{"_id":"5a1872ed4f1c1bc5758b502d","slug":"11511551725-sirsa-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"कैटल फ्री सिरसा के दावे को ठेंगा दिखा रहे हैं सड़कों पर घूम रहे लावारिस पशु","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कैटल फ्री सिरसा के दावे को ठेंगा दिखा रहे हैं सड़कों पर घूम रहे लावारिस पशु
Updated Sun, 21 Jan 2018 01:41 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमर उजाला ब्यूरो
सिरसा।
बेशक प्रशासन की ओर से सिरसा को लावारिस पशु मुक्त (कैटल फ्री) घोषित कर दिया गया, लेकिन समस्याएं जस की तस हैं। शहर की सड़कों और नेशनल हाईवे पर घूम रहे लावारिस पशु प्रशासन के कैटल फ्री सिरसा के दावे को ठेंगा दिखाते हुए जनता की जान के लिए बड़ा खतरा बने हुए हैं। हादसों के बावजूद प्रशासन इससे कोई सबक नहीं सीख रहा।
प्रशासन का दावा है कि सिरसा को लावारिस पशु मुक्त घोषित करने के बाद सड़कों पर केवल डेढ़ हजार लावारिस पशु बचे हैं, जबकि सच्चाई इससे उलट है और लावारिस पशुओं की संख्या तीन से चार हजार के बीच है। पिछले दो वर्षों में लावारिस पशुओं के क ारण जिलेभर में 70 से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं और सैकड़ों लोग घायल हो चुके हैं। सरकारी कागजों में सिरसा को कैटल फ्री घोषित करने की जल्दबाजी के कारण जनता को खोखले दावे के अलावा कुछ भी हासिल नहीं हो पाया है। शहर के बरनाला रोड, हिसार रोड, बेगू रोड, डबवाली रोड, रानियां रोड, सिविल अस्पताल रोड, नोहरिया बाजार, भादरा बाजार, गोशाला रोड, रंगड़ी रोड सहित सभी 31 वार्डों के अंदर सड़कों और गलियों में लावारिस पशु हर समय दिखाई देते हैं। यही हाल रानियां, ऐलनाबाद, मंडी कालांवाली और मंडी डबवाली विधानसभा क्षेत्रों का है। दस अक्तूबर 2017 को प्रशासन की ओर से सिरसा को कैटल फ्री जिला घोषित किया गया था।
पार्षद जता चुके हैं विरोध
लावारिस पशुओं की भरमार के बावजूद सिरसा को कैटली फ्री करने का विरोध खुद शहर की सरकार यानि नगर परिषद के तमाम पार्षद जता चुके हैं। नगर परिषद पर बीजेपी का कब्जा है और सत्ताधारी पार्टी के नगर पार्षदों ने प्रशासन के फैसले को गलत ठहराते हुए दो दिनों तक उपायुक्त कार्यालय के बाहर धरना प्रदर्शन करना पड़ा। इसके बाद नगर परिषद की ओर से लावारिस पशुओं को पकड़कर गोशाला में छोड़कर आने का अभियान चलाया गया। अभियान के तहत नगर परिषद की ओर से 1200 लावारिस पशु इन दिनों में पकड़े गए हैं।
विज्ञापन
सबसे ज्यादा गोशालाएं हैं सिरसा में
प्रदेशभर में 430 गोशालाएं हैं, इनमें से सबसे ज्यादा गोशालाएं सिरसा जिले में हैं। यहां पर 98 गोशालाएं हैं और इनमें करीब 38 हजार पशु का पालन पोषण किया जा रहा है। प्रशासन की ओर से दावा किया गया है कि जिले में 10 अक्तूबर 2017 तक 17 हजार 348 लावारिस पशुओं को विभिन्न गोशालाओं, नंदीशाला और पशुबाड़ों में पुनर्वास के लिए भेजा दिया गया है, लेकिन पंजाब और राजस्थान से हर रोज ग्रामीण सैकड़ों पशुओं को सिरसा की सीमा में छोड़कर चले जाते हैं। इसलिए सिरसा कैटल फ्री नहीं हो रहा।
इन गोशालाओं में रखे गए हैं पशु
श्रीगोशाला जमाल, माधोसिंघाना, पन्नीवाला मोटा, शेरपुरा, डिंग, रानियां, चौटाला सहित केलनियां स्थित नंदी शाला में लावारिस पशुओं को रखा जा रहा है। गांव फरवाई की गोशाला में भी पशु भेजे जा रहे हैं।
पशु चारे की नहीं पूरी मात्रा में व्यवस्था
