकिंग और कोहरे के दौरान होते हैं। वाहन चालकों की लापरवाही सड़क दुर्घटनाओं को बढ़ावा देती है। सड़क सुरक्षा के नियमों का पालन कर सड़क हादसों में कमी लाई जा सकती है। पुलिस भी सड़क सुरक्षा नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले वाहन चालकों के चालान करती है।
-अनिल सोढ़ी, ट्रैफिक पुलिस इंचार्ज, सिरसा।
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