लावारिस पशुओं को गोशालाओं में निर्धारित संख्या से ज्यादा रखा जा रहा है। जिस कारण पशुओं के लिए प्रर्याप्त मात्रा में चारे की व्यवस्था गोशालाओं के पास नहीं। कड़वी सच्चाई यह है कि चारे की कमी और क्षमता कम होने के कारण रात को गोशाला से लावारिस पशुओं को छोड़ दिया जाता है। इस वजह से भी पकडे़ गए लावारिस पशु फिर से सड़कों पर वापस आ जाते हैं। सूत्रों के अनुसार गोशाला प्रबंधन की भी कई मजबूरियां होती हैं। नदीशाला में जो लावारिस पशु रखे गए हैं उन्हें भी पूरी मात्रा में सुबह-शाम का चारा नहीं मिल रहा।
यहां हो रही है चूक
जिन पशुपालकों के पशु सड़कों पर हैं, उन पर नियमित कार्रवाई नहीं होती।
शहर में लावारिस पशुओं को पकड़ने में गंभीरता नहीं।
यदि लावारिस पशु के कारण हादसा हो तो इसकी जिम्मेदारी भी तय नहीं है।
नंदीशाला तो बनवाई पर वहां भी अनदेखी।
जी का जंजाल हैं लावारिस पशु
शहर हर गली, मोहल्ले और सड़क पर घूम रहे लावारिस पशु चलते फिरते यमदूत बने हुए हैं। हर समय इन पशुआें को देखकर हादसा होने का भय बना रहता है। प्रशासन ने प्रयास तो कर रहा है, लेकिन इसका सार्थक परिणाम सामने नहीं आ रहे। कैटली फ्री घोषित करने से पहले भी लावारिस पशुओं की भरमार थे और आज भी वैसी ही स्थिति है। प्रशासन गंभीरता से जमीनी स्तर पर काम करे, न की केवल सरकारी कागजों में अभियान को सफल दिखाया जाए।
-अमित सोनी, पार्षद प्रतिनिधि वार्ड नंबर 19
90 प्रतिशत मिली है कामयाबी
जिले से 90 प्रतिशत लावारिस पशुओं को पकड़कर गोशालाओं में भेजा जा चुका है। अब केवल 1500 पशु ही बचे हैं जो सड़क ों पर घूमते दिखाई देते हैं। जल्द ही इनकों भी पकड़कर गोशाला में भेज दिया जाएगा। सबसे बड़ी समस्या पंजाब और राजस्थान से आने वाले पशुओं के कारण हो रही है। वहां के लोग हर रोज सिरसा की सीमा में लावारिस पशु छोड़कर चले जाते हैं और ये पशु शहर की ओर चले आते हैं।
-वीरेंद्र सहारण, ईओ नगर परिषद सिरसा।
विज्ञापन
सिरसा।
बेशक प्रशासन की ओर से सिरसा को लावारिस पशु मुक्त (कैटल फ्री) घोषित कर दिया गया, लेकिन समस्याएं जस की तस हैं। शहर की सड़कों और नेशनल हाईवे पर घूम रहे लावारिस पशु प्रशासन के कैटल फ्री सिरसा के दावे को ठेंगा दिखाते हुए जनता की जान के लिए बड़ा खतरा बने हुए हैं। हादसों के बावजूद प्रशासन इससे कोई सबक नहीं सीख रहा।
प्रशासन का दावा है कि सिरसा को लावारिस पशु मुक्त घोषित करने के बाद सड़कों पर केवल डेढ़ हजार लावारिस पशु बचे हैं, जबकि सच्चाई इससे उलट है और लावारिस पशुओं की संख्या तीन से चार हजार के बीच है। पिछले दो वर्षों में लावारिस पशुओं के क ारण जिलेभर में 70 से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं और सैकड़ों लोग घायल हो चुके हैं। सरकारी कागजों में सिरसा को कैटल फ्री घोषित करने की जल्दबाजी के कारण जनता को खोखले दावे के अलावा कुछ भी हासिल नहीं हो पाया है। शहर के बरनाला रोड, हिसार रोड, बेगू रोड, डबवाली रोड, रानियां रोड, सिविल अस्पताल रोड, नोहरिया बाजार, भादरा बाजार, गोशाला रोड, रंगड़ी रोड सहित सभी 31 वार्डों के अंदर सड़कों और गलियों में लावारिस पशु हर समय दिखाई देते हैं। यही हाल रानियां, ऐलनाबाद, मंडी कालांवाली और मंडी डबवाली विधानसभा क्षेत्रों का है। दस अक्तूबर 2017 को प्रशासन की ओर से सिरसा को कैटल फ्री जिला घोषित किया गया था।
विज्ञापन
पार्षद जता चुके हैं विरोध
लावारिस पशुओं की भरमार के बावजूद सिरसा को कैटली फ्री करने का विरोध खुद शहर की सरकार यानि नगर परिषद के तमाम पार्षद जता चुके हैं। नगर परिषद पर बीजेपी का कब्जा है और सत्ताधारी पार्टी के नगर पार्षदों ने प्रशासन के फैसले को गलत ठहराते हुए दो दिनों तक उपायुक्त कार्यालय के बाहर धरना प्रदर्शन करना पड़ा। इसके बाद नगर परिषद की ओर से लावारिस पशुओं को पकड़कर गोशाला में छोड़कर आने का अभियान चलाया गया। अभियान के तहत नगर परिषद की ओर से 1200 लावारिस पशु इन दिनों में पकड़े गए हैं।
विज्ञापन
सबसे ज्यादा गोशालाएं हैं सिरसा में
प्रदेशभर में 430 गोशालाएं हैं, इनमें से सबसे ज्यादा गोशालाएं सिरसा जिले में हैं। यहां पर 98 गोशालाएं हैं और इनमें करीब 38 हजार पशु का पालन पोषण किया जा रहा है। प्रशासन की ओर से दावा किया गया है कि जिले में 10 अक्तूबर 2017 तक 17 हजार 348 लावारिस पशुओं को विभिन्न गोशालाओं, नंदीशाला और पशुबाड़ों में पुनर्वास के लिए भेजा दिया गया है, लेकिन पंजाब और राजस्थान से हर रोज ग्रामीण सैकड़ों पशुओं को सिरसा की सीमा में छोड़कर चले जाते हैं। इसलिए सिरसा कैटल फ्री नहीं हो रहा।
इन गोशालाओं में रखे गए हैं पशु
श्रीगोशाला जमाल, माधोसिंघाना, पन्नीवाला मोटा, शेरपुरा, डिंग, रानियां, चौटाला सहित केलनियां स्थित नंदी शाला में लावारिस पशुओं को रखा जा रहा है। गांव फरवाई की गोशाला में भी पशु भेजे जा रहे हैं।
पशु चारे की नहीं पूरी मात्रा में व्यवस्था
लावारिस पशुओं को गोशालाओं में निर्धारित संख्या से ज्यादा रखा जा रहा है। जिस कारण पशुओं के लिए प्रर्याप्त मात्रा में चारे की व्यवस्था गोशालाओं के पास नहीं। कड़वी सच्चाई यह है कि चारे की कमी और क्षमता कम होने के कारण रात को गोशाला से लावारिस पशुओं को छोड़ दिया जाता है। इस वजह से भी पकडे़ गए लावारिस पशु फिर से सड़कों पर वापस आ जाते हैं। सूत्रों के अनुसार गोशाला प्रबंधन की भी कई मजबूरियां होती हैं। नदीशाला में जो लावारिस पशु रखे गए हैं उन्हें भी पूरी मात्रा में सुबह-शाम का चारा नहीं मिल रहा।
यहां हो रही है चूक
जिन पशुपालकों के पशु सड़कों पर हैं, उन पर नियमित कार्रवाई नहीं होती।
शहर में लावारिस पशुओं को पकड़ने में गंभीरता नहीं।
यदि लावारिस पशु के कारण हादसा हो तो इसकी जिम्मेदारी भी तय नहीं है।
नंदीशाला तो बनवाई पर वहां भी अनदेखी।
जी का जंजाल हैं लावारिस पशु
शहर हर गली, मोहल्ले और सड़क पर घूम रहे लावारिस पशु चलते फिरते यमदूत बने हुए हैं। हर समय इन पशुआें को देखकर हादसा होने का भय बना रहता है। प्रशासन ने प्रयास तो कर रहा है, लेकिन इसका सार्थक परिणाम सामने नहीं आ रहे। कैटली फ्री घोषित करने से पहले भी लावारिस पशुओं की भरमार थे और आज भी वैसी ही स्थिति है। प्रशासन गंभीरता से जमीनी स्तर पर काम करे, न की केवल सरकारी कागजों में अभियान को सफल दिखाया जाए।
-अमित सोनी, पार्षद प्रतिनिधि वार्ड नंबर 19
90 प्रतिशत मिली है कामयाबी
जिले से 90 प्रतिशत लावारिस पशुओं को पकड़कर गोशालाओं में भेजा जा चुका है। अब केवल 1500 पशु ही बचे हैं जो सड़क ों पर घूमते दिखाई देते हैं। जल्द ही इनकों भी पकड़कर गोशाला में भेज दिया जाएगा। सबसे बड़ी समस्या पंजाब और राजस्थान से आने वाले पशुओं के कारण हो रही है। वहां के लोग हर रोज सिरसा की सीमा में लावारिस पशु छोड़कर चले जाते हैं और ये पशु शहर की ओर चले आते हैं।
-वीरेंद्र सहारण, ईओ नगर परिषद सिरसा।